मेरठ में एसएसपी मेरठ के द्वारा आंदोलन कार्यों के ऊपर बल प्रयोग थप्पड़ मारना और गाड़ी में बैठे हुए आंदोलनकारी की भी पिटाई करना ऐसा लगता है कोई चोर उचक्का कहीं गली मोहल्ले में जाकर अपनी दादागिरी झड़ रहा हो
हम आंदोलन भीड़ के साथ क्यों नहीं करते क्योंकि आजकल पुलिस पुलिस नहीं है वह सिर्फ उठाई गिरे टपोरी दादा गुंडे वर्दी के भैंस में सरकार के द्वारा इजाजत दिए हुए हैं जिस के सरकार की तानाशाही चल सके
ऐसा लगता है कि सरकार ने देश की जनता को गुलामी करना अंग्रेजों की गुलामी के बाद एक बार फिर सिखा दिया है
देश की जनता पागल सरकारों से तंग आ चुकी है लेकिन गुंडे टपोरी छिछोरे टाइप के आई टाइप के पुलिस अधिकारियों के गैर जिम्मेदार आना और कानून के अनुसार ड्यूटी ना करना के कारण देश की जनता अपने अधिकारों के लिए भी नहीं लड़ना चाहती सरकार की तानाशाही के खिलाफ पिलाना नहीं चाहती पुलिस की गुंडागर्दी के खिलाफ भी लड़ना नहीं चाहती क्योंकि उन्हें डर है कि आजकल देश में पुलिस पुलिस का काम नहीं कर रही है पुलिस गुंडे टपोरी लुक दादा लुटेरे टाइप के लोगों जैसे काम कर रही है
मेरठ में एसएसपी मेरठ के द्वारा आंदोलनकारी के ऊपर बल प्रयोग और खुद भी थप्पड़ आदि दादागिरी दिखाना जैसी वीडियो देखकर अजीब लगा जिसकी कटे शब्दों में जितनी निंदा की जाए उतनी कम है और हम कर भी क्या सकते हैं निंदा के अलावा और कुछ नहीं कर सकते या फिर एक और कर सकते हैं चूड़ी पैर के अपने घर में बैठ सकते हैं।
देश की सेवा भी देश के दुश्मनों दुश्मन देश को तीन बार चेतावनी देता है उड़ जाइए यहां से चले जाइए नहीं तो हम बल प्रयोग करेंगे लेकिन पुलिस तो यह भी चेतावनी नहीं देती सीधे थप्पड़ गलियां डंडे टपोरी टाइप के काम करने शुरू कर देती है और मेरठ का आंदोलनकारी के ऊपर एसएसपी मेरठ का बल प्रयोग जीता जागता उदाहरण है जिसकी कड़े शब्दों में जितनी निंदा कीजिए इतनी कमहै।
हम अपील भी कर तो किस करें देश की जनता गुलाम खुद को महसूस करने लगी व्यक्तिगत बचाने के लिए देश को नहीं बचा रही सरकार तानाशाह बन चुकी है प्लीज फोर्स अपने बीवी बच्चे परिवार पालने के लिए गैर जिम्मेदार कानून के खिलाफ जाकर कानून की आड़ में ड्यूटी कर रही है
आखिर देश की जनता जाए तो जाए कहां जाए मां महिमा राष्ट्रपति जी वह खुद सरकार के रहमों करम पर पद पर बैठे हैं उन्होंने कोई सख्त निर्णय सरकार के खिलाफ लिया तो यह सरकार उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा देगी सरकार जाति नहीं है कि देश की जनता सक्षम कामयाब हो इसलिए देश की जनता को लगातार गुलाम कमजोर सरकार बना रही है।
पुलिस फोर्स प्रशासनिक अधिकारी तब डरे हुए बैठे हैं कहीं उनकी नौकरी ना चली जाए बच्चे उनके भूखे ना मर जाए
यानी अगर कहा जाए देश के चारों स्तंभ आज कमजोर कर दिए गए हालांकि 2015 में ही कमजोर कर दिए गए थे
मीडिया अपना काम नहीं कर रहा वह सिर्फ सरकार की गुलामी चाटुकार कर रहा
विधायिका वह जोड़-तोड़ की राजनीति करके सरकार में बन जाता है जबकि जनता चाहती नहीं है कि जोड़-तोड़ की राजनीति हो लेकिन संविधान और कानून का फायदा उठाकर खरीद फरोख्त कर सरकार बन जाते हैं विधायक का खत्म हो चुकी है सिर्फ तानाशाही बची है सरकारकी
कार्यपालिका देश में कार्य करने वाले पुलिस फोर्स पैरामिलिट्री फोर्स की एड इलेक्शन कमीशन तमाम स्वतंत्र आदि भी अपने कार्य को ना करके कुछ लोगों के विधायकों के सांसदों के संकुल में फंस चुके हैं
न्यायपालिका न्यायपालिका का हाल आप सब लोग देख ही रहे हैं कहां जाओगे किसको शिकायत करोगे आंदोलन करोगे पुलिस पीटेगी गलियां देगी बिना चेतावनी के डंडे बरसा देगी और फिर पुलिस हिरासत में भी पीते जाएंगे आखिर देश की जनता आंदोलन कैसे करेगी यह तो अंग्रेजों से भी बच से बढ़ाकर सरकार आ गई कम से कम अंग्रेज चौथ वह बाहर के थे थाना सही करते थे यह तो अपने ही है अपने ही नहीं छोड़ रहे अंग्रेजों से भी ज्यादा तानाशाही कर रहे हैं
मैं तो पुलिस फोर्स पैरा मिलिट्री फोर्स ना करूंगा कि देश की जनता देश की मालिक होती है आप भी देश की जनता हो आप भी इस देश के मालिक हो नियम कायदे कानून का पालन करना जरूरी है लेकिन जनता सर्वोपरि है उनके हक अधिकारों की रक्षा करना पुलिस फोर्स प्रशासन आदि का काम है ना की सरकारों का आदेश गैर जिम्मेदार आना आदेश मानना समझिए सोचिए और कार्य करिए यह अधिकार पुलिस के पास होता है मिलिट्री के पास आदेश का पालन करना है आजकल पुलिस मिलिट्री का काम कर रही है सीधा सरकार का आदेश और लत बजाने का काम कर रही है ऐसा पुलिस को नहीं करना चाहिए पुलिस को अपना काम करना चाहिए सरकार के नेता भी पेट्रोलियम मंत्री का काम परिवहन मंत्री करता है परिवहन मंत्री का काम रक्षा मंत्री करता है रक्षा मंत्री का काम वित्त मंत्री करता है वित्त मंत्री का काम कपिल मिश्रा या अन्य कोई मंत्री काम करता है और कहते हैं जिसका काम उसी को साजे और करें तो डंडा बजे आज नहीं तो कल सरकार बदलेगी इसलिए पुलिस फोर्स को जनता हित में काम करना चाहिए सरकार हित में नहीं इसलिए जनता हित में पुलिस कम करें यही निवेदन है क्योंकि जनता सीधे पुलिस के पास ही जाती है प्रशासनिक अधिकारियों के पास ही जा सकती है और वही गलत काम करेंगे तो फिर किसके पास जाएगी जनता।
आंदोलन को समाप्त करने के लिए पुलिस तीन बार चेतावनी जरूर दें पुलिस जनता हित में कम करें।
निवेदक
सुभाष चंद कश्यप पूर्व सांसद प्रत्याशी बागपत लोकसभा 2014 निर्दलीय 9837749557 10 जुलाई 2026