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माननीय मुख्यमंत्री जी की सोच को नई दिशा देता बागपत, यमुना महाआरती में दिखा सुशासन और संस्कृति का संगम

यमुना महाआरती में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी यमुना को साफ स्वच्छ रखने का लिया संकल्प

वैदिक मंत्रों, दिव्य शंखनाद और भगवा आभा के बीच भक्तिमय बागपत में जागी जिम्मेदारी की नई चेतना

माननीय राज्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री ने किया शुभारंभ, अतिथियों ने की जनपद की सुख-समृद्धि की कामना

घाट पर आरती, मन में संकल्प—यमुना को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में बढ़ा बागपत

संस्कृति के रंग, श्रद्धा की गूंज और नदी संरक्षण का संदेश—एक साथ सजी यमुना महाआरती

कृष्ण की स्मृतियों से वर्तमान का संकल्प, यमुना महोत्सव में दिखा संस्कृति का विस्तार

बागपत 19 अप्रैल 2026 – अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यमुना पक्का घाट आज एक दुर्लभ, आध्यात्मिक अनुभूति का साक्षी बना। आज संध्या जैसे ही ढली, पूरा बागपत मानो भक्ति, रंग और प्रकाश से आलोकित हो उठा। दीपों की अनगिनत कतारें, भगवा आभा से सजे घाट, फूलों की सुसज्जित तोरण द्वार, वैदिक मंत्रों और गूंजते शंखनाद.. इन सबके बीच ‘यमुना महा आरती’ महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। अक्षय तृतीय के अवसर पर आज संध्या गमगीन में यह आयोजन “भक्तिमय बागपत” की एक नई पहचान गढ़ने जा रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने यमुना तट को आस्था, उत्साह और संकल्प से भर दिया। यहां आस्था के साथ जिम्मेदारी का संकल्प भी उतनी ही शक्ति से प्रवाहित हुआ

आरती की पहली लौ जैसे ही प्रज्वलित हुई, यमुना के जल में उसकी झिलमिलाहट ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सदियों पुरानी परंपरा आधुनिक संकल्प के साथ पुनर्जीवित हो रही हो। घाट पर उपस्थित जनसमूह में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरों पर श्रद्धा के साथ एक अलग तरह का गर्व झलक रहा था। यह गर्व अपनी यमुना का था, अपनी संस्कृति का था और उस संकल्प का था, जो इस महोत्सव के माध्यम से पूरे बागपत में जागृत हो रहा है। जैसे ही बनारस के आचार्यों ने वेद मंत्रों का उच्चारण आरंभ किया, वातावरण में एक गहन आध्यात्मिक कंपन अनुभव होने लगा। यज्ञ की सुगंध, मंत्रों की लय और आरती की लौ, इन सबने मिलकर ऐसा दृश्य रचा, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पर्श किया।

उत्तर प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में धार्मिक आयोजनों को स्वच्छता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ जोड़ने की जो दिशा विकसित हुई है, यमुना महा आरती उसका सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई। “भक्ति भी, प्रकृति भी” के भाव को आत्मसात करते हुए यह आयोजन एक ऐसे मॉडल के रूप में उभरा, जिसमें आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलते नजर आए। भगवा रंग से सजी घाट की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने इस आयोजन को एक दिव्य और अनुशासित स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, जंतु, उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन बात मा०राज्यमंत्री केपी मलिक जी तथा माo संसदीय कार्य एवं औद्योगिक विकास राज्यमंत्री एवं प्रभारी मंत्री जसवंत सिंह सैनी जी ने महाआरती में सहभागिता करते हुए नदियों को बचाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि यमुना हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बागपत की जनता की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा तय करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनते हैं। यमुना महाआरती महोत्सव में आए सभी नागरिकों की जागरुकता की प्रशंसा की। सभी गणमान्य अतिथियों ने बागपत की समृद्धि, खुशहाली और यमुना की निर्मलता के लिए मंगलकामनाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे पवित्र पर्व पर लिया गया संकल्प अक्षय फल देता है, इसलिए आज का यह यमुना को स्वच्छ और संरक्षित रखने का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर बनेगा।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव को “जन-जागरूकता एवं जन-सहभागिता अभियान” के रूप में विकसित किया गया है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम पूर्णतः व्यवस्थित और प्रभावी नजर आया। जिलाधिकारी ने स्वयं तैयारियों की निगरानी कर यह सुनिश्चित किया कि आयोजन का हर पहलू चाहे वह सुरक्षा हो, स्वच्छता हो या सांस्कृतिक प्रस्तुति, वह उच्च स्तर का हो। साथ ही श्रद्धालुओं से संवाद भी किया और पक्का घाट पर आस्था और भव्यता और दिव्यता देखने को मिली भक्तिमय में दिखा बागपत ।

इस युमना महाआरती की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहाँ आस्था के साथ जिम्मेदारी का भाव भी उतनी ही मजबूती से जुड़ा हुआ दिखा। श्रद्धालुओं ने केवल आरती में भाग नहीं लिया, बल्कि यमुना को स्वच्छ रखने, कूड़ा न फैलाने और जल संरक्षण का संकल्प भी लिया। घाट पर श्रमदान और सफाई गतिविधियों ने इस संकल्प को व्यवहार में उतारने की दिशा भी दिखाई। यह दृश्य अपने आप में एक संदेश था कि परिवर्तन केवल शब्दों से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से आता है।

जिलाधिकारी ने कहा यदि इस आयोजन को सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाए, तो यह एक जीवंत परंपरा का पुनर्जागरण भी है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी यमुना भारतीय जनमानस में आस्था और प्रेम की धारा रही है। बागपत, जो महाभारत कालीन भूभाग से जुड़ा है, यहां इस तरह का आयोजन उस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत करता है। बनारस की टीम द्वारा विशेष संस्कृतिक प्रस्तुतियां, मंच पर प्रस्तुत भजन, लोकगीत और नृत्य-नाट्य ने इस विरासत को जीवंत रूप में सामने रखा, जिससे लोगों में अपनी जड़ों के प्रति जुड़ाव और गर्व की भावना और प्रबल हुई।

घाट की सजावट में भी भारतीयता के विविध रंग झलकते रहे। भगवा ध्वज, पुष्प सज्जा, पारंपरिक अलंकरण और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो बागपत अपनी सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत का सामूहिक उत्सव मना रहा हो। पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आयोजित इस महोत्सव में नवाचार भी आकर्षण का केंद्र बने। ‘जीरो वेस्ट’ की अवधारणा को अपनाते हुए प्लास्टिक मुक्त आयोजन का प्रयास किया गया। वेस्ट प्लास्टिक से तैयार ‘नन्ही कली देसी डॉल’ जैसे मॉडल ने लोगों को यह संदेश दिया कि अपशिष्ट को भी सृजनात्मकता के माध्यम से उपयोगी बनाया जा सकता है। यह पहल विशेष रूप से युवाओं और बच्चों के बीच चर्चा का विषय रही और उन्होंने इसे उत्साहपूर्वक अपनाया। अधिशासी अधिकारी केके भड़ाना के नेतृत्व में नगर पालिका बागपत द्वारा पेयजल ,व्यवस्था ,स्वच्छता जगह-जगह रखे शीतल पेजल के क्यूसेक घड़े भारतीय प्रकृति और संस्कृति का संदेश दे रहे थे। कलावे से लिखा हुआ आकर्षक बागपत यमुना महा आरती का सेल्फी प्वाइंट बना।

घाट की सजावट में भी भारतीय संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले। भगवा ध्वज, पारंपरिक अलंकरण, फूलों की झालरें और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा बागपत एक साथ मिलकर अपनी सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मना रहा हो। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया। स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे जन-जन के उत्सव का स्वरूप दिया। पहले दिन के इस शुभारंभ में लोग एक जीवंत प्रेरणा लेकर लौटे जिसमें आस्था के साथ जिम्मेदारी जुड़ी हो, संस्कृति के साथ संरक्षण का भाव हो और उत्सव के साथ समाज को सकारात्मक संदेश मिले।

आज बागपत में जले ये दीप अब एक संदेश बनकर फैल रहे हैं कि अपनी यमुना पर गर्व करें, उसे स्वच्छ रखें, और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित बनाएं। इस अवसर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया भाजपा जिला अध्यक्ष नीरज कुमार शर्मा ,पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय,शिवनारायण सिंह ,समस्त एसडीएम मनीष यादव ,ज्योति शर्मा ,भावना सिंह ,अमरचंद वर्मा ,परियोजना निदेशक राहुल वर्मा, ईओ केके भड़ाना, सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

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महिला विरोधी कौनजब प्रधानमंत्री लगातार 3 बार बन सकते तो, राजस्थान की महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे क्यों नहीं बन सकतीपर्ची की क्या जरूरत थी,,एक महिला को हटाने के चक्कर में पूरे राजस्थान को बर्बाद कर रखा है,, 20 राज्यों में भाजपा कि सरकार है,,महिला मुख्यमंत्री एक ही क्यों,,जिसे खुद की पत्नी के साथ धोखा कियाजिसने गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बहन को हटाया,,जिसने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा को हटाया,,⦁ जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने उन्नाव में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने मणिपुर में कुछ नहीं किया⦁ जिन्होंने महिला पहलवानों के लिए कुछ नहीं किया

❌ झूठ: महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ✅ सच: महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पास हो गया, विपक्ष के समर्थन से❌ झूठ: विपक्ष ने महिला आरक्षण के खिलाफ वोट किया✅ सच: विपक्ष ने परिसीमन के खिलाफ वोट किया❌ झूठ: महिला आरक्षण अब लागू नहीं होगा✅ सच: 2023 में पास महिला आरक्षण कानून लागू हो चुका है, कल (16 अप्रैल 2026*) से ही⭐ अब मोदी सरकार चाहे तो 2023 में पास हुए महिला आरक्षण कानून से कल के कल लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33% आरक्षण दे सकती है.❓सवाल है- क्या मोदी सरकार महिलाओं को उनका अधिकार देगी?✔️ क्योंकि इस मामले पर पूरा विपक्ष राजी है. अब गेंद मोदी सरकार के पाले में है.भारत में सबसे ज्यादा अगर किसी पर यौन शोषण का आरोप है तो वो हैं नेता/बाबा/ पदाधिकारी और ये सब महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं, ये शातिर चाल देश कब समझेगा? ये सब जानते हुए,कि चुनाव मे फायदे के लिए नौंटकी किया जा रहा था- इनको पहले से ही पता था बिल पास नहीं होगा इसलिए बैनर पहले छपवा रखे थे सिर्फ नौटंकी थी टाइम बर्बाद करना संसद का बस ।अब सत्ता धारी पार्टी समर्थित महिला मोर्चे की आड़ में विधवा विलाप करवाना चाहेगी नौटंकी बाज़, अब देखना 👀 ये अपनी पार्टी के महिला मोर्चे को विधवा विलाप करने घर घर भेजने का काम करेंगे अरे भाई परिसीमन बिल हारा है महिला आरक्षण तो पास ही हुआ है

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