प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मनमर्जी चला रहे हैं अभिभावक हर तरीके का पैसा दे रहे हैं अपनी मर्जी से यह बुक लगाएंगे अपनी मर्जी से ड्रेस लगाएंगे हर साल ड्रेस चेंज करेंगे और बस के कन्वेंस का भी पैसा अभिभावक से लेते हैं लेकिन बच्चों की जान की सुरक्षा बच्चों के साथ ऐसा खिलवाड़ जो कि उनके वहां ठीक तरह से फिट नहीं है उसके बावजूद भी धड़ल्ले से रोड पर दौड़ा रहे हैं बच्चों की जिंदगी बर्बाद करने का ठेका शायद प्राइवेट स्कूलों ने ले रखा है यहां अभी ढूंढ़ाहेड़ा से खेकड़ा मार्ग है यह बस ब्रेक फेल या क्लच प्लेट जो भी कुछ खराब हुआ होगा अगर पीछे कोई बड़ी खाई होती या कोई वहां पीछे आ रहा होता तो एक बड़ी दुर्घटना को अंजाम दिया होता लेकिन इस समय बच्चों की जान माल तो सुरक्षित है लेकिन आगे ऐसे हादसे ना हो इस पर क्या आरटीओ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा या शिक्षा विभाग कारवाही करेगा

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Bysubhashchand4

Apr 19, 2026
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प्राइवेट स्कूल वाले अपनी मनमर्जी चला रहे हैं अभिभावक हर तरीके का पैसा दे रहे हैं अपनी मर्जी से यह बुक लगाएंगे अपनी मर्जी से ड्रेस लगाएंगे हर साल ड्रेस चेंज करेंगे और बस के कन्वेंस का भी पैसा अभिभावक से लेते हैं लेकिन बच्चों की जान की सुरक्षा बच्चों के साथ ऐसा खिलवाड़ जो कि उनके वहां ठीक तरह से फिट नहीं है उसके बावजूद भी धड़ल्ले से रोड पर दौड़ा रहे हैं बच्चों की जिंदगी बर्बाद करने का ठेका शायद प्राइवेट स्कूलों ने ले रखा है यहां अभी ढूंढ़ाहेड़ा से खेकड़ा मार्ग है यह बस ब्रेक फेल या क्लच प्लेट जो भी कुछ खराब हुआ होगा अगर पीछे कोई बड़ी खाई होती या कोई वहां पीछे आ रहा होता तो एक बड़ी दुर्घटना को अंजाम दिया होता लेकिन इस समय बच्चों की जान माल तो सुरक्षित है लेकिन आगे ऐसे हादसे ना हो इस पर क्या आरटीओ विभाग सख्त कार्रवाई करेगा या शिक्षा विभाग कारवाही करेगा, वायरल श्री प्रमोद गोस्वामी

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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