❌ झूठ: महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ✅ सच: महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पास हो गया, विपक्ष के समर्थन से❌ झूठ: विपक्ष ने महिला आरक्षण के खिलाफ वोट किया✅ सच: विपक्ष ने परिसीमन के खिलाफ वोट किया❌ झूठ: महिला आरक्षण अब लागू नहीं होगा✅ सच: 2023 में पास महिला आरक्षण कानून लागू हो चुका है, कल (16 अप्रैल 2026*) से ही⭐ अब मोदी सरकार चाहे तो 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून से कल के कल लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण दे सकती है.❓सवाल है- क्या मोदी सरकार महिलाओं को उनका अधिकार देगी?✔️ क्योंकि इस मामले पर पूरा विपक्ष राजी है. अब गेंद मोदी सरकार के पाले में है.भारत में सबसे ज्यादा अगर किसी पर यौन शोषण का आरोप है तो वो हैं नेता/बाबा/ पदाधिकारी और ये सब महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं, ये शातिर चाल देश कब समझेगा? ये सब जानते हुए,कि चुनाव मे फायदे के लिए नौंटकी किया जा रहा था- इनको पहले से ही पता था बिल पास नहीं होगा इसलिए बैनर पहले छपवा रखे थे सिर्फ नौटंकी थी टाइम बर्बाद करना संसद का बस ।अब सत्ता धारी पार्टी समर्थित महिला मोर्चे की आड़ में विधवा विलाप करवाना चाहेगी नौटंकी बाज़, अब देखना 👀 ये अपनी पार्टी के महिला मोर्चे को विधवा विलाप करने घर घर भेजने का काम करेंगे अरे भाई परिसीमन बिल हारा है महिला आरक्षण तो पास ही हुआ है

subhashchand4

Bysubhashchand4

Apr 20, 2026
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❌ झूठ: महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ
✅ सच: महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पास हो गया, विपक्ष के समर्थन से
❌ झूठ: विपक्ष ने महिला आरक्षण के खिलाफ वोट किया
✅ सच: विपक्ष ने परिसीमन के खिलाफ वोट किया
❌ झूठ: महिला आरक्षण अब लागू नहीं होगा
✅ सच: 2023 में पास महिला आरक्षण कानून लागू हो चुका है, कल (16 अप्रैल 2026*) से ही
⭐ अब मोदी सरकार चाहे तो 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून से कल के कल लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण दे सकती है.
❓सवाल है- क्या मोदी सरकार महिलाओं को उनका अधिकार देगी?
✔️ क्योंकि इस मामले पर पूरा विपक्ष राजी है. अब गेंद मोदी सरकार के पाले में है.
भारत में सबसे ज्यादा अगर किसी पर यौन शोषण का आरोप है तो वो हैं नेता/बाबा/ पदाधिकारी और ये सब महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं, ये शातिर चाल देश कब समझेगा? ये सब जानते हुए,कि चुनाव मे फायदे के लिए नौंटकी किया जा रहा था- इनको पहले से ही पता था बिल पास नहीं होगा इसलिए बैनर पहले छपवा रखे थे सिर्फ नौटंकी थी टाइम बर्बाद करना संसद का बस ।अब सत्ता धारी पार्टी समर्थित महिला मोर्चे की आड़ में विधवा विलाप करवाना चाहेगी नौटंकी बाज़, अब देखना 👀 ये अपनी पार्टी के महिला मोर्चे को विधवा विलाप करने घर घर भेजने का काम करेंगे अरे भाई परिसीमन बिल हारा है महिला आरक्षण तो पास ही हुआ है

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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