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श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश दिलाने के सन्दर्भ में1- 9-25-9-230 पत्र संख्या Up0825392- 6-11-2023पत्र संख्या Upo825623- 15-12-23पत्र संख्या Up 0825944- 14-6-24 पत्रांक Up0826245- 8-4-25 पत्रांक Up082736लेकिन बागपत का श्रम विभाग व डीएम महोदया हर आदेश को दाब कर बैठ जाते हैं।

इस मिली भगत से श्रमिकों को नहीं मिलता साप्ताहिक अवकाश।
इसके खिलाफ आज फीर बड़ौत श्रमिक एसोशिएशन के अध्यक्ष प्रवीण वर्मा ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को साप्ताहिक अवकाश दिलाने को पत्र लिखा।
मांग की – जो अधिकारी आदेश नहीं मानते इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं।
श्रमिकों को भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी दिलायी जाए।
बैंक से मजदूरी का भुगतान हो।
साप्ताहिक मार्केट बंदी के दिन कार्य कराने पर नियमानुसार डबल मजदूरी मिले।
सातो दिन दुकान खोलने का लाईसेंस धारकों के लाईसेंस चैक किए जाए
जो मानको पर खरे नहीं उतरते उनके सातो दिन दुकान खोलने के लाईसेंस निरस्त हो।उन पर भी साप्ताहिक मार्केट बंदी का नियम लागू हो।
सातो दिन दुकान खोलने का लाईसेंस प्राप्त दुकानों पर नौकरी करने वाले श्रमिकों को भी रूस्टर चार्ट बना कर साप्ताहिक अवकाश मिले।
काम के घंटे 12 की बजाय 9 तय किया जाए

वर्ष पांच बार
डप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लिखी चिट्ठी।
श्रमिक एसोशिएशन बड़ौत बागपत के अध्यक्ष प्रवीण वर्मा ने।
इससे पहले प्रवीण वर्मा 5 बार लिख चुके हैं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को चिट्ठी।
सब पर किए डि

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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