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बागपत ::- बसौद गांव में मंगलवार को किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनु मलिक ने कहा कि किसानों की समस्या को लेकर 30 अक्तूबर को कलक्ट्रेट में पंचायत की जाएगी और फिर आंदोलन करने की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही और किसानों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। किसानों का गन्ना बकाया भुगतान तक नहीं किया जा रहा है। यदि किसान धरना-प्रदर्शन करते हैं तो उनपर मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। ऊर्जा निगम भी छापामार कार्रवाई कर किसानों का उत्पीड़न कर रहा है और जबरन स्मार्ट मीटर लगाकर किसानों को परेशान करने का कार्य किया जा रहा। राष्ट्रीय विधिक सलाहकार अवध प्रताप सिसौदिया ने कहा कि वर्तमान सरकार उद्योपतियों की सरकार है। जिलाध्यक्ष कालूराम हिलवाड़ी ने कहा कि गन्ना मूल्य कम से कम 500 रुपये निर्धारित होना चाहिए। बताया कि 30 अक्तूबर को कलक्ट्रेट में होने वाले किसान बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. पूरण सिंह शामिल होंगे।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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