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देश के पहले परमाणु परीक्षण के तथ्यों को समझते हैं । तब आगे बात करते हैं-

स्थान: पोखरण टेस्ट रेंज, राजस्थान

तारीख: 18 मई 1974

समय: सुबह 8:05 बजे

ऑपरेशन के नाम: “स्माइलिंग बुद्धा”

वैज्ञानिक नेतृत्व: डॉ. राजा रमन्ना (DRDO और BARC के वैज्ञानिक)

राजनीतिक नेतृत्व: तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी

संस्था: BARC (Bhabha Atomic Research Centre)

अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी, क्योंकि भारत को कुछ परमाणु तकनीक शांतिपूर्ण इस्तेमाल के नाम पर दी गई थी।

इसके बाद भारत पर कई प्रकार के न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और ईंधन प्रतिबंध लगाए गए।लेकिन इस परीक्षण ने भारत को “परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र” के रूप में स्थापित कर दिया।

जब यह हो गया,तब अमरीका का राष्ट्रपति निक्सन बौरा उठा । उसने भारत में रिजीम चेंज करने के प्रयास शुरू कर दिए । जैसे ईरान को लेकर वह बौखलाया है । ईरान की परमाणु शक्ति उसे खटक रही है । अमरीका का यही नियम है, जो उसके खिलाफ हुआ,उसके यहां सत्ता बदलो मगर वह भूल गया कि भारत में इंदिरा जी थीं, ईरान ने खामनेई साहब हैं ।

इंदिरा गांधी पर अंदर बाहर से हमले शुरू हुए । देश को थामने का प्रयास अमरीका ने शुरू किया । रैंड जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत पर नज़र गड़ा दी । आज ईरान के साथ जो व्यवहार इज़राइल कर रहा,अमरीका के इशारे पर,यही हाल हमारे पड़ोसी का था,वह अमरीका का पिट्ठू बना हमें तंग करने लगा ।

आज जिसने जिनसे ईरान की जंग में सारे हिस्से देखे हैं । उसे 18 मई 1974 के बाद कि घटनाए समझने में दिक्कत नही होगी । कैसे भारत पर निक्सन ने नाखून गाड़ दियेथे मगर अगस्त में ही उसे अपनी सत्ता गवानी पड़ गई,जैसे ट्रम्प भी एक खतरे में हैं और नेतन्याहू भी है ।।इनमे से किसी की भी सत्ता कभी भी जा सकती है । यह होता है कुशल नेतृत्व जा नतीजा ।

लोग इमरजेंसी इमरजेंसी कर रहे हैं । परमाणु परीक्षण के बाद इंदिरा जी की सत्ता हटाना ही अमरीका के ध्येय था । जब निक्सन के बाद रिपब्लिकन का प्रेजिडेंट गेराल्ड आर फोर्ड बना तो उसकी भी यही नीति थी । इसने तो निक्सन को एक स्कैंडल,जिसमे उसकी सत्ता गई । उसके लिए माफ तक कर दिया ।

अमरीका उस समय तो इंदिरा रिजीम नही चेंज कर सका । चाहकर भारत पर हमले नही कर सका । इंदिरा जी ने अंदर बाहर सत्ता को और देश को मज़बूती से पकड़ लिया,क्योंकि यह ज़रूरी था । भारत अगर उस समय इंदिरा जी को हटा देता,तो अमरीका हमारी परमाणु शक्ति को खा जाता । इंदिरा ने साहस चुना और भिड़ गई । यह भिड़ंत अंदर बाहर दोनों थी मगर इंदिरा को जनता का साथ था । अमरीका भारत में रिजीम नही चेंज कर पाया । इंदिरा जी के ऊपर कीचड़ उछला मगर उन्होंने देश की परमाणु शक्ति को अक्षुण्य कर दिया ।

कहने को बहुत है । मगर बस इतना ही कहेंगे जैसे आज खामनेई साहब ने ईरान की परमाणु शक्ति,इरानीयत और ईरान को अमरीका के चंगुल से बचाया है । ऐसे ही सन 1974 में इंदिरा जी ने भी बचाया था । भारत को सब जकड़ना चाह रहे थे मगर इंदिरा जी की इच्छाशक्ति,साहस और समझ ने सारी साजिशें काफूर कर दी ।

आप इमरजेंसी के लिए उनकी आलोचना कर सकते हैं । मगर तत्कालीन परिस्थितियों में,अमरीका के खूनी पंजो के सामने,उनके साहस की भी थोड़ी इज़्ज़त कर सकते हैं । इमरजेंसी और परमाणु परीक्षण और अमरीका-पाकिस्तान । जब यह समग्रता से देखिएगा,तो वर्तमान में जो ईरान में हो रहा, वह दोहराओ ही नज़र आएगा । भविष्य में खामनेई साहब की आलोचना हो सकती है कि उन्होंने सत्ता अपने हाथ मे रखी मगर जो वर्तमान में देख रहे हैं । वह जानते हैं कि देश को बनाने,बचाने और ताकतवर रखने के लिए यह ज़रूरी था ।
ओर आज जब मोदी का अमरीका के आगे सरेंडर देखते है तो इंदिरा गांधी जी के लिए मन श्रद्धा से भर जाता है
नमन
Rahul Gandhi

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