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अंडर 14 आयु वर्ग नेशनल एथिलिट्स गौल्ड मैडलिस्ट जनपद बागपत की महिला धावकों का ट्राफी एवं मैडल देकर सम्मानित किया।
यह ऐथलीट प्रतियोगता आल इंडिया स्कूल गेम्स के तहत गोवा में आयोजित हुई थी पिछले दिनों।
जिसमें जनपद बागपत के कौताना गांव की काजल ने अंडर 14 आयु वर्ग में बागपत व प्रदेश की तरफ से 1600 व 200 मीटर में गोल्ड मेडल,तथा रोनक कोताना ने 400 मीटर में गोल्ड व अंशिका लुहारा ने 12 आयु वर्ग में 1600 मीटर व फराह लुहारा ने 13 आयु वर्ग में 1600 मीटर में गौल्ड मैडल जित कर जनपद क्षेत्र व गांव का मान पुरे भारत में बढाया, उनकी इस उपलब्धि पर उनके आज जनपद में लौटने पर बड़ौत रेलवे स्टेशन पर बड़ौत श्रमिक एसोशिएशन बागपत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार वर्मा व कानूनी सलाहकार शिक्षक नेता जितेन्द्र तोमर ने फुलमाला भेंटकर तथा ट्राफी व मैडल भेट कर जोर दार स्वागत किया।इस दौरान विरेन्द्र शर्मा रेलवे स्टेशन दुर्गा मंदिर पुजारी अमरपाल शर्मा प्रदीप सोनपाल विनित वर्मा व कोच दिपक सरोहा कोच युसुफ मलिक थे।सभी ने महिला एथलीटों को उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद दिया

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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