आयुष्मान कार्ड बनाने में बागपत प्रदेश में दूसरे स्थान पर, 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के कार्ड बनाने की गति बढ़ाने के निर्देश
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जिलाधिकारी सख्त, सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को गुणवत्ता मानकों पर खरा उतारने के निर्देश
बागपत, 31 अगस्त 2026 — जिले के लोगों को बेहतर इलाज और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक हुई। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की प्रगति को आंकड़ों के साथ परखा गया जिसमें संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अस्पताल पहुंचने वाले मरीज और गांव में रहने वाले लाभार्थी को दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सभी स्वास्थ्य सेवाओं में समयबद्धता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
आयुष्मान भारत योजना में बागपत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में 5,23,368 लक्षित लाभार्थियों के सापेक्ष 3,62,564 के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 97,933 लक्षित परिवारों में से 92,589 परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड बन चुका है। परिवारों के कार्ड बनाने में बागपत प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि लाभार्थियों के कार्ड निर्माण में जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शेष पात्र लोगों की पहचान कर उनका कार्ड बनाने का अभियान और तेज किया जाए, ताकि कोई पात्र परिवार इलाज की सुविधा से वंचित न रहे।
70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को आयुष्मान योजना से जोड़ने पर जिलाधिकारी ने विशेष जोर दिया। इस आयु वर्ग के 38,381 लक्षित वरिष्ठ नागरिकों में से 26,393 के कार्ड बनाए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष पात्र बुजुर्गों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम और आशा कार्यकर्ता पहुंचें और उनका कार्ड प्राथमिकता से बनवाएं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को योजना का लाभ दिलाने में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए। साथ ही पहचान संबंधी प्रक्रिया भी समय से पूरी कराने के निर्देश दिए।
किशोरियों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए चल रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान में भी जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों पर सख्ती दिखाई। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार 375 टीकाकरण सत्रों में 4,245 टीके लगाए गए हैं। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले विकासखंडों के चिकित्सा अधीक्षकों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में अधिक से अधिक टीकाकरण सत्र आयोजित कराने तथा पात्र किशोरियों की पहचान कर उन्हें टीकाकरण से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि अभियान का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सके।
टीबी से बचाव के अभियान में अब केवल मरीजों का उपचार ही नहीं, बल्कि उनके संपर्क में आने वाले बच्चों और अन्य पात्र लोगों को भी बीमारी से बचाने पर जोर दिया जा रहा है। जिले की 80 उच्च जोखिम वाली ग्राम पंचायतों में चल रहे अभियान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सक्रिय निगरानी और जांच बढ़ाने के निर्देश दिए। जनवरी से जुलाई 2026 तक टीबी रोगियों के संपर्क में आए बच्चों में बचावात्मक दवा देने के लिए निर्धारित 423 बच्चों के लक्ष्य के सापेक्ष सभी 423 बच्चों की पहचान की गई। इसी प्रकार एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों में टीबी से बचाव के लिए पात्र सभी 16 लोगों को चिन्हित किया गया। दोनों कार्यों में शत-प्रतिशत उपलब्धि पर जिलाधिकारी ने शेष टीबी संबंधी लक्ष्यों को भी समय से पूरा करने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की कमी न रहे, इसके लिए जिलाधिकारी ने लंबित कार्य तत्काल पूरा कराने के निर्देश दिए। जिन प्रथम संदर्भ इकाइयों में छोटे कार्य बाकी हैं, उन्हें शीघ्र पूरा कराकर चालू कराने तथा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शल्य प्रसव की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा गया। जुलाई 2026 तक जिला संयुक्त चिकित्सालय में 345 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिनौली में दो शल्य प्रसव कराए जाने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन केंद्रों पर सुविधा कमजोर है, वहां आवश्यक व्यवस्था तत्काल पूरी कराई जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े।
जननी सुरक्षा योजना के भुगतान में भी जिलाधिकारी ने तेजी लाने के निर्देश दिए। जुलाई 2026 तक 3,200 सरकारी प्रसव के सापेक्ष 2,294 लाभार्थियों को भुगतान किया गया है। कम भुगतान वाले खेकड़ा, पिलाना, जिला अस्पताल और बड़ौत क्षेत्र की प्रगति सुधारने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि प्रसव के बाद मिलने वाली सहायता के लिए महिला को इंतजार न करना पड़े। इसके लिए गर्भवती महिलाओं के बैंक खाते गर्भावस्था की जांच के समय ही खुलवाने और अभिलेखों की कमियां पहले ही दूर करने के निर्देश दिए गए।
टेली-कंसल्टेशन चिकित्सकीय परामर्श की सुविधा को भी और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में जिले में प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के स्तर पर औसतन पांच टेली-कंसल्टेशन चिकित्सकीय परामर्श दर्ज किए गए। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों की अलग से निगरानी कर संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को छोटी-छोटी चिकित्सकीय समस्याओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े, इसके लिए उपलब्ध टेली-कंसल्टेशनसुविधा का अधिक से अधिक उपयोग कराया जाए।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली सुविधा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिलाधिकारी ने सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने के निर्देश दिए। जिले में अब तक 64 गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें जिला संयुक्त चिकित्सालय के साथ 63 आयुष्मान आरोग्य मंदिर शामिल हैं। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि शेष केंद्रों में जो कमियां हैं, उन्हें चिन्हित कर तत्काल दूर कराया जाए और गुणवत्ता प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर भी मरीज को साफ-सुथरी व्यवस्था, सही जांच और भरोसेमंद इलाज मिलना चाहिए।
भ्रूण लिंग जांच पर रोक के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी और कड़ी करने के निर्देश दिए गए। जिले में 49 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं और अप्रैल 2026 से अब तक 27 निरीक्षण किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर एक केंद्र को सील किया गया है। जिलाधिकारी ने निरीक्षण की संख्या बढ़ाने तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सलाहकार समिति की बैठकें नियमित रूप से हों और हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाए।
बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में भी लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की 12 टीमों ने विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण किया। 24,924 बच्चों की जांच की गई और उपचार के लिए चिन्हित 1,008 बच्चों में से 933 बच्चों का उपचार कराया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जिन बच्चों में बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी कमी मिले, उनका उपचार बीच में न रुके और प्रत्येक चिन्हित बच्चे की नियमित निगरानी की जाए।
आशा कार्यकर्ताओं के काम की भी जिलाधिकारी ने गंभीरता से समीक्षा की। जुलाई 2026 में उनके कार्यों का श्रेणीवार मूल्यांकन किया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि हर आशा के काम की नियमित समीक्षा हो और अच्छा कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया जाए। वहीं लगातार लापरवाही या अपेक्षित प्रगति न देने वाली कार्यकर्ताओं के कार्य की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार नियोजन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय संपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों का समय से पंजीकरण कराने पर भी जिलाधिकारी ने जोर दिया। जुलाई-अगस्त 2026 में जिले में गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की उपलब्धि 93.41 प्रतिशत और बच्चों के पंजीकरण की उपलब्धि 94.47 प्रतिशत रही। जिलाधिकारी ने कम प्रगति वाले क्षेत्रों के अधिकारियों को घर-घर संपर्क बढ़ाने और शत-प्रतिशत पंजीकरण की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई गर्भवती महिला या बच्चा स्वास्थ्य विभाग की निगरानी से बाहर नहीं रहना चाहिए।
मलेरिया समेत संचारी रोगों की रोकथाम के लिए भी जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2026 में 10,861 के लक्ष्य के सापेक्ष 9,609 मलेरिया जांच की गईं। जिलाधिकारी ने शेष लक्ष्य को समय से पूरा कराने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में जांच और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव की तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त रखने को कहा गया।
परिवार कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने महिला और पुरुष नसबंदी सहित परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र दंपतियों को परिवार नियोजन के साधनों और उनके लाभ की पूरी जानकारी दी जाए तथा स्वास्थ्य कर्मी केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि परिवारों को सही परामर्श देकर उनकी सुविधा के अनुसार सेवाओं से जोड़ें। विश्व जनसंख्या पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की भी समीक्षा की गई और जागरूकता गतिविधियां लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए।
मोतियाबिंद के मरीजों को समय से इलाज दिलाने, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच बढ़ाने तथा नवजात और कुपोषित बच्चों की देखभाल को लेकर भी जिलाधिकारी ने निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस मरीज या बच्चे को उपचार की जरूरत है, उसे केवल जांच के बाद छोड़ न दिया जाए, बल्कि उपचार पूरा होने तक उसकी निगरानी की जाए। विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई और पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा किसी भी कमी पर तत्काल सुधार कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगी। अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र समय से खुलें, मरीजों को निर्धारित सेवाएं मिलें, साफ-सफाई दुरुस्त रहे, स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार शालीन और संवेदनशील हो तथा लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा कराया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक योजना की अगली समीक्षा में केवल प्रगति बताने के बजाय जमीनी परिणाम दिखना चाहिए। कम प्रगति वाले क्षेत्रों की अलग से निगरानी कर जिम्मेदारी तय करने और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ तीरथ लाल, मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी, चिकित्सा अधीक्षक, कार्यक्रम प्रभारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
सूचना विभाग, बागपत