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नेपाल बदल रहा है….नेपाल के प्रधानमंत्री का नया कानून आज से लागू होगा

सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे का काम अब 12 घंटे होगा और शनिवार और रविवार को छुट्टी होगी, जिससे पेट्रोल और डीज़ल की भी बचत होगी प्रधानमंत्री और गृह…

कुल सांसद 543 लोक सभा + 245 राज्य,एक सांसद की प्रत्यक्ष मासिक भुगतान (वेतन + मुख्य भत्ते): लगभग ₹2,50,000 से ₹2,80,000 प्रति माह।( अन्य सुविधाए अलग से हैं जैसे फोन यात्रा स्वास्थ्य सेवाए और कई सेवाए )

सालाना कुल खर्च (सभी सांसदों के लिए): लगभग ₹3,386 करोड़ (788 सांसदों के लिए)। 543 सांसद क्या कम पड़ रहे थे देश की जनता के टैक्स का पैसा लूटने में…

नेपाल के प्रधानमंत्री का नया कानून आज से लागू होगा

सोमवार से शुक्रवार तक 8 घंटे का काम अब 12 घंटे होगा और शनिवार और रविवार को छुट्टी होगी, जिससे पेट्रोल और डीज़ल की भी बचत होगी प्रधानमंत्री और गृह…

महिला_आरक्षण

महिला आरक्षण विधेयक को औंधे मुँह गिरते देख सचमुच बड़ा ही दुख हुआ था। एक पल को लगा कि लोकतंत्र से कोई चूक हो गई। लेकिन थोड़ी देर बाद समझ…

रामलीला मैदान कटरा में आयोजित सृष्टि के रचयिता महर्षि कश्यप जन्मोत्सव के पावन पर्व पर आयोजित दिव्य सम्मेलन में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, जिला प्रभारी मंत्री, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय नरेंद्र कश्यप जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ !!

कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष भाजपा श्री के सी मिश्र जी, सांसद श्री अरुण सागर जी, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती सपना कश्यप जी एवं श्री लल्ला गुप्ता जी, भाजपा नेता राजीव कश्यप जी,…

घड़ियालों आँसू बहाने के बजाय भाजपा पहले अपने संगठन मे पचास प्रतिशत पद दे और चुनाव मे पचास प्रतिशत टिकट महिलाओं को दे ।पचास प्रतिशत महिला आबादी को तैतीस प्रतिशत आरक्षण का फ़ार्मूला पता नहीं कहाँ से आया वास्तव मे ये पचास प्रतिशत होना चाहिए ।।इसके लिए भाजपा को टींएमसी से सीख लेनी चाहिए ममता बनर्जी की पार्टी में लगभग चालीस प्रतिशत सांसद महिला है बिना किसी आरक्षण के ।इसे कहा जाता है सही और साफ नीयत ।महिलाओं की भागीदारी नीयत से बढ़ेगी आरक्षण लागू हो भी गया और नीयत साफ न हुई तो यह आरक्षण केवल झुनझुना रह जाएगा ठीक वैसे ही जैसे दलितों के लिए और पिछड़ों के लिए आरक्षण है लेकिन उनके लिए आरक्षित सीट कोई न कोई बहाना मिलाकर खाली रखा जाता है इसलिए नीयत ज़्यादा महत्वपूर्ण है ।

घड़ियालों आँसू बहाने के बजाय भाजपा पहले अपने संगठन मे पचास प्रतिशत पद दे और चुनाव मे पचास प्रतिशत टिकट महिलाओं को दे ।पचास प्रतिशत महिला आबादी को तैतीस प्रतिशत…

गर्मी से बचाव — जरूरी सावधानियाँ

ध्यान दें:अप्रैल–मई में लू (Heatwave) सामान्य है।India Meteorological Department समय-समय पर आधिकारिक जानकारी जारी करता है। स्नेहपूर्ण अनुरोध:सोशल मीडिया पर कई तरह की जानकारियाँ साझा होती रहती हैं।ऐसे विषयों के…

कोई कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाने के बाद ये समझने की भूल ना कर बैठना की जो रुतबा, पैसा, पद, गरिमा, शोहरत सम्मान तुम्हें मिल रहा है वो सब तुम्हारी मेहनत, योग्यता, काबिलियत, व संघर्षों से मिला है??? नहीं ये हजारों वर्षों का तुम्हारे पूर्वजों के बलिदानियों के संघर्षों का नतीजा है! जिसे तथागत महामानव गौतम बुद्ध से लेकर उन्हें ज्ञान व जीवन दान देने वाली सुजाता भीलनी की सेवा, विश्व सम्राट अशोक का शौर्य व त्याग, तिलका मांझी के खून का तिलक, चक्रवर्ती महाराजा निषादराज जी के पराकर्म, डा जोगेंद्र नाथ मंडल निषाद जी के त्याग तपस्या समर्पण संघर्ष जो डा अंबेडकर को अंबेडकर बनाए व पाकिस्तान का अमिट संविधान लिख दिए जुब्बा साहनी का हंसता हुआ बलिदान झलकारी बाईं कोली अपने पति पूरण मल्लाह पुत्र प्रारब्ध मल्लाह के साथ फिरंगियों से 27 दिनों तक लोहा झांसी के मैदानों में मर्दानी दिखाती हुई गोलियों से छलनी होकर 1857 की गदर की इतिहास लिखीं, एकलव्य का दान, महात्मा फुले सावित्री का शिक्षा की यज्ञ की आहूति साहू जी का आरक्षण का आगाजिया एलान अंबेडकर का संघर्ष राय साहब रामचरण निषाद जी का इंकलाब भगत सिंह का हंसता हुआ फंसी में मौत, उद्यम सिंह का लन्दन में बदला लेकर मौत कबूलनामा, कोलकाता की गौरव लोकमता रानीराशमणि निषाद की फिरंगियों को सबक सिखाना उनकी त्याग, मुंबा देवी कोली की ललकार बिलासा देवी निषाद की आजादी की हुंकार, अवंती बाई लोधी की नारी शक्ति की मौत को गले लगा कर प्रहार, मंडल जी का मंडल कमीशन का आगाज,विश्व वीरांगना फूलन देवी जी की अस्मिता की बदला दृष्टदलन से सांसद तक का सफ़र समाज को संदेश दिया है झुकना नहीं प्रतिकार करना है आर पार करना है निषाद राज सभ्यत व सम्मान के लिए हदें पार करना है ये इतिहास लाखों लोगों की बलिदानी का फल आज कुछ कुछ समाज को मिल रहा है न्याय के लिए लड़ते रहना है जय निषादराज रूपी मुक्ति के महामंत्र के बुलन्द आवाज से सत्ता की चाभी लेना है सत्ता पर कब्जा करना है You gain the power and kepcher the systemजिस समाज का राजा होता है उसका बाजा बजता है वहीं समाज ताजा होता है बंकी समाज वासा हो जाता है! साहब आनंद निषाद जी के विचारधारा है सुरेश निषाद के कलम से

कोई कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाने के बाद ये समझने की भूल ना कर बैठना की जो रुतबा, पैसा, पद, गरिमा, शोहरत सम्मान तुम्हें मिल रहा है वो सब…

महिला विरोधी कौनजब प्रधानमंत्री लगातार 3 बार बन सकते तो, राजस्थान की महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे क्यों नहीं बन सकतीपर्ची की क्या जरूरत थी,,एक महिला को हटाने के चक्कर में पूरे राजस्थान को बर्बाद कर रखा है,, 20 राज्यों में भाजपा कि सरकार है,,महिला मुख्यमंत्री एक ही क्यों,,जिसे खुद की पत्नी के साथ धोखा कियाजिसने गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बहन को हटाया,,जिसने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा को हटाया,,⦁ जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने उन्नाव में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने मणिपुर में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने महिला पहलवानों के लिए कुछ नहीं किया

अब ये लोग महिला विरोधी माइंडसेट की बात करेंगे?सुरेन्द्र पहलवान

अमेरिका का “झंडू” डोनाल्ड ट्रम्प जो अपनी जुबान को पागलों की तरह बड़बड़ाने के लिये ज्यादा इस्तेमाल करता है,इस बार इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भिड़ गया_😂👉नतीजा.?मेलोनी ने उसे इतिहास की याद दिलाकर चारों खाने चित पटखनी दे दी_💪

हुआ यह कि_ ट्रम्प की अपनी “पवित्र पिता” (Holy Father) वाली फोटो और टिप्पणीयों को मेलोनी ने जैसे ही “अस्वीकार्य” बताया_ ट्रम्प “झंडू” तो वैसे ही ओवन में फुला हुआ…

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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