जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण में आप भी बने भागीदार

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संपादक /जिला प्रभारी / संवाददाता /प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया छायाकार जनपद बागपत

विषय :जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण में आप भी बने भागीदार

उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत स्व-गणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक जनपद में संचालित है । आप सभी पत्रकार साथियों से अनुरोध है कि स्वगणना करके देश हित मे योगदान दें 2027 की जनगणना देश के विकास के बदलाव नीतियों में लायेगी नए बदलाव ।
Self Enumeration(स्व गणना) करने का तरीका

Census

SelfEnumeration #CensusofIndia #हरघरगणना

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केरल के बहुत ही होनहार नेता सतीशन जी को केरल का मुख्यमंत्री बनाये जाने पर हार्दिक हार्दिक

शुभकामनाएँ🇮🇳केरल में आज एक ऐसे व्यक्त कोमुख्यमंत्री बनाया गया…जोन किसी राजनीतिक राजघराने से आता है…न जिसके पीछे अरबों की ताकत है , न जिसके पास विरासत में मिली सत्ता थी।बस एक लंबा संघर्ष था🇮🇳V. D. Satheesan ने राजनीति की शुरुआत पोस्टर लगाने से की थी…टीवी डिबेट से नहीं।🇮🇳छात्र राजनीति की…सड़क पर आंदोलन किए…विरोध झेला…अपमान सहा हार भी देखी।लेकिन उन्होंने राजनीति को कभी शॉर्टकट नहीं बनाया।जब दूसरे लोग दिल्ली में पहचान बनाने में लगे थे…🇮🇳तब सतीशन अपने क्षेत्र के लोगों के बीच भरोसा बना रहे थे।धीरे-धीरे वही भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।🇮🇳2021 मेंजब कांग्रेस की बड़ी हार हुई…सबको लगाअब विपक्ष खत्म हो जाएगा।🇮🇳लेकिन उसी दौर मेंएक नेता लगातार लड़ता रहा।🇮🇳विधानसभा में…सड़कों पर…जनता के मुद्दों पर आज उसी संघर्ष का परिणाम है कि कांग्रेस ने उन्हें केरल का मुख्यमंत्री चुना हैये सिर्फ एक नेता की जीत नही है एक संघर्ष की जीत है

Sonia Gandhi
Rahul Gandhi
Priyanka Gandhi Vadra
Indian National Congress
सुरेन्द्र पहलवान

गन्ने की धरती पर आकार ले रही ‘चिया क्रांति’: नीति चर्चा में जिलाधिकारी ने विस्तार से दी जानकारी

रीजनल एग्री पॉलिसी डायलॉग में जलवायु संकट, भूजल गिरावट और किसानों की आय बढ़ाने पर बनी रणनीति

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने साझा किया बागपत का टिकाऊ खेती मॉडल, चिया सीड्स को बताया भविष्य की जरूरत

बागपत 14 मई 2026 — पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहचान रहे गन्ना बेल्ट बागपत में वर्षों से गन्ने की खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस जिले में अब कम पानी, कम लागत और ज्यादा मुनाफे वाली फसलों पर गंभीर नीति चर्चा शुरू हो चुकी है। आज जनता वैदिक पीजी कॉलेज में आयोजित “सस्टेनेबिलिटी मैटर्स रीजनल एग्री पॉलिसी डायलॉग” में यही बदलती तस्वीर उभरकर सामने आई। यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर, खेती की बढ़ती लागत, फसल विविधीकरण और किसानों की आय को लेकर गहन मंथन का मंच बना। प्रशासनिक अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, एफपीओ प्रतिनिधियों, नीति विशेषज्ञों और किसानों ने एक साथ बैठकर इस बात पर चर्चा की कि आने वाले वर्षों में खेती को कैसे टिकाऊ और लाभकारी बनाया जाए।

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा बागपत में तेजी से बढ़ रही चिया सीड्स की खेती को लेकर रही। गन्ना प्रधान क्षेत्र में चिया जैसी सुपरफूड फसल को बढ़ावा देना अब केवल प्रयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की खेती का मॉडल बताया जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि किसानों की आय और कृषि व्यवस्था से जुड़ा बड़ा संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते खेती के तौर-तरीकों में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पानी, मिट्टी और उत्पादन तीनों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। डीएम ने कहा कि बागपत प्रशासन किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित कर रहा है जो कम पानी में तैयार हों, मौसम की मार को बेहतर तरीके से झेल सकें और बाजार में बेहतर मूल्य दिला सकें। इसी सोच के तहत जिले में चिया सीड्स की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि किसानों को चिया की खेती के लिए बाहरी कृषि विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाया गया। बीज चयन से लेकर सिंचाई, पोषण प्रबंधन और बाजार तक की पूरी जानकारी किसानों को दी गई। प्रशासन ने केवल खेती तक सीमित न रहकर फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज पर भी काम किया, ताकि किसानों को फसल बेचने और खरीदने में परेशानी न हो। डीएम अस्मिता लाल ने कहा कि बागपत जैसे गन्ना प्रधान जिले में अब इंटरक्रॉपिंग मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है। कई किसान गन्ने के साथ चिया उगा रहे हैं, जिससे एक ही खेत से अतिरिक्त आय का रास्ता खुल रहा है। चिया फसल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पानी कम लगता है और खराब मौसम का असर भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है। नीलगाय जैसी समस्या भी इस फसल में किसानों को कम परेशान करती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नीलगायों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना लंबे समय से बड़ी समस्या रहा है, ऐसे में चिया जैसी फसल किसानों के लिए राहत बनकर सामने आई है।

कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार गिरता भूजल स्तर अब चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। गन्ना जैसी पारंपरिक फसलें किसानों की आय का मजबूत आधार रही हैं, लेकिन उनकी सिंचाई जरूरतें भी काफी अधिक हैं। ऐसे में कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ना भविष्य की आवश्यकता माना जा रहा है।

सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि अनियमित बारिश, बढ़ता तापमान और भूजल संकट उत्तर प्रदेश की कृषि को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का खतरा आज भी उतना ही गंभीर है जितना पहले था, लेकिन अब इसके प्रभाव खेतों में साफ दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि खेती को बचाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाने की सोच पर्याप्त नहीं होगी। अब ऐसी कृषि व्यवस्था विकसित करनी होगी जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी टिकाऊ हो।

पैनल चर्चा की अध्यक्षता कर रहे जनता वैदिक कॉलेज के डीन (कृषि) प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के कुल गन्ना उत्पादन में 54 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखता है। यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को समझना और समय रहते समाधान तैयार करना जरूरी होगा। उन्होंने कहा कि सिंचाई दक्षता, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और मजबूत कृषि वैल्यू चेन पर अब अधिक काम करने की आवश्यकता है। यदि खेती को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना है तो पारंपरिक मॉडल के साथ आधुनिक और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी अपनाना होगा।

कृभको के वरिष्ठ प्रबंधक वशिष्ठ कुमार नायक ने कहा कि बदलते मौसम में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित पोषण और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि अच्छी उपज के लिए बीज की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण है और किसानों को प्रमाणित स्रोतों से ही बीज खरीदना चाहिए।जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने खेत तालाब योजना, ओडीओपी और कृषि अवसंरचना विकास जैसी योजनाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार अब जल संरक्षण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। कार्यक्रम के दौरान टिकाऊ खेती और नवाचार के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले कई प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बदलते मौसम के बीच नई फसलें अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बनती जा रही हैं।

कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि चिया सीड्स केवल खेती का विकल्प नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती “सुपरफूड इकॉनमी” का हिस्सा है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण देश और विदेश में चिया उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए कई प्रगतिशील किसानों ने कहा कि शुरुआत में नई खेती को लेकर गांवों में संकोच और आशंका थी, लेकिन अब बेहतर परिणाम देखने के बाद अन्य किसान भी रुचि दिखा रहे हैं। किसानों ने कहा कि यदि प्रशासन और बाजार का सहयोग इसी तरह मिलता रहा तो आने वाले समय में जिले में और अधिक किसान चिया जैसी फसलों को अपनाएंगे।

कार्यक्रम में कई किसानों ने कहा कि पहले खेती का मतलब केवल गन्ना और गेहूं तक सीमित था, लेकिन अब बदलते मौसम ने किसानों को सोच बदलने पर मजबूर कर दिया है। किसानों का कहना था कि यदि समय रहते नई खेती नहीं अपनाई गई तो आने वाले वर्षों में पानी और लागत दोनों बड़ी चुनौती बन जाएंगे। यही कारण है कि अब युवा किसान भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सुपरफूड, इंटरक्रॉपिंग और वैल्यू एडेड खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं।
जिले में चिया सीड्स की खेती के शुरुआती परिणामों ने प्रशासन और किसानों दोनों का उत्साह बढ़ाया है। वर्तमान में जनपद के 87 किसान चिया की खेती से जुड़ चुके हैं और अब तक करीब 51,800 किलोग्राम चिया सीड्स का उत्पादन दर्ज किया गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिले की भूमि और जलवायु चिया फसल के लिए अनुकूल साबित हो रही है, जिसके चलते अपेक्षा से बेहतर उत्पादन मिला है। किसानों का भी कहना है कि पहली बार में ही इतनी अच्छी उपज ने उनके भरोसे को मजबूत किया है और अब आसपास के अन्य किसान भी इस खेती की ओर रुचि दिखाने लगे हैं।
पूरे कार्यक्रम में एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि खेती का भविष्य अब केवल उत्पादन नहीं, बल्कि “सस्टेनेबिलिटी” यानी टिकाऊ विकास से जुड़ चुका है। बागपत में आयोजित यह रीजनल एग्री पॉलिसी डायलॉग केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस बदलती सोच का संकेत माना जा रहा है जिसमें खेती को जल, जलवायु, बाजार और किसानों की स्थायी आय से जोड़कर देखा जा रहा है। इस अवसर पर एसडीएम भावना सिंह, कृषि विशेषज्ञ, एफपीओ प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

बरेली के नन्हे मियां ई रिक्शा चालक बुधवार 13 में 2026 को आई आंधी में 50 फुट हवा में उड़ गए और 100 फीट दूर जाकर गिरे जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के लगभग 40 जिलों में आई इस आंधी तूफान में लगभग 104 लोग मारे गए अयोध्या 17 सीतापुर 10 भदोही 15 व अन्य जिलों में 104 लोग मारे गए।

गिरने पर उसके हाथ पैरों में काफी चोट आई है वीडियो बनाने वाले एक लड़के की वीडियो इंटरव्यू भी जबरदस्त तरीके से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है।

वीडियो में नन्हे मियां 50 फीट तक हवा में उड़ते हुए और एक तीन सेट उड़ता हुआ भी दिखाई दे रहा है।

बरेली शहर से 22 किलोमीटर दूर बामियान थाना भमोरा जनपद बरेली नन्हे मियां लगभग 45 वर्ष तीन बिटिया दो बेटे हैं जिनका ई रिक्शा चला कर भरम पोषण करते हैं।

13 में 2026 शाम लगभग 4:30 बजे आंधी तूफान से पहले एक समारोह का सामान लेने के लिए पहुंचे थे उसी समय आंधी तूफान आ गया उन्होंने सोचा कि अगर उन्होंने तीन सेट नहीं पड़ा तो वह तीन सैदपुर जाएगा।

नन्हे मियां ने बताया कि जैसे ही तीन सेट लगा कि उठ जाएगा उन्होंने टीन शेड को रस्सी से बांध और टीन शेड उड़ने लगा और उसके साथ वह भी उड़ गए एक बार तो लगा कि बचना मुश्किल है।

नन्हे मियां ने बताया कि वह 50 हवा में उड़ गए और 100 मीटर दूर खेत में जाकर गिरे उनका वीडियो कब और किसने बनाया उन्हें नहीं पता जब वह जमीन पर गिरे वह मूर्छित हो गए थे उन्हें पता ही नहीं था कि कहां पड़ा है।

वीडियो बनाने वाले युवक अंसारी ने बताया कि मौसम सुहाना था वह मौसम सुहाने की वीडियो बना रहे थे नैन मियां हवा में उड़ने लगे तो उन्होंने देखा कि नन्हे मियां कूद रहे हैं और उन्होंने उसका वीडियो बना लिया जो सोशल मीडिया पर डाला और वायरल हो गया।

तहसील आंवला एसडीएम विद्युत सिंह पलक हॉस्पिटल में पहुंची और नन्हे मियां का हाल जाना। मिली जानकारी के अनुसार काफी चोट है फ्रैक्चर भी हुआ है लेकिन देर रात्रि उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई गुरुवार को तबीयत बिगड़ने पर एक बार फिर उन्हें डॉक्टर यहां दिखाया गया।

80 किलोमीटर पर किलोमीटर की स्पीड से हवा चली जिसमें उत्तर प्रदेश में प्रयागराज में सबसे ज्यादा 21 मौतें हुई और भदोही में 17 मोटे बताई जा रही है।

राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत जनपद की पांडुलिपियों की पहचान के संबंध में जानकारी कराये उपलब्ध

बागपत 12 मई2026 —–
जनपद में “राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण हेतु आधार तैयार करना है।
इसी क्रम में आज कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह द्वारा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर एवं नगर निकाय क्षेत्रों में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना अभियान मोड में एकत्रित की जाए।
उन्होंने कहा कि मंदिर, आश्रम, मदरसा, गुरुकुल, पुस्तकालय, निजी संग्रह एवं अन्य सांस्कृतिक स्थलों पर उपलब्ध संस्कृत, हिंदी, फारसी, अरबी, उर्दू तथा अन्य भाषाओं की पांडुलिपियों को चिन्हित किया जाए, जिससे जनपद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि पांडुलिपि का अर्थ हाथ से लिखी गई मूल प्रति अथवा ग्रंथ से है। यह मुद्रित या टाइप की हुई सामग्री नहीं होती, बल्कि कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र अथवा कपड़े पर हस्तलिखित रूप में तैयार की गई रचना होती है। प्राचीन काल में ज्ञान, साहित्य, धर्म, इतिहास एवं विज्ञान के संरक्षण के लिए इनका व्यापक उपयोग किया जाता था।
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के अनुसार कम से कम 75 वर्ष पुरानी तथा ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक अथवा वैज्ञानिक महत्व रखने वाली हस्तलिखित सामग्री को पांडुलिपि की श्रेणी में रखा जाता है। वेद, पुराण, महाभारत, धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक अभिलेख एवं अन्य हस्तलिखित दस्तावेज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वेक्षण कार्य मिशन मोड में संचालित किया जाए तथा अधिक से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी संकलित कर मुख्य विकास का आधिकारिक कार्यालय में उपलब्ध कराये । मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित खंड विकास अधिकारी अधिशासी अधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित अन्य विभागों को निर्देशित किया कि पांडुलिपि संबंधित कार्य को गंभीरता से लेते हुए मिशन मोड में कार्य करें इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी द्वारा आमजन से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति अथवा संस्था के पास प्राचीन पांडुलिपियां उपलब्ध हों तो उनकी सूचना मोबाइल नंबर 9410400995 पर उपलब्ध कराएं, जिससे जनपद की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी राहुल वर्मा संबंधित खंड विकास अधिकारी समस्त अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित विभागों के आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

भारत के तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए, लेकिन आक्रांताओं के खानदान का अता-पता नहीं

श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी

माननीय मुख्यमंत्री जी ने लाल चंदन का पौधा रोपित कर पौधारोपण का दिया संदेश

आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण कर दुनिया को दिखाई थी भारत की शक्ति: माननीय मुख्यमंत्री जी

बागपत, 11 मई2026—
जनपद बागपत के तहसील बड़ौत अंतर्गत ग्राम मोजीजाबाद नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए।

नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने नवनाथ स्वरूप दर्शन एवं नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित आठवां भंडारा कार्यक्रम में सहभाग किया। उन्होंने श्री नवनाथ स्वरूप दर्शन में श्री अचलअचम्बेनाथ जी, श्री गंजकन्थडनाथ जी, श्री चौरंगी नाथ जी, श्रीमत्स्येन्द्रनाथ जी, श्री गुरु गोरक्षनाथ जी, श्री आदिनाथ जी, श्री उदयनाथ जी, श्री सत्यनाथ जी एवं श्री संतोषनाथ जी की मूर्तियों में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर उनका अनावरण किया। इसके उपरांत उन्होंने संत छोटे लाल एवं लछीनाथ जी की समाधि स्थलों पर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री जी ने यज्ञशाला में पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य यज्ञ में पूर्णाहुति दी तथा मंदिर परिसर में लाल चंदन का पौधा रोपित कर वृक्षारोपण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री जी ने वर्ष 2023 में लगाए गए रुद्राक्ष के पौधे का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी सत्संग भवन पहुंचे और संत-महात्माओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा, संत संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन की ताकत का अहसास कराने बागपत आया हूं। इतिहास गवाह है कि सनातन धर्म ने कभी किसी पर जबरन आधिपत्य स्थापित नहीं किया। किसी को गुलाम नहीं बनाया। जब हम किसी पर जबरन शासन या भूमि पर कब्जा नहीं करते तो हमारा देश इसे कैसे स्वीकार कर सकता था। भारत लगातार विदेशी आक्रांताओं से जूझता रहा, सम-विषम परिस्थितियों में लड़ता रहा। जिन आक्रांताओं ने भारत के सनातन की आस्था के प्रतीक मठ-मंदिरों, तीर्थस्थलों को विखंडित करने का प्रयास किया, वे तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए, लेकिन आक्रांताओं का नामो-निशान नहीं बचा। वे सब मिट्टी में मिल गए। उनके खानदान तक का भी अता-पता नहीं है।

देश व धर्म को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहिए
सीएम योगी ने कहा कि धर्मो रक्षति रक्षितः, यानी आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आपकी रक्षा करेगा। स्वार्थ के लिए धर्म का दुरुपयोग करेंगे तो उससे नष्ट हुआ धर्म हमें भी नष्ट कर डालेगा। हमें जाने-अनजाने देश व धर्म को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहिए। व्यक्तिगत क्षति की भरपाई हो सकती है, लेकिन धर्म की क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। उसका खामियाजा वर्तमान और भावी पीढ़ी भी भुगतेगी।

शक्ति हमारे सामर्थ्य की प्रतीक, यह विश्व कल्याण के लिए महत्वपूर्ण
सीएम योगी ने कहा कि आज 1000 वर्ष की दासता से मुक्ति के लिए सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा का अमृत पर्व भी है। 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। 1951 में आज ही के दिन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के करकमलों से पुनर्प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आज सोमनाथ मंदिर में उपस्थित रहे। मुझे भी काशी विश्वनाथ महादेव के चरणों में इस आयोजन से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। आज ही के दिन अटल जी ने ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में तीन परमाणु विस्फोट किए थे। यह बताता है कि हमारी शक्ति हमारे सामर्थ्य की प्रतीक तो है ही, विश्व कल्याण के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

महाभारत कालीन है बागपत का इतिहास
सीएम योगी ने कहा कि बागपत का इतिहास महाभारत कालीन है। भगवान कृष्ण ने पांडवों के लिए कौरवों से जो पांच गांव मांगे थे, उनमें एक बागपत भी था। चार वर्ष पहले आया था तो यह बहुत छोटा सा स्थान था, लेकिन अर्जुन नाथ जी व उनके सहयोगी ग्रामीणों व श्रद्धालुओं ने इसे तीर्थ बना दिया है। विरासत की रक्षा ऐसे ही होती है। बागपत की इसी धरा ने किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को जन्म दिया था। यहां के डॉ. सत्यपाल सिंह ने मुंबई पुलिस के मुखिया के रूप में कानून का शासन स्थापित किया। चौधरी जयंत सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकदल केंद्र व राज्य सरकार के साथ मिलकर बागपत समेत प्रदेश व देश के विकास के लिए नित नए कीर्तिमान स्थापित करने में सहायक हो रहा है।

आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा
सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है। हम अतीत से जुड़कर ही उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकते हैं। हम काशी विश्वनाथ मंदिर का अपमान विस्मृत नहीं कर सकते। हम अयोध्या के लिए निरंतर लड़ते रहे और डबल इंजन सरकार आई तो राम मंदिर का निर्माण हुआ। पूर्वजों ने हमें राम-राम का संबोधन दिया, क्योंकि जब भी अभिवादन करेंगे तो प्रभु का स्मरण करेंगे। राम मंदिर का निर्माण उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है। सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में रामजन्मभूमि, महाकाल में महालोक, केदारपुरी, विंध्यवासिनी धाम का पुनरुद्धार कार्य हुआ। प्रयास यही रहे कि हमारे घर ही नहीं, बल्कि तीर्थस्थल, देवी-देवताओं के स्थल भी सुरक्षित हों।

धर्म की अलख जगाई महायोगी गुरु गोरखनाथ ने
सीएम ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ भगवान शिव के योगी रूप हैं। योगी रूप में उन्होंने धर्म की अलख जगाने के लिए जनजागरण के विशाल कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उनके सिद्धों, योगियों ने गुलामी कालखंड में भी जन-जागरण के अभियान को निरंतरता प्रदान की। वे योगी गांव-गांव जाकर सारंगीवादन व भजन के माध्यम से समाज को एकजुट कर विदेशी आक्रांताओं का मुकाबला करने के लिए तैयार करते थे, यही उनकी राष्ट्रभक्ति थी। उनके भजनों में संदेश भी होता था कि आक्रांता आ रहा है, तैयार हो जाओ। इससे पहले कि वह आपके गांव व घर तक पहुंचे, उसका काम तमाम कर डालो। योगी सिर्फ गुफाओं, धूनी, मंदिरों तक सीमित नहीं रहे। धर्म व संस्कृति पर हमला होगा तो योगी बैठेगा नहीं, बल्कि मुकाबला कर मुंहतोड़ जवाब देगा। जो संकट के समय निडरता से खड़ा हो, वही संत है। संकट में पलायन करने वाला संत नहीं हो सकता।

इस दौरान प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री जनपद प्रभारी मंत्री जसवंत सिंह सैनी, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री केपी मलिक, सांसद राजकुमार सांगवान, तिजारा राजस्थान के विधायक बाबा बालकनाथ, विधायक अजय कुमार, योगेश धामा, महंत अर्जुननाथ, महंत चेताईनाथ, पीर लहरनाथ, पीर महंत हरिनाथ, समुद्रनाथ, शेरनाथ, जिताई नाथ, पीर राजनाथ जी महाराज, हरिनाथ जी महाराज, श्रीकृष्ण नाथ, महंत मिथिलेश नाथ, पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह ,भाजपा जिला अध्यक्ष नीरज शर्मा मेरठ मंडल मेरठ आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी अस्मिता लाल, पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय आदि मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

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बांकेगंज/प्रतापपुर में हो रहा खुलेआम अवैध खनन

नवागत डीएम की छवि को धूप में कर रहे खनन माफिया

सरकार के दावे खोखले नजर आ रहे हैं एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे करें कि खनन माफियाओं को मिट्टी में मिलने का काम कर रही है लेकिन यहां तो खनन माफिया सरकारी विद्यालय को ही मिट्टी में मिलाने का काम कर रहे हैं आप देख रहे हैं किस तरह प्राथमिक विद्यालय प्रतापपुर ग्रांट नंबर 11 के सटीक विद्यालय की एक फीट की दूरी पर ओवरलोड मिट्टी भरे डंपर किस तरह दौड़ते नजर आ रहे हैं सूत्रों की माने तो खनन अधिकारी राजस्व विभाग की मिली भगत से होता है मिट्टी का अवैध खनन क्या अधिकारियों के ऊपर हो गए खनन माफिया क्यों नक मस्तक हो रहे हैं खनन माफियाओं के आगे खनन अधिकारी और राजस्व विभाग की टीम…???

यह एक गंभीर और चिंताजनक खबर है। उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में खनन माफिया सरकारी जमीनों, स्कूलों के आसपास, और ग्रामीण रास्तों से अवैध रूप से मिट्टी और खनिजों की खुदाई कर रहे हैं।

प्रतापपुर प्राथमिक विद्यालय वही ग्रामीण और स्कूल मार्ग का इस्तेमाल: खनन माफिया जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल करके सरकारी रास्तों और स्कूलों के पास से मिट्टी ले जा रहे हैं।सुरक्षा के लिए खतरा: इन अवैध गतिविधियों के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है, साथ ही प्रधानमंत्री सड़क जैसी बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुँच रहा है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के कुशल नेतृत्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सफल संचालन में आज भगवानपुर नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में आयोजित नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं आठम भंडारा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री जी ने पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थात्मक इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।श्रद्धालुओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के कुशल नेतृत्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सफल संचालन में आज भगवानपुर नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में आयोजित नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं आठम भंडारा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री जी ने पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थात्मक इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार एवं चुनाव आयोग की धांधली को लेकर अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं लिया तो वह ICJ अर्थात International Court of Justice यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत तक जाने की नौबत आई तो वहां भी जाएंगी । Viral

इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं, ‘ सत्य ‘ चैनल के मालिक आशुतोष का कहना है कि ममता बनर्जी को देश के अंदर के मसले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि इससे देश की छवि खराब होगी ।

आशुतोष जी मेरे अच्छे मित्र रहे हैं, जब उनको आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का अध्यक्ष बनाया तो अरविंद केजरीवाल जी ने उनसे कहा कि अवस्थी जी के साथ बैठकर संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करें । तब आशुतोष जी के नोएडा स्थित अपार्टमेंट के स्टडी रूम में हम दोनों ने लगभग 3 घंटे में संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार की थी ।

लेकिन आज मुझे आशुतोष जी के बयान को लेकर आश्चर्य हुआ । दो दिनों से सम्पूर्ण विदेशी खासकर अमेरिकी मीडिया में बंगाल के चुनाव में 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने खासकर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, एक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र जैसे विख्यात लोगों के नाम काटने को लेकर भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बारे में खबरें छप रही हैं। ऐसे में अगर इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने में क्या दिक्कत है ?

जब हमारा सुप्रीम कोर्ट 27 लाख लोगों के नाम मृत्यु होने के कारण काटने के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए और अपने जीवित होने के प्रमाण दिखाए तो माननीय जस्टिस महोदय ने जो जवाब दिया वह घोर निंदनीय है । मुख्य न्यायाधीश तक ने कहा कि कोई बात नहीं, ” अगली बार चुनाव में आपका नाम आ जाएगा ” ।

ऐसे न्यायाधीशों के खिलाफ और कहां आवाज उठाई जा सकती है ? महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी ने तो जब से पद ग्रहण किया है, मौन व्रत धारण किया हुआ है । जब देश का प्रथम नागरिक तक मूक दर्शक बन जाए खासकर तब जब देश की अंतरराष्ट्रीय पहलवान बेटियों को जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस के Male सिपाहियों, इंस्पेक्टर आदि ने उनके शारीरिक अंगों पर हाथ रखकर सड़क पर घसीटा, मारा , महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी के मुंह में लगा ताला बंद का बंद ही रहा ।

ऐसी स्थिति में मेरा मानना है कि न केवल ICJ बल्कि UNO तक में लगातार गत एक दशक से केंद्र सरकार की goon गिरी अर्थात निरंकुशता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ही इन दोनों संस्थाओं को गठित किया गया है ।

ढाई लाख केंद्रीय बलों एवं बंगाल राज्य की पुलिस, केंद्र की सारी खुफिया एजेंसी की उपस्थिति के बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार शुभेंदु अधिकारी के PA की तथा दो TMC के कार्यकर्ताओं की 24 घंटे में हत्या हो जाती है, शुभेंदु के PA की हत्या के लिए भाजपा ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को फंसाने के कुचक्र रच रही है । साथ ही शुभेंदु अधिकारी & उसके लोग यह भी कह रहे हैं कि उसके PA को मारने वाले बांग्लादेश से आए शूटर थे ।

अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल में लगभग एक महीने से डेरा डाले रहने के बावजूद अगर बंगला देश के शूटर बंगाल में आए तो मोदी जी ने अभी तक गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त कर उनके खिलाफ जांच क्यों नहीं बिठाई ?

हरीश अवस्थी ।

ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार एवं चुनाव आयोग की धांधली को लेकर अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं लिया तो वह ICJ अर्थात International Court of Justice यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत तक जाने की नौबत आई तो वहां भी जाएंगी । Viral

इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं, ‘ सत्य ‘ चैनल के मालिक आशुतोष का कहना है कि ममता बनर्जी को देश के अंदर के मसले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि इससे देश की छवि खराब होगी ।

आशुतोष जी मेरे अच्छे मित्र रहे हैं, जब उनको आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का अध्यक्ष बनाया तो अरविंद केजरीवाल जी ने उनसे कहा कि अवस्थी जी के साथ बैठकर संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करें । तब आशुतोष जी के नोएडा स्थित अपार्टमेंट के स्टडी रूम में हम दोनों ने लगभग 3 घंटे में संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार की थी ।

लेकिन आज मुझे आशुतोष जी के बयान को लेकर आश्चर्य हुआ । दो दिनों से सम्पूर्ण विदेशी खासकर अमेरिकी मीडिया में बंगाल के चुनाव में 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने खासकर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, एक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र जैसे विख्यात लोगों के नाम काटने को लेकर भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बारे में खबरें छप रही हैं। ऐसे में अगर इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने में क्या दिक्कत है ?

जब हमारा सुप्रीम कोर्ट 27 लाख लोगों के नाम मृत्यु होने के कारण काटने के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए और अपने जीवित होने के प्रमाण दिखाए तो माननीय जस्टिस महोदय ने जो जवाब दिया वह घोर निंदनीय है । मुख्य न्यायाधीश तक ने कहा कि कोई बात नहीं, ” अगली बार चुनाव में आपका नाम आ जाएगा ” ।

ऐसे न्यायाधीशों के खिलाफ और कहां आवाज उठाई जा सकती है ? महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी ने तो जब से पद ग्रहण किया है, मौन व्रत धारण किया हुआ है । जब देश का प्रथम नागरिक तक मूक दर्शक बन जाए खासकर तब जब देश की अंतरराष्ट्रीय पहलवान बेटियों को जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस के Male सिपाहियों, इंस्पेक्टर आदि ने उनके शारीरिक अंगों पर हाथ रखकर सड़क पर घसीटा, मारा , महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी के मुंह में लगा ताला बंद का बंद ही रहा ।

ऐसी स्थिति में मेरा मानना है कि न केवल ICJ बल्कि UNO तक में लगातार गत एक दशक से केंद्र सरकार की goon गिरी अर्थात निरंकुशता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ही इन दोनों संस्थाओं को गठित किया गया है ।

ढाई लाख केंद्रीय बलों एवं बंगाल राज्य की पुलिस, केंद्र की सारी खुफिया एजेंसी की उपस्थिति के बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार शुभेंदु अधिकारी के PA की तथा दो TMC के कार्यकर्ताओं की 24 घंटे में हत्या हो जाती है, शुभेंदु के PA की हत्या के लिए भाजपा ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को फंसाने के कुचक्र रच रही है । साथ ही शुभेंदु अधिकारी & उसके लोग यह भी कह रहे हैं कि उसके PA को मारने वाले बांग्लादेश से आए शूटर थे ।

अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल में लगभग एक महीने से डेरा डाले रहने के बावजूद अगर बंगला देश के शूटर बंगाल में आए तो मोदी जी ने अभी तक गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त कर उनके खिलाफ जांच क्यों नहीं बिठाई ?

हरीश अवस्थी ।

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