राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत जनपद की पांडुलिपियों की पहचान के संबंध में जानकारी कराये उपलब्ध

बागपत 12 मई2026 —–
जनपद में “राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण, संरक्षण एवं डिजिटलीकरण हेतु आधार तैयार करना है।
इसी क्रम में आज कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह द्वारा संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के ग्राम स्तर, ब्लॉक स्तर एवं नगर निकाय क्षेत्रों में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना अभियान मोड में एकत्रित की जाए।
उन्होंने कहा कि मंदिर, आश्रम, मदरसा, गुरुकुल, पुस्तकालय, निजी संग्रह एवं अन्य सांस्कृतिक स्थलों पर उपलब्ध संस्कृत, हिंदी, फारसी, अरबी, उर्दू तथा अन्य भाषाओं की पांडुलिपियों को चिन्हित किया जाए, जिससे जनपद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।
बैठक में बताया गया कि पांडुलिपि का अर्थ हाथ से लिखी गई मूल प्रति अथवा ग्रंथ से है। यह मुद्रित या टाइप की हुई सामग्री नहीं होती, बल्कि कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र अथवा कपड़े पर हस्तलिखित रूप में तैयार की गई रचना होती है। प्राचीन काल में ज्ञान, साहित्य, धर्म, इतिहास एवं विज्ञान के संरक्षण के लिए इनका व्यापक उपयोग किया जाता था।
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के अनुसार कम से कम 75 वर्ष पुरानी तथा ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक अथवा वैज्ञानिक महत्व रखने वाली हस्तलिखित सामग्री को पांडुलिपि की श्रेणी में रखा जाता है। वेद, पुराण, महाभारत, धार्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक अभिलेख एवं अन्य हस्तलिखित दस्तावेज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वेक्षण कार्य मिशन मोड में संचालित किया जाए तथा अधिक से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी संकलित कर मुख्य विकास का आधिकारिक कार्यालय में उपलब्ध कराये । मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित खंड विकास अधिकारी अधिशासी अधिकारी जिला विद्यालय निरीक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित अन्य विभागों को निर्देशित किया कि पांडुलिपि संबंधित कार्य को गंभीरता से लेते हुए मिशन मोड में कार्य करें इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी द्वारा आमजन से अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति अथवा संस्था के पास प्राचीन पांडुलिपियां उपलब्ध हों तो उनकी सूचना मोबाइल नंबर 9410400995 पर उपलब्ध कराएं, जिससे जनपद की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण एवं डिजिटलीकरण सुनिश्चित किया जा सके।

इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी राहुल वर्मा संबंधित खंड विकास अधिकारी समस्त अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित विभागों के आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

भारत के तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए, लेकिन आक्रांताओं के खानदान का अता-पता नहीं

श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी

माननीय मुख्यमंत्री जी ने लाल चंदन का पौधा रोपित कर पौधारोपण का दिया संदेश

आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण कर दुनिया को दिखाई थी भारत की शक्ति: माननीय मुख्यमंत्री जी

बागपत, 11 मई2026—
जनपद बागपत के तहसील बड़ौत अंतर्गत ग्राम मोजीजाबाद नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए।

नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने नवनाथ स्वरूप दर्शन एवं नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित आठवां भंडारा कार्यक्रम में सहभाग किया। उन्होंने श्री नवनाथ स्वरूप दर्शन में श्री अचलअचम्बेनाथ जी, श्री गंजकन्थडनाथ जी, श्री चौरंगी नाथ जी, श्रीमत्स्येन्द्रनाथ जी, श्री गुरु गोरक्षनाथ जी, श्री आदिनाथ जी, श्री उदयनाथ जी, श्री सत्यनाथ जी एवं श्री संतोषनाथ जी की मूर्तियों में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर उनका अनावरण किया। इसके उपरांत उन्होंने संत छोटे लाल एवं लछीनाथ जी की समाधि स्थलों पर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री जी ने यज्ञशाला में पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य यज्ञ में पूर्णाहुति दी तथा मंदिर परिसर में लाल चंदन का पौधा रोपित कर वृक्षारोपण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री जी ने वर्ष 2023 में लगाए गए रुद्राक्ष के पौधे का भी अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ जी सत्संग भवन पहुंचे और संत-महात्माओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परंपरा, संत संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन की ताकत का अहसास कराने बागपत आया हूं। इतिहास गवाह है कि सनातन धर्म ने कभी किसी पर जबरन आधिपत्य स्थापित नहीं किया। किसी को गुलाम नहीं बनाया। जब हम किसी पर जबरन शासन या भूमि पर कब्जा नहीं करते तो हमारा देश इसे कैसे स्वीकार कर सकता था। भारत लगातार विदेशी आक्रांताओं से जूझता रहा, सम-विषम परिस्थितियों में लड़ता रहा। जिन आक्रांताओं ने भारत के सनातन की आस्था के प्रतीक मठ-मंदिरों, तीर्थस्थलों को विखंडित करने का प्रयास किया, वे तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए, लेकिन आक्रांताओं का नामो-निशान नहीं बचा। वे सब मिट्टी में मिल गए। उनके खानदान तक का भी अता-पता नहीं है।

देश व धर्म को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहिए
सीएम योगी ने कहा कि धर्मो रक्षति रक्षितः, यानी आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आपकी रक्षा करेगा। स्वार्थ के लिए धर्म का दुरुपयोग करेंगे तो उससे नष्ट हुआ धर्म हमें भी नष्ट कर डालेगा। हमें जाने-अनजाने देश व धर्म को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहिए। व्यक्तिगत क्षति की भरपाई हो सकती है, लेकिन धर्म की क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। उसका खामियाजा वर्तमान और भावी पीढ़ी भी भुगतेगी।

शक्ति हमारे सामर्थ्य की प्रतीक, यह विश्व कल्याण के लिए महत्वपूर्ण
सीएम योगी ने कहा कि आज 1000 वर्ष की दासता से मुक्ति के लिए सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा का अमृत पर्व भी है। 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। 1951 में आज ही के दिन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के करकमलों से पुनर्प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आज सोमनाथ मंदिर में उपस्थित रहे। मुझे भी काशी विश्वनाथ महादेव के चरणों में इस आयोजन से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। आज ही के दिन अटल जी ने ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में तीन परमाणु विस्फोट किए थे। यह बताता है कि हमारी शक्ति हमारे सामर्थ्य की प्रतीक तो है ही, विश्व कल्याण के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

महाभारत कालीन है बागपत का इतिहास
सीएम योगी ने कहा कि बागपत का इतिहास महाभारत कालीन है। भगवान कृष्ण ने पांडवों के लिए कौरवों से जो पांच गांव मांगे थे, उनमें एक बागपत भी था। चार वर्ष पहले आया था तो यह बहुत छोटा सा स्थान था, लेकिन अर्जुन नाथ जी व उनके सहयोगी ग्रामीणों व श्रद्धालुओं ने इसे तीर्थ बना दिया है। विरासत की रक्षा ऐसे ही होती है। बागपत की इसी धरा ने किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को जन्म दिया था। यहां के डॉ. सत्यपाल सिंह ने मुंबई पुलिस के मुखिया के रूप में कानून का शासन स्थापित किया। चौधरी जयंत सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकदल केंद्र व राज्य सरकार के साथ मिलकर बागपत समेत प्रदेश व देश के विकास के लिए नित नए कीर्तिमान स्थापित करने में सहायक हो रहा है।

आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा
सीएम ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है। हम अतीत से जुड़कर ही उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकते हैं। हम काशी विश्वनाथ मंदिर का अपमान विस्मृत नहीं कर सकते। हम अयोध्या के लिए निरंतर लड़ते रहे और डबल इंजन सरकार आई तो राम मंदिर का निर्माण हुआ। पूर्वजों ने हमें राम-राम का संबोधन दिया, क्योंकि जब भी अभिवादन करेंगे तो प्रभु का स्मरण करेंगे। राम मंदिर का निर्माण उन पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता है। सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में रामजन्मभूमि, महाकाल में महालोक, केदारपुरी, विंध्यवासिनी धाम का पुनरुद्धार कार्य हुआ। प्रयास यही रहे कि हमारे घर ही नहीं, बल्कि तीर्थस्थल, देवी-देवताओं के स्थल भी सुरक्षित हों।

धर्म की अलख जगाई महायोगी गुरु गोरखनाथ ने
सीएम ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ भगवान शिव के योगी रूप हैं। योगी रूप में उन्होंने धर्म की अलख जगाने के लिए जनजागरण के विशाल कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उनके सिद्धों, योगियों ने गुलामी कालखंड में भी जन-जागरण के अभियान को निरंतरता प्रदान की। वे योगी गांव-गांव जाकर सारंगीवादन व भजन के माध्यम से समाज को एकजुट कर विदेशी आक्रांताओं का मुकाबला करने के लिए तैयार करते थे, यही उनकी राष्ट्रभक्ति थी। उनके भजनों में संदेश भी होता था कि आक्रांता आ रहा है, तैयार हो जाओ। इससे पहले कि वह आपके गांव व घर तक पहुंचे, उसका काम तमाम कर डालो। योगी सिर्फ गुफाओं, धूनी, मंदिरों तक सीमित नहीं रहे। धर्म व संस्कृति पर हमला होगा तो योगी बैठेगा नहीं, बल्कि मुकाबला कर मुंहतोड़ जवाब देगा। जो संकट के समय निडरता से खड़ा हो, वही संत है। संकट में पलायन करने वाला संत नहीं हो सकता।

इस दौरान प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री जनपद प्रभारी मंत्री जसवंत सिंह सैनी, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री केपी मलिक, सांसद राजकुमार सांगवान, तिजारा राजस्थान के विधायक बाबा बालकनाथ, विधायक अजय कुमार, योगेश धामा, महंत अर्जुननाथ, महंत चेताईनाथ, पीर लहरनाथ, पीर महंत हरिनाथ, समुद्रनाथ, शेरनाथ, जिताई नाथ, पीर राजनाथ जी महाराज, हरिनाथ जी महाराज, श्रीकृष्ण नाथ, महंत मिथिलेश नाथ, पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह ,भाजपा जिला अध्यक्ष नीरज शर्मा मेरठ मंडल मेरठ आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी, जिलाधिकारी अस्मिता लाल, पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय आदि मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

ब्रेकिंग न्यूज़गोला गोकर्णनाथInd24 tv चैनल📡📡📡📡📡

बांकेगंज/प्रतापपुर में हो रहा खुलेआम अवैध खनन

नवागत डीएम की छवि को धूप में कर रहे खनन माफिया

सरकार के दावे खोखले नजर आ रहे हैं एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे करें कि खनन माफियाओं को मिट्टी में मिलने का काम कर रही है लेकिन यहां तो खनन माफिया सरकारी विद्यालय को ही मिट्टी में मिलाने का काम कर रहे हैं आप देख रहे हैं किस तरह प्राथमिक विद्यालय प्रतापपुर ग्रांट नंबर 11 के सटीक विद्यालय की एक फीट की दूरी पर ओवरलोड मिट्टी भरे डंपर किस तरह दौड़ते नजर आ रहे हैं सूत्रों की माने तो खनन अधिकारी राजस्व विभाग की मिली भगत से होता है मिट्टी का अवैध खनन क्या अधिकारियों के ऊपर हो गए खनन माफिया क्यों नक मस्तक हो रहे हैं खनन माफियाओं के आगे खनन अधिकारी और राजस्व विभाग की टीम…???

यह एक गंभीर और चिंताजनक खबर है। उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में खनन माफिया सरकारी जमीनों, स्कूलों के आसपास, और ग्रामीण रास्तों से अवैध रूप से मिट्टी और खनिजों की खुदाई कर रहे हैं।

प्रतापपुर प्राथमिक विद्यालय वही ग्रामीण और स्कूल मार्ग का इस्तेमाल: खनन माफिया जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल करके सरकारी रास्तों और स्कूलों के पास से मिट्टी ले जा रहे हैं।सुरक्षा के लिए खतरा: इन अवैध गतिविधियों के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है, साथ ही प्रधानमंत्री सड़क जैसी बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुँच रहा है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के कुशल नेतृत्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सफल संचालन में आज भगवानपुर नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में आयोजित नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं आठम भंडारा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री जी ने पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थात्मक इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।श्रद्धालुओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के कुशल नेतृत्व एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के सफल संचालन में आज भगवानपुर नांगल स्थित श्री शिव गोरखनाथ आश्रम खोखरा में आयोजित नवनाथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं आठम भंडारा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री जी ने पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने हेतु प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थात्मक इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार एवं चुनाव आयोग की धांधली को लेकर अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं लिया तो वह ICJ अर्थात International Court of Justice यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत तक जाने की नौबत आई तो वहां भी जाएंगी । Viral

इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं, ‘ सत्य ‘ चैनल के मालिक आशुतोष का कहना है कि ममता बनर्जी को देश के अंदर के मसले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि इससे देश की छवि खराब होगी ।

आशुतोष जी मेरे अच्छे मित्र रहे हैं, जब उनको आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का अध्यक्ष बनाया तो अरविंद केजरीवाल जी ने उनसे कहा कि अवस्थी जी के साथ बैठकर संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करें । तब आशुतोष जी के नोएडा स्थित अपार्टमेंट के स्टडी रूम में हम दोनों ने लगभग 3 घंटे में संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार की थी ।

लेकिन आज मुझे आशुतोष जी के बयान को लेकर आश्चर्य हुआ । दो दिनों से सम्पूर्ण विदेशी खासकर अमेरिकी मीडिया में बंगाल के चुनाव में 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने खासकर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, एक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र जैसे विख्यात लोगों के नाम काटने को लेकर भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बारे में खबरें छप रही हैं। ऐसे में अगर इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने में क्या दिक्कत है ?

जब हमारा सुप्रीम कोर्ट 27 लाख लोगों के नाम मृत्यु होने के कारण काटने के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए और अपने जीवित होने के प्रमाण दिखाए तो माननीय जस्टिस महोदय ने जो जवाब दिया वह घोर निंदनीय है । मुख्य न्यायाधीश तक ने कहा कि कोई बात नहीं, ” अगली बार चुनाव में आपका नाम आ जाएगा ” ।

ऐसे न्यायाधीशों के खिलाफ और कहां आवाज उठाई जा सकती है ? महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी ने तो जब से पद ग्रहण किया है, मौन व्रत धारण किया हुआ है । जब देश का प्रथम नागरिक तक मूक दर्शक बन जाए खासकर तब जब देश की अंतरराष्ट्रीय पहलवान बेटियों को जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस के Male सिपाहियों, इंस्पेक्टर आदि ने उनके शारीरिक अंगों पर हाथ रखकर सड़क पर घसीटा, मारा , महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी के मुंह में लगा ताला बंद का बंद ही रहा ।

ऐसी स्थिति में मेरा मानना है कि न केवल ICJ बल्कि UNO तक में लगातार गत एक दशक से केंद्र सरकार की goon गिरी अर्थात निरंकुशता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ही इन दोनों संस्थाओं को गठित किया गया है ।

ढाई लाख केंद्रीय बलों एवं बंगाल राज्य की पुलिस, केंद्र की सारी खुफिया एजेंसी की उपस्थिति के बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार शुभेंदु अधिकारी के PA की तथा दो TMC के कार्यकर्ताओं की 24 घंटे में हत्या हो जाती है, शुभेंदु के PA की हत्या के लिए भाजपा ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को फंसाने के कुचक्र रच रही है । साथ ही शुभेंदु अधिकारी & उसके लोग यह भी कह रहे हैं कि उसके PA को मारने वाले बांग्लादेश से आए शूटर थे ।

अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल में लगभग एक महीने से डेरा डाले रहने के बावजूद अगर बंगला देश के शूटर बंगाल में आए तो मोदी जी ने अभी तक गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त कर उनके खिलाफ जांच क्यों नहीं बिठाई ?

हरीश अवस्थी ।

ममता बनर्जी ने कहा है कि मोदी सरकार एवं चुनाव आयोग की धांधली को लेकर अगर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला नहीं लिया तो वह ICJ अर्थात International Court of Justice यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत तक जाने की नौबत आई तो वहां भी जाएंगी । Viral

इस बात को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं, ‘ सत्य ‘ चैनल के मालिक आशुतोष का कहना है कि ममता बनर्जी को देश के अंदर के मसले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में नहीं ले जाना चाहिए क्योंकि इससे देश की छवि खराब होगी ।

आशुतोष जी मेरे अच्छे मित्र रहे हैं, जब उनको आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का अध्यक्ष बनाया तो अरविंद केजरीवाल जी ने उनसे कहा कि अवस्थी जी के साथ बैठकर संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करें । तब आशुतोष जी के नोएडा स्थित अपार्टमेंट के स्टडी रूम में हम दोनों ने लगभग 3 घंटे में संगठन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार की थी ।

लेकिन आज मुझे आशुतोष जी के बयान को लेकर आश्चर्य हुआ । दो दिनों से सम्पूर्ण विदेशी खासकर अमेरिकी मीडिया में बंगाल के चुनाव में 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने खासकर नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, एक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र जैसे विख्यात लोगों के नाम काटने को लेकर भारत के चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बारे में खबरें छप रही हैं। ऐसे में अगर इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने में क्या दिक्कत है ?

जब हमारा सुप्रीम कोर्ट 27 लाख लोगों के नाम मृत्यु होने के कारण काटने के खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए और अपने जीवित होने के प्रमाण दिखाए तो माननीय जस्टिस महोदय ने जो जवाब दिया वह घोर निंदनीय है । मुख्य न्यायाधीश तक ने कहा कि कोई बात नहीं, ” अगली बार चुनाव में आपका नाम आ जाएगा ” ।

ऐसे न्यायाधीशों के खिलाफ और कहां आवाज उठाई जा सकती है ? महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी ने तो जब से पद ग्रहण किया है, मौन व्रत धारण किया हुआ है । जब देश का प्रथम नागरिक तक मूक दर्शक बन जाए खासकर तब जब देश की अंतरराष्ट्रीय पहलवान बेटियों को जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस के Male सिपाहियों, इंस्पेक्टर आदि ने उनके शारीरिक अंगों पर हाथ रखकर सड़क पर घसीटा, मारा , महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी के मुंह में लगा ताला बंद का बंद ही रहा ।

ऐसी स्थिति में मेरा मानना है कि न केवल ICJ बल्कि UNO तक में लगातार गत एक दशक से केंद्र सरकार की goon गिरी अर्थात निरंकुशता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए ही इन दोनों संस्थाओं को गठित किया गया है ।

ढाई लाख केंद्रीय बलों एवं बंगाल राज्य की पुलिस, केंद्र की सारी खुफिया एजेंसी की उपस्थिति के बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार शुभेंदु अधिकारी के PA की तथा दो TMC के कार्यकर्ताओं की 24 घंटे में हत्या हो जाती है, शुभेंदु के PA की हत्या के लिए भाजपा ममता बनर्जी के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी को फंसाने के कुचक्र रच रही है । साथ ही शुभेंदु अधिकारी & उसके लोग यह भी कह रहे हैं कि उसके PA को मारने वाले बांग्लादेश से आए शूटर थे ।

अगर देश के गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल में लगभग एक महीने से डेरा डाले रहने के बावजूद अगर बंगला देश के शूटर बंगाल में आए तो मोदी जी ने अभी तक गृह मंत्री अमित शाह को बर्खास्त कर उनके खिलाफ जांच क्यों नहीं बिठाई ?

हरीश अवस्थी ।

सोशल मीडिया और समाज में लगातार यह देखा और महसूस किया जा रहा है कि जिन गरीब, संसाधन-विहीन और कम शिक्षित परिवारों की कानूनी जानकारी सीमित है, जिनकी राजनीतिक पहुंच कमजोर है और जिनके सामाजिक संगठन मजबूत नहीं हैं, उन परिवारों, कुणबो के युवाओं को नशे, अपराध, हिंसा और षड्यंत्रों के जाल में फंसाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर युवाओं को इस हद तक धकेला जा रहा है कि जिंदा जलाने, जिंदा काटने और सामूहिक हिंसा जैसी भयावह घटनाएं समाज के सामने आ रही हैं।

जब पीड़ित परिवारों के पक्ष में सामाजिक कार्यकर्ता, जागरूक युवा या समाज के जिम्मेदार लोग आवाज उठाते हैं, तब कई बार अपराधियों तक कानून का शिकंजा पहुंचाने के बजाय आवाज उठाने वालों के शब्दों, उनके आक्रोश, उनकी भावनात्मक पीड़ा और भाषा की छोटी-छोटी त्रुटियों को मुद्दा बनाकर उन्हें ही घेरने का प्रयास किया जाता है। उनके खिलाफ जातिगत टिप्पणी, सामाजिक वैमनस्य या कानून तोड़ने जैसे आरोप लगाने की कोशिश की जाती है।

दु:खद स्थिति यह है कि गांवों, गली, मोहल्ले, और क्षेत्रों में जिन समूहों या जातियों का सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक वर्चस्व होता है, उनके प्रभावशाली लोग कई बार अपने अपराधियों को बचाने के लिए सामूहिक दबाव, साम-दाम-दंड-भेद, राजनीतिक पहुंच, सामाजिक नेटवर्क और कानूनी तकनीकों का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। वहीं दूसरी ओर गरीब और पीड़ित परिवारों को डराने, तोड़ने, चुप कराने और न्याय की लड़ाई लड़ने वालों का मनोबल गिराने का प्रयास किया जाता है।

यह भी एक सच्चाई है कि पीड़ित पक्ष के समर्थन में खड़े लोगों को उकसाकर उनसे भावनात्मक या भाषाई गलती करवाने की कोशिश की जाती है, ताकि असली अपराध और अन्याय से ध्यान भटकाकर हटाकर संघर्ष करने वालों को ही कठघरे में खड़ा किया जा सके। आपका मनोबल तोड़ना भी एक संगठित साजिश है। आपको उकसाकर गलती करवाना भी एक रणनीति है।

इसलिए मैं सभी समाजों, वर्गों और समुदायों के उन युवाओं से अपील करता हूं जो न्याय, मानवता और सामाजिक सम्मान के न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं—

गाली का जवाब गाली से मत दीजिए। भावनात्मक प्रतिक्रिया को प्रमाण आधारित लड़ाई में बदलिए। शब्दों में संयम रखिए, तथ्यों को मजबूत रखिए और कानून की भाषा सीखिए।

जो लोग अभद्र टिप्पणियां, जातिगत गालियां, धमकियां या सामाजिक अपमान फैलाने का काम कर रहे हैं, उनके स्क्रीनशॉट, वीडियो, ऑडियो, पोस्ट, लिंक और सभी साक्ष्य सुरक्षित रखिए। बिरादरी के जिन युवाओं को अन्य समाज के लोग जाति सूचक गालियां दे रहे हैं समाज का नौजवान युवा उनके विरुद्ध कोई गालियों का प्रयोग ना करें केवल उनके स्क्रीनशॉट लेकर इकट्ठे कर लें। समाज के जिम्मेदार, शिक्षित और संभ्रांत लोगों की समितियां बनाकर इन सबका सामूहिक दस्तावेज तैयार कीजिए।

न्याय की यह लड़ाई किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है। यह अपराध, अन्याय, शोषण, हिंसा और समाज को तोड़ने वाली सोच के खिलाफ लड़ाई है। इस लड़ाई को सड़क से सदन तक, प्रशासन से न्यायालय तक, राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों तक संवैधानिक पटल और कानूनी दायरे में मजबूती से रखी जाएगी।

याद रखिए:—
संयम कमजोरी नहीं होता।
तथ्य सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
संगठित जागरूक और कानूनी संघर्ष ही स्थायी न्याय का रास्ता बनाता है।

न्यायकीलड़ाई

सामाजिक_न्याय

संविधानकासम्मान

तथ्यऔरप्रमाण

मानवाधिकार

कानूनी_संघर्ष

अन्यायकेखिलाफ

संगठित_समाज

न्याय_मिलेगा

✍️AKS

यह दिल्ली कोर्ट की जस्टिस सुधा है एक महिला है और एक महिला जज होते हुए इनका यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक इससे पहले इलाहाबाद के जज ने कहा था की नाडा खोलने स्तन दबाना वगैरा-वगैरा बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, झारखंड के जज ने कहा था की योनि के ऊपर वीर्यपात करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, अब यह चंद्रशेखर सुधा है महिला जज है अब इनका कहना है की हाइमन नहीं फटा तो रेप नहीं माना जाएगा मतलब सब कुछ फट जाए सिर्फ हाइमन नहीं फटेगा तो रेप नहीं माना जाएगा क्या इन लोगों की घरों में बहन बेटी बहू या महिला होती नहीं है क्या,,,वह दो पुरुष थे बिना महिला के पैदा हो गए, लेकिन ये तो महिला है तो यह कैसे पैदा हो गई, महिला से ही पैदा हुई होगी,,, तो भारत के संविधान को यह लोग कहां लेकर जा रहे हैं और यह भारत के संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है,मजाक बनाया जा रहा हैपूरी दुनिया में इसका क्या इंप्रेशन पड़ेगा इन लोगों को अंदाजा ही नहीं है कितना मजाक बनाया जाएगा यह लोग नहीं समझते सकते।

यह दिल्ली कोर्ट की जस्टिस सुधा है एक महिला है और एक महिला जज होते हुए इनका यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक इससे पहले इलाहाबाद के जज ने कहा था की नाडा खोलने स्तन दबाना वगैरा-वगैरा बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, झारखंड के जज ने कहा था की योनि के ऊपर वीर्यपात करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, अब यह चंद्रशेखर सुधा है महिला जज है अब इनका कहना है की हाइमन नहीं फटा तो रेप नहीं माना जाएगा मतलब सब कुछ फट जाए सिर्फ हाइमन नहीं फटेगा तो रेप नहीं माना जाएगा क्या इन लोगों की घरों में बहन बेटी बहू या महिला होती नहीं है क्या,,,वह दो पुरुष थे बिना महिला के पैदा हो गए, लेकिन ये तो महिला है तो यह कैसे पैदा हो गई, महिला से ही पैदा हुई होगी,,, तो भारत के संविधान को यह लोग कहां लेकर जा रहे हैं और यह भारत के संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है,
मजाक बनाया जा रहा है
पूरी दुनिया में इसका क्या इंप्रेशन पड़ेगा इन लोगों को अंदाजा ही नहीं है कितना मजाक बनाया जाएगा यह लोग नहीं समझते सकते।

क्षत्रपति शाहूजी महाराज-6 मई, 1922 (स्मृति दिवस विशेष)

राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज का  जन्म 26 जून 1874 में हुआ था। शिवाजी (प्रथम) के दूसरे पुत्र के वंशज शिवाजी (चतुर्थ) कोल्हापुर में राज करते थे। ब्रिटिश षडयंत्र और अपने ब्राह्मण दीवान की गद्दारी की वजह से जब शिवाजी (चतुर्थ) का कत्ल हुआ तो उसकी विधवा आनंदीबाई ने अपने एक जागीरदार अबासाहेब घाटगे के पुत्र यशवंतराव को 17 मार्च सन 1884 में गोद लिया था। अब उनका नाम शाहू छत्रपति महाराज हो गया था। छत्रपति शाहू महाराज की शिक्षा राजकोट के राजकुमार विद्यालय में हुई थी। महात्मा फुले के मित्र और विश्वासपात्र मामा परमानंद की पुस्तक ‘लैटर्स टू एन इंडियन राजा’ इस पुस्तक में प्रकाशित पत्रों में शिवाजी को किसानों का नेता और अकबर को एक न्यायप्रिय शासक बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस पुस्तक का युवा शाहू पर गहरा प्रभाव पड़ा।

 शाहू ने 1894 में कोल्हापुर की सत्ता संभाली तब उन्होंने पाया कि उनके प्रशासन पर ब्राह्मणों का एकाधिकार है। उन्हें यह अनुभव हुआ कि ब्राह्मणों का यह एकाधिकार ब्रिटिश राज से भी ज्यादा खतरनाक है। इसलिए उन्होंने अपने शासन के दौरान शूद्र/अतिशूद्र जातियों के हितों में अनेक सामाजिक, प्रशासनिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक कदम उठाए। जिनमें 26 जुलाई, 1902 को 50% आरक्षण दिया, शिक्षा पर विशेष ध्यान देकर बहुत सारे छात्रावास और विद्यालय बनवाया एवं छत्रवृति का प्रावधान किया। मुस्लिम शिक्षा समिति का गठन किया। खेल कूद के क्षेत्र में जिम्नास्टिक और कुश्ती को विशेष बढ़ावा दिया।

 क्षत्रपति शाहूजी समाज ने सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए अनेकों कदम उठाए। उन्होंने ब्राह्मणों को विशेष दर्जा देने से इनकार कर दिया। ब्राह्मणों को रॉयल धार्मिक सलाहकारों के पद से हटा दिया। उन्होंने ब्राह्मण की बजाय एक युवा मराठा विद्वान 'क्षत्र जगद्गुरु' (राजगुरु) का खिताब देकर नियुक्त किया। एक अतिशूद्र (अछूत) गंगाराम काम्बले की चाय की दुकान खुलवाया, अंतर जाति विवाह को वैध बनाया। महिला शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए देवदासी प्रथा पर कानून प्रतिबंध लगाया, विधवा पुनर्विवाहों को वैध बनाया एवं बाल विवाह रोकने के प्रयास किए। वंचित समाज हित में शाहूजी महाराज के मौलिक योगदान के लिए कानपुर के कुर्मी योद्धा समुदाय ने उन्हें राजर्षि की उपाधि देकर सम्मानित किया।

 सारांश के तौर पर शाहूजी महाराज के कार्यों का आंकलन करें तो उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले के उत्तराधिकारी के रूप में उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उनके द्वारा गठित सत्य शोधक समाज का संरक्षण किया। 

*डॉ अम्बेडकर और शाहूजी महाराज-* दोनों महापुरुषों का सम्बंध बड़ा आत्मीय था। बाबा साहब अम्बेडकर बड़ौदा महाराज की छात्रवृति पर विदेश पढ़ने गए थे लेकिन बीच मे ही छात्रवृति खत्म हो जाने के कारण उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा। इसकी जानकारी जब साहूजी महाराज को हुई तो भीमराव का पता लगाकर महाराज स्वयं मुंबई की चाल में उनसे मिलने पहुंच गए और आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए बाबा साहब को आर्थिक सहयोग दिया। 

 शाहूजी महाराज एक राजा होते हुए भी एक अछूत छात्र (बाबा साहब) को उसकी बस्ती में जाकर मिलते हैं, इससे पता चलता है कि शाहूजी महाराज कितने अदभुत इंसान रहे होंगे। इस प्रषंग की अनुभूति जब बहुजन मिशन के अनुयायी करते हैं तो उनके मन में साहूजी महाराज के प्रति असीम श्रद्धा और सम्मान उमड़ आता है। इतना ही नही उन्होंने बाबा साहब को पिछड़े और वंचित समाज का नायक घोषित करते हुए एक तरह से फुले/शाहू मिशन का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

 बाबा साहब अम्बेडकर का भी शाहू महाराज के प्रति कम सम्मान नही था उन्होंने अपने अनुयायियों को स्पष्ट सन्देश दिया है कि, *"एक बार मुझे भुला दोगे चल जाएगा लेकिन वंचितों के लिए सदैव तैयार रहने वाले सच्चे राजा क्षत्रपति शाहू महाराज को कभी मत भूलना, आप उनकी जयंती त्योंहार उत्सव की तरह मनाना।"* इस तरह 28 वर्ष तक कोल्हापुर रियासत का शासन करते हुए बहुजन राजा शाहूजी महाराज का 48 वर्ष की उम्र में 6 मई, 1922 को उनका मुम्बई में परिनिर्वाण हो गया।

 *महात्मा फुले का उत्तराधिकारी थे शाहूजी महाराज-* आधुनिक युग में बहुजन मिशन को लिंक करके जब हम देखते हैं तो शाहूजी महाराज हमें महात्मा ज्योतिबा फुले के उत्तराधिकारी के रूप में नजर आते हैं, जिसे हम निम्न तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर समझ सकते हैं:

१ आत्मसम्मान का आंदोलन- छत्रपति शाहूजी महाराज को जब ब्राह्मण पुरोहित वेदोक्त मंत्रों के बजाय पुराणोक्त मंत्रों से स्नान कराते हैं तो शाहू महाराज इसका कारण पूछते हैं, पुरोहित कहता है महाराज आप कर्म से राजा हो लेकिन जन्म से शुद्र (कुर्मी) हो इसलिए मुझे धर्मानुसार आपको शूद्र की हैसियत से ही स्नान कराना पड़ेगा। इस पर शाहू महाराज ने ब्राह्मण पुरोहित को दुतत्कारते हुए भगा दिया लेकिन शाहू महाराज समझ गए जब मेरी ही यह अवस्था है तो ब्राह्मणों के सामने आम जनता की क्या हैसियत होगी। इस अपमान ने शाहू महाराज को धर्मद्रोही बना दिया।

२ जाती उन्मूलन का आंदोलन- महात्मा ज्योतिबा फुले शूद्र/अतिशूद्र जातियों को संघठित करना चाहते थे लेकिन शाहू महाराज समझ रहे थे कि ऊंच नीच के भेद को खत्म किए बगैर यह सम्भव नही है। मगर यह भेद केवल आदेश देने से भी खत्म नही होगा इसलिए कुछ व्यवहारिक कदम उठाने होंगे। इसी क्रम में अछूत गंगाराम काम्बले की चाय की दुकान खुलवाकर स्वयं महाराज चाय पीते थे। अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा आदि उनके उस जमाने में जाति व्यवस्था के खिलाफ उठाये गए साहसिक कदम थे।

३. समाज को आत्मनिर्भर बनाया- ब्राह्मणवादी मान्यता, परम्परा और संस्कारों से समाज को आजाद कराने के लिए तार्किक वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ाया दिया। 50% आरक्षण देकर वंचितों की शासन में भागीदारी सुनिश्चित किया आदि ऐसे कदम थे जिनके माध्यम से समाज को आत्मनिर्भर बनाया गया ताकि समाज अपनी लड़ाई स्वयं लड़ सके

निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि छत्रपति शाहूजी महाराज 108 साल तक चले फुले/शाहू/अम्बेडकर बहुजन मिशन के बीच की कड़ी हैं।

मोबाइल उठाइए, खुद कीजिए स्वगणना; बागपत में प्रशासन ने शुरू किया जनभागीदारी अभियान

DM, CDO एवं शीर्ष अफसर खुद कर रहे स्वगणना, अब बागपत में एक लाख लोगों तक पहुंचने की तैयारी

नागरिकों से आह्वान: मोबाइल पर कुछ मिनट देकर बनिए देश की पहली डिजिटल जनगणना का हिस्सा

बागपत, 10 मई 2026। “इस बार जनगणना में सिर्फ कर्मचारी घर-घर नहीं जाएंगे, बल्कि लोग खुद अपने मोबाइल से अपनी जानकारी दर्ज करेंगे।” बागपत में चल रहे स्वगणना अभियान को लेकर जिला प्रशासन कुछ इसी सोच के साथ काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश में 7 मई से 21 मई तक चल रहे अभियान के तहत अब बागपत में भी प्रशासन इसे केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान बनाने में जुट गया है।

डिजिटल जनगणना को लेकर प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि लोग खुद आगे आकर स्वगणना करें। अधिकारियों का मानना है कि जब नागरिक स्वयं अपने मोबाइल पर कुछ आसान स्टेप्स पूरा कर अपनी जानकारी दर्ज करेंगे, तभी देश की पहली डिजिटल जनगणना सही मायनों में सफल हो सकेगी।

अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसकी शुरुआत केवल अपीलों तक सीमित नहीं रही। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्वयं ऑनलाइन माध्यम से स्वगणना कर लोगों को संदेश देने का प्रयास किया। इससे पहले मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह भी अपनी स्वगणना पूरी कर चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जब अधिकारी और कर्मचारी खुद इस प्रक्रिया से गुजरेंगे तो आमजन में भरोसा बढ़ेगा और लोग भी इसे आसानी से समझ सकेंगे।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी और स्वगणना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। नागरिक अब स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान के सहभागी बन सकते हैं।

जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों और सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों को स्वगणना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि जब सरकारी कर्मचारी स्वयं स्वगणना करेंगे तो वे गांवों और मोहल्लों में अन्य लोगों को भी इसकी प्रक्रिया आसानी से समझा सकेंगे और लोग भी इस प्रक्रिया से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में अभियान को लेकर विशेष सक्रियता दिखाई जा रही है। पंचायत स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। ग्राम सचिवालयों, पंचायत भवनों, जनसेवा केंद्रों, स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से लोगों को स्वगणना की जानकारी दी जा रही है। कई जगह कर्मचारियों द्वारा कैंप लगाकर लोगों को मोबाइल पर स्वगणना की प्रक्रिया समझाई जा रही है, जिससे लोगों में रुचि भी बढ़ रही है।

इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत कर्मचारियों, शिक्षकों, लेखपालों और अन्य फील्ड कर्मचारियों को भी लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप, पोस्टर, बैनर और स्थानीय जनसंपर्क माध्यमों के जरिए लगातार लोगों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तहत स्व-गणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया 7 मई 2026 से शुरू होकर 21 मई 2026 तक चलेगी।
Self Enumeration(स्व गणना) करने का तरीका https://se.census.gov.in पर करे।

जिला प्रशासन के अनुसार अभी तक करीब 2000 लोग स्वगणना कर चुके हैं। प्रशासन ने 21 मई तक इस संख्या को बढ़ाकर एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विभागवार समीक्षा भी की जा रही है और अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

सूचना विभाग बागपत

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