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सालाना कुल खर्च (सभी सांसदों के लिए): लगभग ₹3,386 करोड़ (788 सांसदों के लिए)।

543 सांसद क्या कम पड़ रहे थे देश की जनता के टैक्स का पैसा लूटने में जो अब इनकी संख्या 850 करने की कोशिश हो रही है,
मैं महिलाओं के 33% आरक्षण के समर्थन में हूं, लेकिन इनको ये 33% इस 543 सीटों में से ही दे देनी चाहिए।

850 लोकसभा सीट करके क्यो देश के आर्थिक स्थिति पर बोझ डाला जा रहा है।
अभी भारत की आम जनता के कष्ट कमाई का लगभग ₹3,386 करोड़ (788 सांसदों के लिए) खर्च होता है,
लेकिन
काम जीरो, रिस्पांसिबिलिटी जीरो, ऊपर से इनको वाई प्लस सिक्योरिटी और विकास कार्य में से कमीशन भी मिलता है। चारों ओर से देश को लूटा जा रहा है
अब सांसद 543 से 850 करने की कोशिश, इसके बाद विधायकों की संख्या तो सीधे सीधे दो से तीन हजार बढ़ेगी।
अब आप अनदाजा लगाओ कितना ज्यादा रुपया इनकी सैलरी और सिक्योरिटी में जाएगा देश का।

विचार कीजिए की इस 33 % मैं, कोई भी गरीब मजदूर किसान या प्रथम वर्ग की महिला सांसद नहीं चुनी जाएगी चुनी जाएगी कंगना जया बच्चन, स्मृति ईरानी जैसी जो __,

आज जिस की केन्द्र मे सरकार है उस की बीस राज्यों में भी सरकार है और महिला मुख्यमंत्री मात्र एक है। कौन से मान सम्मान की बात की जा रही है, समझ में नहीं आ रहा।

ये सीटें बढ़ाकर तो आप अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हो और देश की जनता पर बोझ डाल रहे हो।

जय हिंद
जय भारत।

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