🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩🌤️ दिनांक – 17 मई 2026🌤️ दिन – रविवार🌤️ विक्रम संवत – 2083🌤️ शक संवत – 1948🌤️ अयन – उत्तरायण🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ऋतु🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ🌤️ पक्ष – शुक्ल🌤️ तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:40 तक तत्पश्चात द्वितीया🌤️ नक्षत्र – कृत्तिका दोपहर 02:32 तक तत्पश्चात रोहिणी🌤️ योग – शोभन सुबह 06:15 तक तत्पश्चात अतिगण्ड🌤️राहुकाल – शाम 05:32 से शाम 07:10 तक🌤️ सूर्योदय – 06:01🌤️ सूर्यास्त – 07:09👉 दिशाशूल – पश्चिम दिशा में🚩 व्रत पर्व विवरण – अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ, चंद्र-दर्शन (रात्रि 07:02 से रात्रि 07:50 तक)

🚩 ~ सनातन पंचांग ~ 🚩
🌤️ दिनांक – 17 मई 2026
🌤️ दिन – रविवार
🌤️ विक्रम संवत – 2083
🌤️ शक संवत – 1948
🌤️ अयन – उत्तरायण
🌤️ ऋतु – ग्रीष्म ऋतु
🌤️ मास – अधिक ज्येष्ठ
🌤️ पक्ष – शुक्ल
🌤️ तिथि – प्रतिपदा रात्रि 09:40 तक तत्पश्चात द्वितीया
🌤️ नक्षत्र – कृत्तिका दोपहर 02:32 तक तत्पश्चात रोहिणी
🌤️ योग – शोभन सुबह 06:15 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
🌤️राहुकाल – शाम 05:32 से शाम 07:10 तक
🌤️ सूर्योदय – 06:01
🌤️ सूर्यास्त – 07:09
👉 दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
🚩 व्रत पर्व विवरण – अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ, चंद्र-दर्शन (रात्रि 07:02 से रात्रि 07:50 तक)

🍃 Arogya 🍃आम के आम गुठलियों के भी दाम, जानिये 10 चामत्कारिक लाभ———————————-आम के आम गुठलियों के भी दाम यह कहावत तो आपने पहले भी कई बार सुनी होगी लेकिन आज इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि यह बिल्कुल सच है।आम की गुठली का सेवन करने के लिए या तो उसका पाउडर तैयार किया जाता है या फिर कुछ प्रोसेस की मदद से आम की गुठली से तेल भी निकाला जाता है, जो काफी फायदेमंद होता है। गुठली को तोड़कर उसके अंदरूनी भाग को सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है, जिसे खाने में फ्लेवर के रूप में भी मिला लिया जाता है।

सिर्फ आम ही नहीं बल्कि उसकी गुठली भी हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है,गर्मी का मौसम वैसे तो किसी को पसंद नहीं होता, लेकिन एक चीज है, जिसकी वजह से कुछ लोग इस मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं और वो है आम। आम को फलों का राजा कहा जाता है और यह एक ऐसा फल होता है, जिसे बच्चे, बूढ़े, जवां सब लोग ही पसंद करते हैं, जिससे भी आप पूछेंगे वही कहेगा कि आम उसका पसंदीदा फल है। कच्चा हो या पक्का दोनों ही आम का अपना-अपना महत्व होता है, कच्चा आम का लोग अचार डालते हैं, या फिर दाल में डालते हैं, चटनी भी बनाई जाती है, इसी तरह पक्के आम को भी लोग बड़े चाव से खाते हैं। सिर्फ आम ही नहीं बल्कि उसकी गुठली भी हमारी सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है, आइए आम की गुठली के फायदों के बारे में विस्तार से बताते हैं।
आपमें से बहुत से लोग नहीं जानते होंगे कि आम की गुठली हमारे शरीर के लिए कितनी फायदेमंद होती है, बता दें कि इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाएं जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। आम की गुठलियों के फायदे के बारे में जान, आप यकीनन आगे से इसकी गुठली फेकने से पहले 10 बार सोचेंगे।

1. व्हाइट डिस्चार्ज
व्हाइट डिस्चार्ज महिलाओं की कॉमन समस्या है, हालांकि ये समस्या आम की गुठली खाने से ठीक हो सकती है, जी हां! आम की गुठली के सेवन से व्हाइट डिस्चार्ज बंद हो जाता है।

2. डैंड्रफ से छुटकारा
आम की गुठली से डैंड्रफ की समस्या भी दूर की जा सकती है, बस इसके लिए आम की गुठली का पाउडर बनाकर बालों में लगाना है, इससे जल्द ही डैंड्रफ गायब हो जायेंगे।

3. कोलेस्ट्रॉल रहता है कंट्रोल
आम की गुठली का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल में रहता है, सिर्फ यही नहीं, आम की गुठली इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। साथ ही बीपी कंट्रोल करने में भी आम की गुठली मददगार होती है।

4. ओरल हेल्थ बेहतर रहती है
दांतो की ठीक से सफाई न होने पर उनमें सड़न और दर्द की समस्या हो सकती है। ऐसे में आम की गुठली से बना पाउडर दांतों से प्लेग साफ करने में मदद कर सकता है। इसके पाउडर से ब्रश करने से दांत मजबूत और हेल्दी बनते हैं।

5. हेल्दी हार्ट
आम की गुठली कोलेस्ट्रॉल तो कम करती ही है, साथ ही, यह हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को भी कम करने में कारगर हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर की वजह से स्ट्रोक का भी खतरा रहता है, जो जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए आम की गुठली दिल को हेल्दी बनाए रखने में मददगार होती है।

6. एक्ने दूर होता है
एक्ने की वजह से चेहरे पर दाग-धब्बे और निशान हो सकते हैं। आम की गुठली एक्ने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकती है। इसके पाउडर में टमाटर का रस मिलाएं और स्क्रब करें। इससे डेड स्किन सेल्स हटेंगे और त्वचा निखरी हुई नजर आएगी।

7. स्किन ड्राई नहीं होती
आम की गुठली से बना तेल स्किन को मॉइस्चराइज करता है, जिससे त्वचा रूखी और खिंची-खिंची नजर नहीं आती। यह स्किन को बहुत ऑयली भी नहीं बनाता, जो इसकी खास बात है।

8. होंठ मुलायम होते हैं
आम की गुठली होठों की ड्राईनेस दूर करने में भी मदद करते हैं। इससे बने बटर को लिप बाम के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे होंठ मॉइस्चराइज होते हैं और फटते नहीं है। साथ ही, यह प्राकृतिक होता है, जिससे नुकसान का खतरा भी कम होता है।

9. बालों हेल्दी बनते हैं
आम की गुठली न केवल डैंड्रफ कम करने में मददगार है बल्कि, यह बालों को मजबूती और पोषण भी देता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड्स बालों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इससे बाल मजबूत बनते हैं और उनका टूटना व झड़ना कम होता है।

10. B12 की कमी नही होगी
आम की गुठली को तोड़कर उसमें निकली गिरी को टुकड़े करके नमक में सेक ले 100 ग्राम लेने से साल भर B12 की कमी नही होगी।

ऐसे करें आम की गुठली का सेवन
बता दें कि आम की गुठली में औषधिक गुण होते हैं। इसका सेवन कैसे किया जा सकता है यदि इसके बारे में आपको बताएं तो आम की गुठली को निकालकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कट कर लें, फिर दो दिनों के लिए धूप में सुखा दे और रोजाना इसका सेवन करें, कमाल के फायदे मिलेंगे। कुछ लोग इसका सेवन चूर्ण बनाकर भी करते हैं……
Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar 9897902760

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वलसाड

गुजरात के वलसाड सीमा के पास महाराष्ट्र के चारोटी फ्लाईओवर पर 600 किलो चांदी की ईंटों से भरी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई….

17 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की चांदी की ईंटें नेशनल हाईवे पर बिखर गईं…

पुलिस ने पूरा माल कब्जे में ले लिया है….

🇮🇳

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वलसाड

गुजरात के वलसाड सीमा के पास महाराष्ट्र के चारोटी फ्लाईओवर पर 600 किलो चांदी की ईंटों से भरी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई….

17 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की चांदी की ईंटें नेशनल हाईवे पर बिखर गईं…

पुलिस ने पूरा माल कब्जे में ले लिया है….

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17 मई महत्त्वपूर्ण घटनाएँ –

1769 – ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए।
1865 – विश्व संचार दिवस मनाने की शुरुआत हुई।
1933 – क्रांतिकारी महावीर सिंह बलिदान दिवस l
1970 – थोर हेयरडाल ने मोरक्को से यात्रा की शुरुआत की और अटलांटिक महासागर को 57 दिनों में पार कर लिया।
1975 – जापानी महिला श्रीमती जुनको तैबेई माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम महिला बनी।
1987 – सुनील गावस्कर ने 1987 में टेस्ट क्रिकेट से सन्न्यास लिया।
2000 – रूसी संसद के ऊपरी सदन फ़ेडरलिस्ट्स ने परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि की मंजूरी प्रदान की।
2010 – भारतीय बॉक्सरों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह स्वर्ण पदक जीत लिए।
2010 – देश के सबसे पुराने पारंपरिक खेल कबड्डी को बढावा देते हुए पंजाब सरकार ने कबड्डी विश्वकप का आयोजन करने की घोषणा की।

जन्मदिवस

1749 – प्रसिद्ध कार्यचिकित्सक तथा ‘चेचक’ के टीके के आविष्कारक एडवर्ड जेनर का जन्म हुआ।
1865 – इतिहासकार गोविंद सखाराव सरदेसाई का जन्म हुआ।
1938 – संघ वृक्ष के परिपक्व फल मधुभाई कुलकर्णी का जन्म हुआ।

पुण्यतिथि

1893 – राम चरित मानस के अंग्रेजी अनुवादक एफ.एस.ग्राउस का निधन हुआ।
1972 – शिल्पकार रघुनाथ कृष्ण फड़के का निधन हुआ।
2014- भारत के प्रसिद्ध होटल उद्योगपति तथा ‘होटल लीला समूह’ के संस्थापक सी.पी.कृष्णन नायर का निधन हुआ।

महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव –

विश्व दूरसंचार दिवस

बिरादरी के अनेक लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि जागरूकता, प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति और सामाजिक चेतना को मजबूत करने के बजाय कई स्तरों पर उसे कमजोर करने का वातावरण तैयार किया जा रहा है।जब भी किसी वंचित, संसाधन-विहीन या सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के साथ कोई हिंसात्मक या आपराधिक घटना घटित होती है, तब न्याय की दिशा में निष्पक्ष कार्यवाही होने के बजाय उसे “एडजस्ट” करने, दबाने या मोड़ने की प्रवृत्तियाँ सक्रिय होती दिखाई देती हैं।

अक्सर देखा जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति, संगठन या सामाजिक नेतृत्व पीड़ित पक्ष के समर्थन में आवाज उठाता है, तो अपराध और न्याय के मूल प्रश्नों पर चर्चा करने के बजाय उसकी किसी शाब्दिक त्रुटि, भावनात्मक प्रतिक्रिया या पुराने वक्तव्यों को आधार बनाकर उसे ही कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जाता है।
कई बार पूरी जाति, समुदाय या समूह की भावनाओं को इस प्रकार उभारा जाता है कि वास्तविक मुद्दा पीछे छूट जाए और न्याय की मांग करने वाला व्यक्ति या समूह अकेला पड़ जाए।

यह भावना लगातार मजबूत हो रही है कि समाज के साथ धोखाधड़ी, भ्रम और विश्वासघात आधारित राजनीति की जा रही है।
सामाजिक मनोबल को तोड़ने, जागरूकता को कुचलने, प्रश्न पूछने वालों को हतोत्साहित करने और संगठित आवाज़ों को विभाजित करने के लिए प्रत्यक्ष और परोक्ष स्तर पर सामूहिक रणनीतियाँ काम करती दिखाई देती हैं।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि प्रभावशाली तंत्रों, संसाधन-संपन्न समूहों और सत्ता-समर्थित नेटवर्कों का अप्रत्यक्ष संरक्षण ऐसे वातावरण को और मजबूत करता है।

जब न्याय की आवाज़ उठती है, तब कई बार अपराध और अन्याय पर चर्चा करने के बजाय जातीय ध्रुवीकरण का खेल शुरू हो जाता है।
एक शब्द, एक प्रतिक्रिया या एक भावनात्मक वक्तव्य को आधार बनाकर पूरी बहस को मोड़ दिया जाता है, ताकि अपराध और उसके पीछे की संरचनात्मक समस्याएँ चर्चा से बाहर हो जाएँ।
इस प्रक्रिया में पीड़ित पक्ष की आवाज़ को दबाने, उसे मानसिक रूप से तोड़ने, सामाजिक रूप से अलग करने और यह एहसास कराने का प्रयास किया जाता है कि “तुम अकेले हो।”

यह भी देखा जा रहा है कि कई बार पीड़ित पक्ष के भीतर से ही महिलाओं, बुजुर्गों, पारिवारिक संबंधों, सामाजिक संगठनों या भावनात्मक रिश्तों को माध्यम बनाकर दबाव बनाया जाता है, ताकि न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोग टूट जाएँ, समझौता कर लें या पीछे हट जाएँ।
कभी “परिवार”, कभी “समाज की इज्जत”, कभी “महिलाओं का सम्मान”, कभी “समझौते”, कभी “सहायता”, कभी “भाग्य” और कभी “धर्म” के नाम पर भावनात्मक दबाव तैयार किया जाता है।
इस प्रकार पीड़ित वर्ग की नेतृत्वकारी शक्तियों का एक हिस्सा और प्रभावशाली वर्चस्ववादी नेतृत्व — दोनों प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसी व्यवस्था को मजबूत करते दिखाई देते हैं, जो अन्याय और भय के वातावरण को बनाए रखती है।

कई लोगों का मानना है कि जब कोई उभरता हुआ नेतृत्व अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है, तब उसे बदनाम करने, अलग-थलग करने, मानसिक रूप से तोड़ने, कानूनी उलझनों में फँसाने, सामाजिक रूप से अपमानित करने और उसके समर्थन आधार को कमजोर करने के प्रयास तेज हो जाते हैं।
उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को रोकना नहीं होता, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देना होता है कि “जो आवाज उठाएगा, उसका भी यही हाल होगा।”

किसी भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना अपराध नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
चाहे वह आवाज जातीय उत्पीड़न के विरुद्ध उठे, सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उठे, या व्यवस्था की विफलताओं के विरुद्ध — उसे दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए।

आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज भावनात्मक उकसावों, जातीय ध्रुवीकरण और आपसी अविश्वास की राजनीति से ऊपर उठकर वास्तविक मुद्दों पर विचार करे —
शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, न्याय तक समान पहुंच, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक अवसर और सम्मानजनक भागीदारी जैसे प्रश्नों पर गंभीर राष्ट्रीय विमर्श हो।

कई समाज और वर्ग आज भी आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
उनके युवाओं में बेरोजगारी, पलायन, नशे, निराशा और असुरक्षा की समस्याएँ बढ़ रही हैं।
ऐसे में आवश्यकता जातीय टकराव बढ़ाने की नहीं, बल्कि समाज के भीतर जागरूकता, संगठन, वैचारिकी स्पष्टता, संवैधानिक समझ और समाधानात्मक नेतृत्व विकसित करने की है।

समाज को केवल वोट बैंक या भीड़ बनाकर रखने वाली राजनीति नहीं, बल्कि उसे नेतृत्वकर्ता, नीति-निर्माता, शिक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानित नागरिक बनाने वाली सोच की आवश्यकता है।

समय की मांग है कि सभी समाजों के बुद्धिजीवी, जागरूक नागरिक और जिम्मेदार नेतृत्व मिलकर ऐसी सोच विकसित करें जो भय, भ्रम, विभाजन और शोषण से ऊपर उठकर न्याय, पारदर्शिता, संवैधानिक समानता, सामाजिक समन्वय और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।

✍️AKS

एसडीएम बागपत ज्योति शर्मा एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सरूचि शर्मा के नेतृत्व में एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन

नितिन कुमार सिंह, बागपत, दिनांक 15 मई 2026—


जनपद बागपत के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठाकुरद्वारा में एसडीएम बागपत ज्योति शर्मा एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सरूचि शर्मा के नेतृत्व में एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन किया गया।
कैंप के दौरान कुल 53 बच्चियों का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपस्थित अभिभावकों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व, सर्वाइकल कैंसर से बचाव एवं नियमित टीकाकरण के प्रति जागरूक किया गया तथा अधिक से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कराने हेतु प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि एचपीवी वैक्सीनेशन बालिकाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य विभाग जनपद में निरंतर जागरूकता अभियान चलाकर पात्र बालिकाओं तक टीकाकरण सुविधा पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
कैंप के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएससी अधीक्षक बागपत डॉक्टर विभास राजपूत एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

बागपत, दिनांक 15 मई 2026—जनपद बागपत के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठाकुरद्वारा में आज एसडीएम बागपत ज्योति शर्मा एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सरूचि शर्मा के नेतृत्व में एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन किया गया।कैंप के दौरान कुल 53 बच्चियों का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपस्थित अभिभावकों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व, सर्वाइकल कैंसर से बचाव एवं नियमित टीकाकरण के प्रति जागरूक किया गया तथा अधिक से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कराने हेतु प्रेरित किया गया।अधिकारियों ने कहा कि एचपीवी वैक्सीनेशन बालिकाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य विभाग जनपद में निरंतर जागरूकता अभियान चलाकर पात्र बालिकाओं तक टीकाकरण सुविधा पहुंचाने का कार्य कर रहा है।कैंप के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएससी अधीक्षक बैग पर डॉक्टर विभास राजपूत उपस्थित रहे एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

बागपत, दिनांक 15 मई 2026—
जनपद बागपत के नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ठाकुरद्वारा में आज एसडीएम बागपत ज्योति शर्मा एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सरूचि शर्मा के नेतृत्व में एचपीवी (HPV) वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन किया गया।
कैंप के दौरान कुल 53 बच्चियों का सफलतापूर्वक एचपीवी टीकाकरण किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपस्थित अभिभावकों को एचपीवी वैक्सीन के महत्व, सर्वाइकल कैंसर से बचाव एवं नियमित टीकाकरण के प्रति जागरूक किया गया तथा अधिक से अधिक बालिकाओं का टीकाकरण कराने हेतु प्रेरित किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि एचपीवी वैक्सीनेशन बालिकाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्वास्थ्य विभाग जनपद में निरंतर जागरूकता अभियान चलाकर पात्र बालिकाओं तक टीकाकरण सुविधा पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
कैंप के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएससी अधीक्षक बैग पर डॉक्टर विभास राजपूत उपस्थित रहे एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

अब इलाज के लिए बेबस नहीं होंगे गरीब मां-बाप, नवजात बेटियों के लिए सहारा बनेगी ‘नन्ही कली पहल’

70 फीसदी तक इलाज में राहत, देसी ‘नन्ही कली डॉल’ से बेटियों के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश

अब बागपत में नवजात नन्ही कलियों के लिए उम्मीद, मुस्कान और सुरक्षा का नया अभियान होगा शुरू

बागपत, 15 मई 2026 — घर में नन्ही बच्ची का जन्म हो और कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत बिगड़ जाए… डॉक्टर तुरंत NICU में भर्ती करने की बात कहें… फिर इलाज का खर्च सुनकर परिवार के चेहरे उतर जाएं। ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवारों में यह दर्द आज भी आम है। कई परिवार समय पर इलाज शुरू नहीं करा पाते। कई बार पैसे, जानकारी और सही सुविधा की कमी नवजात बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।

बागपत में अब ऐसे ही परिवारों के लिए राहत और उम्मीद की नई शुरुआत होने जा रही है। जिला प्रशासन बागपत और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अभिनव तोमर की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों तथा नवजात बच्चों के लिए संयुक्त रूप से “नन्ही कली पहल” शुरू की जा रही है। यह पहल केवल स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, ग्रामीण परिवारों की चिंता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा अभियान है।

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटियों को स्वस्थ बनाओ” के संदेश के साथ शुरू हो रही इस पहल का शुभारंभ कल सुबह 9:45 बजे डॉ. नरेंद्र कुमार मूर्ति हॉस्पिटल, बड़ौत में होगा। इस अभियान के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और बीपीएल परिवारों की बेटियों तथा नवजात बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और इलाज में बड़ी आर्थिक राहत दी जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जो नवजात बच्चों के इलाज का खर्च सुनते ही घबरा जाते हैं। खासकर तब, जब बच्चे को जन्म के तुरंत बाद NICU या PICU जैसी गंभीर चिकित्सा सुविधा की जरूरत पड़ जाए। कई बार परिवार इलाज शुरू होने से पहले ही बड़े शहरों का रुख करने या अस्पताल पहुंचने में देरी कर देते हैं। ऐसे मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।

“नन्ही कली पहल” का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि आर्थिक कमजोरी किसी बच्चे के इलाज में बाधा न बने। इस पहल के तहत Dr. Narendra Kumar Murti Hospital और Aastha Hospital में जांच, भर्ती, इलाज और डॉक्टर परामर्श पर 70 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जाएगी। इसके साथ ही गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए PICU तथा नवजात बच्चों के लिए NICU उपचार में भी 70 फीसदी तक राहत मिलेगी। जन्म के शुरुआती कुछ घंटे और दिन बच्चों के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। समय पर इलाज और निगरानी मिलने से संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, कम वजन और अन्य गंभीर जटिलताओं से बच्चों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए यह पहल किसी बड़ी राहत से कम नहीं मानी जा रही।

अस्पताल में बनेगा ‘नन्ही कली सहायता काउंटर’

कई बार गरीब परिवार अस्पताल पहुंच तो जाते हैं, लेकिन प्रक्रिया, जांच और इलाज की जानकारी के अभाव में परेशान हो जाते हैं। इसे देखते हुए अस्पताल में विशेष रूप से “नन्ही कली सहायता काउंटर” बनाया जाएगा। यहां आने वाले परिवारों को योजना की जानकारी, उपचार प्रक्रिया और जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि जरूरतमंद परिवार इलाज और कागजी प्रक्रिया के बीच भटकने के बजाय आसानी से सहायता प्राप्त कर सकें। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर मदद दी जाएगी।

सिर्फ इलाज नहीं, बेटियों के सम्मान का भी संदेश

इस पहल की सबसे खास पहचान “नन्ही कली डॉल” भी होगी। इलाज पाने वाली हर बच्ची को बागपत की पहचान बन चुकी यह देसी गुड़िया मुफ्त दी जाएगी। लेकिन यह सिर्फ एक खिलौना नहीं होगी। यह बेटियों के सम्मान, प्यार और बराबरी का संदेश लेकर आएगी। आज भी समाज के कई हिस्सों में बेटियों को लेकर सोच पूरी तरह नहीं बदली है। ऐसे में प्रशासन इस पहल के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। “नन्ही कली” नाम भी बेटियों की मासूमियत, संभावनाओं और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर सामने आया है।

“नन्ही कली डॉल” अपने आप में एक अनोखी कहानी भी समेटे हुए है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के जीरो वेस्ट विजन के तहत तैयार की गई यह देसी रैग डॉल वेस्ट प्लास्टिक बोतलों से बने मुलायम रेशों से बनाई जा रही है। आमतौर पर गुड़ियों में रुई भरी जाती है, लेकिन इस गुड़िया में प्लास्टिक बोतलों को विशेष प्रक्रिया से फाइबर में बदलकर इस्तेमाल किया गया है। यानी जो प्लास्टिक कभी पर्यावरण के लिए खतरा माना जाता था, वही अब बच्चों की मुस्कान और सामाजिक संदेश का माध्यम बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी यह सोच जिले में काफी सराही जा रही है। इस पहल का एक और मजबूत पक्ष महिला सशक्तिकरण से जुड़ा है। जिले की ग्रामीण महिलाएं अपने हाथों से इन गुड़ियों को तैयार कर रही हैं। कपड़े के टुकड़ों, पुराने फैब्रिक और पुनर्चक्रित सामग्री का उपयोग कर वे “नन्ही कली” को आकार दे रही हैं। इससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिल रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह पहल “मिशन शक्ति” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों को भी मजबूती दे रही है।

दादी-नानी के दौर की देसी गुड़िया फिर लौटी

एक समय गांवों में कपड़े से बनी देसी गुड़िया बच्चों के बचपन का अहम हिस्सा हुआ करती थी। दादी-नानी अपने हाथों से गुड़िया बनाकर बच्चों को देती थीं। धीरे-धीरे बाजार में मशीनों से बने खिलौनों का चलन बढ़ा और यह परंपरा पीछे छूटती चली गई। “नन्ही कली” उसी पुराने अपनापन और देसी संस्कृति को फिर से जीवित करने का प्रयास भी मानी जा रही है। यह बच्चों को अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और स्थानीय पहचान से जोड़ने का माध्यम बन रही है। हाल ही में विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम की मौजूदगी में “नन्ही कली डॉल” का भव्य शुभारंभ किया गया था। मैरी कॉम का संघर्ष और सफलता खुद लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है। उनकी मौजूदगी ने इस पहल को नई पहचान देने का काम किया।

ग्रामीण परिवारों के लिए उम्मीद की पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच एक बड़ी चुनौती है। कई परिवारों को अच्छे अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और नवजात उपचार सुविधाएं आसानी से नहीं मिल पातीं। आर्थिक कमजोरी और जागरूकता की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है। ऐसे में “नन्ही कली पहल” केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद बनकर सामने आ रही है जो अब तक इलाज और खर्च के बीच फंसे रहते थे।

जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को मजबूत करना भी है। प्रशासन और चिकित्सकों का मानना है कि स्वस्थ बेटी ही सुरक्षित और मजबूत समाज की नींव होती है। भविष्य में भी इसी प्रकार जरूरतमंद परिवारों के लिए जनहित और स्वास्थ्य से जुड़ी पहलें आगे बढ़ाई जाएंगी। “नन्ही कली पहल” जिले में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा देगी।

सूचना विभाग बागपत

जनगणना 2027, फैमिली आईडी और विकास परियोजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : डीएम

मिशन मोड में काम करने के निर्देश, हर विभाग की जवाबदेही तय; विभागों को समन्वय से कार्य करने पर जोर

जिलाधिकारी ने 50 लाख से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा कर दिए सख्त निर्देश

बागपत, 15 मई 2026 — जनपद में जनगणना 2027, फैमिली आईडी अभियान और शासन की प्राथमिकताओं वाली विकास परियोजनाओं को लेकर आज कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि जनगणना, फैमिली आईडी और विकास कार्यों जैसे संवेदनशील विषयों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, ढिलाई या आंकड़ों में त्रुटि स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य तय समयसीमा, गुणवत्ता और पूर्ण जवाबदेही के साथ पूरा किया जाए।

बैठक में जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकान गणना के तहत स्वगणना अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि यह आने वाले वर्षों में जिले और प्रदेश की विकास योजनाओं की बुनियाद है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आवास, पेयजल, सामाजिक सुरक्षा, खाद्यान्न वितरण और रोजगार योजनाओं का आधार जनगणना के आंकड़े ही बनते हैं। ऐसे में यदि आंकड़ों में त्रुटि होगी तो उसका सीधा असर योजनाओं की गुणवत्ता और लाभार्थियों तक पहुंच पर पड़ेगा।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनगणना कार्य में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी इसे “रूटीन ड्यूटी” न समझें। उन्होंने कहा कि हर कार्मिक की जिम्मेदारी तय की जाएगी और फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी सरकारी कर्मचारी पहले स्वयं स्वगणना करें और उसके बाद आमजन को इसके लिए प्रेरित करें। जब सरकारी तंत्र स्वयं आगे आएगा तभी समाज में भरोसा और सहभागिता दोनों बढ़ेंगे। बैठक में डिजिटल स्वगणना को गति देने के लिए विभागवार रणनीति पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि आज प्रशासनिक व्यवस्था तेजी से डेटा आधारित हो रही है। ऐसे में सटीक और अपडेटेड जानकारी ही भविष्य की योजनाओं का आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य जमीनी स्तर पर सटीक आंकड़ों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था से हासिल होगा। वहीं सूचना विभाग द्वारा जिलेभर के मीडिया प्रतिनिधियों से भी स्वगणना करने और लोगों को जागरूक करने की अपील की गई।

फैमिली आईडी अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि “एक परिवार-एक पहचान” की व्यवस्था भविष्य में सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि कई बार अलग-अलग विभागों में लाभार्थियों का डेटा अलग होने के कारण पात्र लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन फैमिली आईडी से योजनाओं का लाभ पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से वास्तविक पात्रों तक पहुंच सकेगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि फैमिली आईडी को जनसुविधा अभियान के रूप में संचालित किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों को सरल भाषा में समझाया जाए कि फैमिली आईडी भविष्य में विभिन्न योजनाओं, छात्रवृत्ति, राशन, सामाजिक पेंशन, स्वास्थ्य और अन्य सरकारी सेवाओं से जुड़ने में किस प्रकार मददगार होगी।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि जिले के सभी विकास खंड कार्यालयों, तहसीलों, नगर निकायों और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में फैमिली आईडी हेल्पडेस्क तत्काल स्थापित किए जाएं। इन हेल्पडेस्क पर आने वाले नागरिकों की मौके पर ही फैमिली आईडी बनाने, जानकारी अपडेट करने और दस्तावेज सत्यापन की सुविधा सुनिश्चित की जाए। सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं और यदि हर कार्यालय सक्रिय रूप से इस अभियान से जुड़ जाए तो अभियान में निश्चित रूप से तेजी आएगी। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए और कहा कि कोई भी पात्र परिवार जानकारी के अभाव या तकनीकी कठिनाई के कारण योजना से वंचित नहीं रहना चाहिए।

बैठक में शासन की प्राथमिकताओं में शामिल 50 लाख रुपये से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं की भी गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन परियोजनाओं की विभागवार प्रगति रिपोर्ट लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं समय पर पूरी होना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने परियोजना स्थलों पर अनिवार्य रूप से परियोजना का बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड पर परियोजना की लागत, कार्यदायी संस्था, निर्माण अवधि, स्वीकृत धनराशि और संबंधित अधिकारी की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को भी विकास कार्यों की जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं की निगरानी हेतु संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करें और कार्य की गुणवत्ता की जांच स्वयं करें। जिलाधिकारी ने कहा कि गुणवत्ता से समझौता करने वालों की जवाबदेही तय की जाएगी।

जिलाधिकारी ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाएं विभागीय समन्वय की कमी के कारण प्रभावित होती हैं। भूमि, विद्युत, तकनीकी स्वीकृति या बजट संबंधी समस्याओं को समय रहते हल किया जाए, ताकि परियोजनाएं लंबित न रहें। उन्होंने सभी विभागों को नियमित समीक्षा और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि सभी परियोजनाओं और अभियानों से संबंधित जानकारी पोर्टल पर समय से अपडेट की जाए। गलत या अपूर्ण जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। डीएम ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए सटीक डेटा सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना, फैमिली आईडी और विकास परियोजनाएं जनता के भविष्य से जुड़े अभियान हैं। यदि इन कार्यों को गंभीरता और सेवा भाव से पूरा किया गया तो जिले में योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंच सकेगा।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर विभाग अपने दायित्वों को गंभीरता से निभाए और यह सुनिश्चित करे कि जनहित से जुड़े अभियान समयबद्ध, पारदर्शी और परिणामपरक तरीके से पूरे हों। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण में आप भी बने भागीदार

सेवा में
संपादक /जिला प्रभारी / संवाददाता /प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया छायाकार जनपद बागपत

विषय :जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण में आप भी बने भागीदार

उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत स्व-गणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक जनपद में संचालित है । आप सभी पत्रकार साथियों से अनुरोध है कि स्वगणना करके देश हित मे योगदान दें 2027 की जनगणना देश के विकास के बदलाव नीतियों में लायेगी नए बदलाव ।
Self Enumeration(स्व गणना) करने का तरीका

Census

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https://se.census.gov.in

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