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मेरी जानकारी के अनुसार प्राचार्य पदों पर नियुक्तियां करते समय शोध अनुभव के रूप में किसी शोध प्रोजेक्ट में काम करने एवं लघु शोध प्रबंध पर्यवेक्षक के रूप में किए गए कार्य को भी शोध अनुभव के रूप में मान्य किया गया था।

उक्त के संबंध में दी गई अनुमति संबंधी मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन बताया जाता है।

केवल पीएचडी करने संबंधी अनुभव को ही शोध अनुभव मानना मेरी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है।

अतः अनावश्यक रूप से अपने ही शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को संदेह की दृष्टि से देखना प्राचार्य पद पर नियुक्ति हेतु प्रयास करने की हिम्मत करने वाले योद्धाओं के साथ और वह भी शासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज में, जहां हर कोई जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, मेरी नजर से इनके साथ अन्याय करना होगा।
डॉ. प्रवीण कुमार
चांद सी नगरी, चंदौसी।

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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