Spread the love

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में अधिकारियों-कर्मचारियों ने एकजुट होकर किया श्रमदान

सुरक्षा, सुविधा और हरियाली के संगम से नंदन कानन वन को मिलेगा नया रूप, आकर्षण का बनेगा केंद्र

शहीदों की स्मृति, बच्चों की खिलखिलाहट, युवाओं का उत्साह और बुजुर्गों का सुकून समेटेगा नंदन कानन वन

बागपत, 26 सितम्बर 2025 — वर्ष 2005 में कभी बच्चों की खिलखिलाहट और परिवारों की रौनक से गूंजता बागपत जिले का नंदन कानन पार्क अब एक नई पहचान की ओर बढ़ चला है। यमुना किनारे हरियाणा की सीमा से सटे इस स्थल को जिला प्रशासन ने पुनर्जीवित कर दिव्यांग पार्क के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। इस पार्क का शिलान्यास पर्यटन विभाग की पक्षी विहार / चिल्ड्रन पार्क सौंदर्यीकरण योजना के तहत 04 सितंबर 2005 को किया गया था।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में नंदन कानन पार्क के जीर्णोद्धार हेतु एक नियमित स्वच्छता अभियान संचालित किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता के साथ संचालित इस श्रमदान में सफाईकर्मी, कर्मचारी और आम नागरिकों का भी योगदान मिल रहा है। इस पार्क में नगर निकाय एवं पंचायती राज विभाग की टीमें नियमित कार्य कर रही है। जल्द ही यहाँ सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और सुविधाओं का विस्तार होगा।

जिलाधिकारी ने इस अवसर पर कहा कि नंदन कानन पार्क बागपत की अमूल्य धरोहर है, जिसे अब एक विशेष स्वरूप में विकसित किया जाएगा और इसे सर्वसुलभ पार्क के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए यहाँ ऐसी सभी सुविधाएँ विकसित की जाएँगी, जिनसे सभी वर्ग के लोग जैसे बच्चे, महिलायें, बुजुर्ग, दिव्यांगजन आदि भी सहजता और सम्मान के साथ यहाँ आ सकें और परिवार सहित एक आनंददायी समय बिता सकें।

अभियान के दौरान केवल झाड़ू ही नहीं चला, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी का संदेश भी गूंजा। पार्क के शिलापट्ट, जिन पर जिले के शहीदों के नाम दर्ज हैं, उन्हें साफ कर सम्मानजनक स्वरूप दिया गया। पार्क का भविष्य और भी उम्मीदों से भरा है। यहाँ दिव्यांगजनों के लिए विशेष ट्रैक, रैंप, शौचालय, सुलभ रास्ते और बैठने की सुविधाएँ होंगी। यह कदम न केवल समावेशी समाज का प्रतीक बनेगा बल्कि प्रदेश भर में एक रोल मॉडल साबित होगा।

सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि यह हर आयु वर्ग और हर वर्ग के नागरिकों के लिए समान रूप से उपयोगी और आनंददायक बने। इसके लिए प्रशासन ने स्पष्ट खाका तैयार किया है। पार्क के भीतर स्थित तालाब को पूरी तरह साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि लोग यहाँ जल के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकें और बच्चे इसमें खेलते हुए प्रकृति के करीब आ सकें।

बच्चों के लिए आधुनिक और आकर्षक झूलों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें सुरक्षा के साथ-साथ नवीनता का भी ध्यान रखा जाएगा। यह झूले केवल खेल-कूद का साधन नहीं होंगे बल्कि बच्चों की शारीरिक सक्रियता और मानसिक प्रसन्नता को भी बढ़ाएँगे। बुजुर्गों के लिए पार्क में आरामदायक बेंच, छायादार स्थान और शांत बैठने की जगहें बनाई जाएँगी, ताकि वे प्रकृति की गोद में सुकून पा सकें और समाज से जुड़ाव का अनुभव कर सकें।

युवाओं को ध्यान में रखते हुए यहाँ खेल कोर्ट और ओपन फिटनेस ज़ोन की व्यवस्था की जाएगी। इससे न केवल उनकी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग होगा बल्कि खेल और व्यायाम की आदत भी मजबूत होगी। पार्क की हरियाली और उद्यानों का स्वरूप ऐसा रखा जाएगा कि यह केवल सैरगाह न रहकर पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक भी बने। यहाँ पौधारोपण, फूलों की क्यारियाँ और औषधीय पौधों के सेक्शन बनाए जाएँगे, जिससे नागरिकों को प्रकृति से जुड़ाव और स्वच्छ वातावरण का लाभ मिलेगा।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू है – दिव्यांगजन। पार्क को पूरी तरह से सुलभ पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पक्के ट्रैक, बैरियर-फ्री रास्ते, रैंप, विशेष झूले, हैंडरेल और सुलभ शौचालय जैसी सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। उद्देश्य यह है कि दिव्यांगजन भी बिना किसी कठिनाई के अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहाँ आ सकें, खेल सकें, घूम सकें और जीवन की खुशियों का समान रूप से आनंद उठा सकें।

नंदन कानन पार्क का यह विकास वास्तव में उस दृष्टि का प्रतीक बनेगा जिसमें हर नागरिक, चाहे वह बच्चा हो, महिलायें हो, युवा हो, बुजुर्ग हो या दिव्यांगजन, अपनी जगह और सम्मान पा सके। नंदन कानन पार्क के पुनर्जीवन की यह शुरुआत बागपत जिले में सुशासन की नई बयार का प्रतीक है। आज इस श्रमदान से यह भी संदेश दिया गया कि सार्वजनिक स्थलों की देखभाल सभी की जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व पंकज वर्मा, उप जिलाधिकारी बागपत अमरचंद वर्मा, ईओ केके भड़ाना सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

sbobet88

×