Spread the love

रमेश निषाद के नेतृत्व में मधुबन में हुआ मोस्ट शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम

फलजीत निषाद मोस्ट प्रचारक और राहुल कश्यप का मोस्ट आईटी के लिए हुआ चयन

सुलतानपुर। आज दिनांक 23-08-2025 को मोस्ट कल्याण संस्थान के तत्वाधान में शिक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन विकासखण्ड जयसिंहपुर क्षेत्र के मधुबन गांव में रमेश निषाद के नेतृत्व व फौजी शीतला प्रसाद में यादव के संरक्षण में किया गया।
उक्त अवसर पर सर्वसम्मति से सामाजिक चिंतक फलजीत निषाद को मोस्ट प्रचारक, राहुल कश्यप को मोस्ट आईटी मैनेजर और छोटेलाल बौद्ध को मोस्ट जिला महासचिव चयनित किया गया।
मोस्ट निदेशक शिक्षक श्यामलाल “गुरूजी” ने कहा कि हमारे काका-दादा, भाई-बंधुओं, माताओं-बहनों की सेवा-सुरक्षा करने के लिए नियुक्त लोक सेवक सही ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय कार्यालयों का चक्कर पे चक्कर लगवा रहे हैं। जनपद में कुछ ऐसे भी थानाध्यक्ष हैं जो शोषितों-पीड़ितों को न्याय देने में अक्षम साबित हो रहे हैं। ऐसे लोक सेवक संविधान की मंशा के अनुरूप कार्य व्यवहार की आदत डालें या छः माह में तबादला कराकर चलें जाए, अन्यथा उनकी सेहत के लिए अच्छा नही होगा।
उक्त अवसर पर मोस्ट प्रमुख जीशान अहमद, जनरल सेक्रेटरी राम उजागिर यादव, मोस्ट जिला प्रमुख डा. गोविन्द भगत, जिला प्रमुख (महिला विंग) नंदिनी बौद्ध, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र निषाद, डा. राहुल निषाद, कैशल्या निषाद, सीता देवी, रेशमा, शिवकुमारी, फूलकली, कुन्ता देवी, मनीषा, रमेश, सोनू निषाद, अंकुश यादव, अर्जुन निषाद, श्यामलाल निषाद, मुन्ना निषाद, जमुना निषाद, रामआनन्द गौतम, रहीम, अनन्तू, महेश, बाबूराम यादव, रामलौट, हृदयराम, तालुकदार, शिवपूजन, सदलराम, रामलखन, विनोद, इन्द्रजीत, अजय, घनश्याम, सुरेश, सूरज निषाद, राम अवतार, प्रेमनाथ सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

sbobet88

×