कश्यप निषाद मांझी समाज के गौरव परम श्रद्धेय द माउंटेन मैन दशरथ मांझी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलि
दशरथ मांझी जी सा ज़िद्दी कठोर और संघर्षशील आदमी की धरती पर आज तक पैदा नहीं उसने अपने 22 साल की कठोर मेहनत के दम पर एक एक पत्थर को छैनी से तोड़कर गांव वालों के लिए रास्ता बनाएं था ज्ञात हो कि दशरथ मांझी जी की पत्नी बहुत बीमार हो गईतीज आस पास कोई अस्पताल नहीं था तथा अस्पताल में ले जाने के लिए बहुत दूर से होकर जाना पड़ता था दशरथ मांझी जब अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने लगे तो क रास्ते में ही मौत हो गई इससे उन्हें बहुत दुख हुआ तब उन्होंने प्रण लिया कि आगे भविष्य में कोई भी आदमी दूर अस्पताल पहुंचने के कारण नहीं मरेगा तब उन्होंने अपने 22 साल की कठोर मेहनत से गांव वालों के लिए पत्थर का सीना चीरकर रास्ता बनाया था आज दशरथ मांझी जी पूरे देश में पर्वत पुरुष यानी माउंटेन मैन के नाम से जाने जाते हैं ऐसी दिवंगत आत्मा के चरणो में कोटि-कोटि नमन 🙏💐🌹💫
बागपत, 16 अगस्त 2025 –कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज जनपद की गौशालाओं में विधि-विधानपूर्वक गौ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गौमाता की आरती उतारी, पुष्प अर्पित किए तथा परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना कर गौसेवा का संकल्प लिया।
बागपत, 16 अगस्त 2025 –
कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज जनपद की गौशालाओं में विधि-विधानपूर्वक गौ पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गौमाता की आरती उतारी, पुष्प अर्पित किए तथा परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना कर गौसेवा का संकल्प लिया।

जिलाधिकारी की पहल पर बेजुबान जानवरों को मिलेगी रेबीज से राहत, जनपद में शुरू होगा व्यापक अभियान
जनपद के सभी पशु चिकित्सालयों पर रेबीज की रोकथाम के लिए चलेगा जानवरों का टीकाकरण कैंप
रेबीज उन्मूलन के लिए विशेष अभियान 18 अगस्त से होगा शुरू, कुत्ते, श्वान आदि का होगा एंटी रेबीज टीकाकरण
जनपद में रेबीज रोकथाम के लिए बड़ा कदम, बेजुबान जानवरों को मिलेगा एंटी रेबीज का जीवनरक्षक टीका
लक्षण पहचानने में देर न करें, तुरंत टीका लगवाएं — रेबीज से बच सकती है आपके पालतू पशु की जान
बागपत, 17 अगस्त 2025 — जीव-जंतुओं के प्रति करुणा, पर्यावरणीय संतुलन की रक्षा और स्वस्थ समाज निर्माण की भावना को साकार करने हेतु, जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा रेबीज की रोकथाम के लिए 18 अगस्त को पशु चिकित्सालय बागपत से पालतू पशुओं के लिए एक सघन और व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा जिसके अंतर्गत जिलेभर में पशु चिकित्सालयों पर विशेष टीकाकरण कैंप लगाए जाएंगे।
यह पहल न केवल जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51(ए)(जी) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक के मूल कर्तव्य — “प्राकृतिक पर्यावरण, जिसमें वन्य जीव शामिल हैं, का संरक्षण और सुधार करना तथा जीव-जंतुओं के प्रति करुणा रखना” की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति भी है।
अभियान के अंतर्गत जनपद के 33 पशु चिकित्सालयों में पालतू पशुओं जैसे कुत्ता, श्वान पालतू बिल्ली आदि का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। वर्तमान में इन चिकित्सालयों में 1100 डोज उपलब्ध हैं, जिससे अधिक से अधिक पालतू पशुओं को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। वैक्सीनेशन नोडल अधिकारी डॉ. राजकुमार रावत को नियुक्त किया गया है। कुत्ते एवं श्वान के टीकाकरण से संबंधित किसी भी जानकारी हेतु 9458240723 पर संपर्क किया जा सकता है।
रेबीज एक घातक वायरल बीमारी है, जो न केवल मनुष्यों बल्कि जानवरों के लिए भी लगभग 100% घातक होती है। यह वायरस जानवरों और मनुष्यों, दोनों के तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है और मस्तिष्क में सूजन पैदा करता है। एक बार लक्षण प्रकट हो जाने के बाद इसका कोई इलाज संभव नहीं है, और पीड़ित की मृत्यु निश्चित होती है। यही कारण है कि समय पर और नियमित टीकाकरण ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में 99% से अधिक रेबीज संक्रमण के मामले कुत्तों के काटने से होते हैं। संक्रमित लार के माध्यम से यह वायरस काटने, खरोंचने या खुले घाव, आंख, नाक या मुंह की श्लेष्म झिल्ली पर लगने से फैलता है। यह संक्रमण सभी स्तनधारी जीवों में हो सकता है। इस अभियान के माध्यम से उन बेजुबान जानवरों के जीवन की रक्षा की जाएगी, जो रेबीज वायरस के कारण असमय मृत्यु का शिकार हो जाते हैं।
जानवरों में इसके लक्षणों में अचानक व्यवहार में बदलाव, अत्यधिक आक्रामकता या असामान्य शांति, भूख न लगना, पानी पीने में डर (हाइड्रोफोबिया), अत्यधिक लार टपकना, चलने में कठिनाई, दौरे पड़ना और लकवा शामिल हैं। लक्षण प्रकट होने के बाद अधिकांश जानवर 7 से 10 दिनों के भीतर मर जाते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि “लक्षण आने के बाद इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज संभव नहीं है, इसलिए समय पर रोकथाम ही एकमात्र प्रभावी उपाय है।” पालतू जानवरों में 3 माह की उम्र के बाद पहला टीका और उसके बाद हर साल बूस्टर डोज लगवाना आवश्यक है।
यह अभियान केवल रोग-निवारण नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश भी देता है। संविधान हमें यह स्मरण कराता है कि जीव-जंतु हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा में योगदान देना हमारा नैतिक, सामाजिक और संवैधानिक कर्तव्य है। जब हम अपने पालतू जानवरों को टीका लगवाते हैं, तो हम न केवल उन्हें एक घातक बीमारी से बचाते हैं, बल्कि मानव समाज को भी संभावित संक्रमण से सुरक्षित करते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि “हमारे समाज की सभ्यता का स्तर इस बात से मापा जा सकता है कि हम अपने से कमजोर और निर्भर प्राणियों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। यह अभियान बागपत को न केवल रेबीज-मुक्त बनाएगा, बल्कि एक मानवीय और जिम्मेदार समुदाय के रूप में पहचान भी देगा।”
जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराएं और इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह पहल बागपत के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है कि कैसे हम सार्वजनिक स्वास्थ्य, पशु कल्याण और संवैधानिक मूल्यों को एक साथ जोड़ सकते हैं।
सूचना विभाग, बागपत
ब्रेकिंग न्यूज़ – छपरौली
👉 थाना क्षेत्र के टांडा गांव स्थित दारूल उलूम मुजफ्फरीया लिल बनात मदरसे में उस समय सनसनी फैल गई जब 11 महीने के मासूम का शव संदिग्ध हालात में बरामद हुआ।
👉 शव कपड़े में लिपटा हुआ बिस्तर के अंदर मिला।
👉 मृतक बच्चे को मदरसे के संचालक मुफ्ती शहजाद पुत्र सुलेमान त्यागी ने गोद लिया था।
👉 पुलिस ने मौके पर पहुंचकर CCTV फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है।
👉 शक के आधार पर पुलिस ने मदरसे में रह रही एक नाबालिग लड़की को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
👉 बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
🛑 घटना से गांव और आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पुलिस मामले की हर एंगल से जांच में जुटी है।
2025 में Java, MERN और MEAN स्टैक का बाज़ार और ट्रेंड
Java, MERN और MEAN स्टैक: 2025 में बाज़ार का हाल
वेब डेवेलपमेंट और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में तीन प्रमुख तकनीकी स्टैक्स—Java Full Stack, MERN और MEAN—आजकल बेहद चर्चा में हैं। इनका बाजार में कौन सा हिस्सा है और किसकी मांग सबसे अधिक है? आइए जानते हैं:
1. Java Full Stack
- उपयोग: Java Full Stack (Java + Springboot, Hibernate आदि) ज्यादातर बड़ी कंपनियों, बैंकिंग, फाइनेंस, हेल्थ केयर और एंटरप्राइज लेवल एप्लिकेशन के लिए सबसे ज्यादा पसंद की जाती है।
- मार्केट शेयर: Java स्टैक लंबे समय से इंडस्ट्री में अग्रणी रहा है, खासकर बड़ी IT कंपनियों (जैसे TCS, Infosys)। इसका वर्चस्व 2025 में भी बरकरार है, लेकिन MERN/MEAN की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
- जॉब मार्केट: बिग टेक और बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए Java का स्कोप जबरदस्त है।
2. MERN Stack (MongoDB, Express.js, React, Node.js)
- ट्रेंड: MERN स्टैक 2025 में स्टार्टअप्स, मिड-साइज़ कंपनियों और डाइनैमिक वेब एप्लिकेशन्स के लिए “go-to choice” बनी हुई है।
- मार्केट शेयर: MERN डेवलपर्स की मांग हर साल बढ़ रही है। JavaScript आधारित होने के कारण डेवलपमेंट, डिप्लॉयमेंट और स्किल्स का सीखना आसान है।
- जॉब मार्केट: MERN के लिए डेवलपर डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है। खासकर रियल-टाइम, यूज़र-इंटरएक्टिव और मोबाईल + वेब ऐप्स वाले प्रोजेक्ट्स में इसकी मांग अधिक है।
3. MEAN Stack (MongoDB, Express.js, Angular, Node.js)
- ट्रेंड: MEAN स्टैक का उपयोग बड़े स्केल के एंटरप्राइज एप्लिकेशन्स, क्लाउड-नेटिव और रियलटाइम ऐप्स के लिए किया जाता है।
- मार्केट शेयर: 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, Angular आधारित MEAN स्टैक का उपयोग कंपनियों में लगभग 16% सालाना ग्रोथ के साथ बढ़ रहा है।
- जॉब मार्केट: MEAN स्टैक का डिमांड भी बहुत अच्छी है, खासकर एंटरप्राइज़ स्तर की जटिल वेब ऐप्लिकेशन बनाने के लिए।
तुलना तालिका
| स्टैक | मुख्य उपयोग | मार्केट शेयर/ट्रेंड | जॉब मार्केट |
|---|---|---|---|
| Java Full Stack | बड़े प्रोजेक्ट, बैंकिंग, एंटरप्राइज | इंडस्ट्री में स्थिर, बड़े IT कंपनियों में अग्रणी | बड़ी कंपनियों में उच्च मांग |
| MERN Stack | स्टार्टअप, मिड-साइज़ कंपनी, स्पा/मोबाइल ऐप | तेजी से बढ़ती लोकप्रियता, खासकर यूजर-फोकस्ड एप्लिकेशन में | हर साल डिमांड बढ़ रही |
| MEAN Stack | एंटरप्राइज, रियलटाइम, क्लाउड-नेटिव | Angular के साथ 16% सालाना ग्रोथ | एंटरप्राइज प्रोजेक्ट में अच्छी मांग |
निष्कर्ष:
Java Full Stack अभी भी “enterprise” इंडस्ट्री में अग्रणी है, लेकिन MERN और MEAN stack, अपनी Flexibility, Scalability और आसान सीखने की वजह से तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। खासकर स्टार्टअप्स और नए प्रोजेक्ट्स में MERN सबसे आगे है। MEAN भी अपने एंटरप्राइज फीचर्स की वजह से बाजार में मजबूती बनाए हुए है।
अगर आप वेब डेवलपमेंट में करियर बनाना चाहते हैं तो इन तीनों स्टैक्स में से किसी एक को चुनना आपके प्रोजेक्ट और करियर की आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।
तीन दिन की जंग के बाद टूटा प्रशासन का घमंड, शिक्षक अपमान कांड में दर्ज हुआ मुकदमा
श्यामलाल निषाद की रणनीति ने तोड़ी पुलिस की चुप्पी, FIR दर्ज, वीडियो से होगी पहचान
Viral सुलतानपुर। जिले के धनपतगंज थानाक्षेत्र के समरथपुर के बेसिक शिक्षक ओम प्रकाश का अपमान हुआ। उन्हें जबरन नाक रगड़वाकर बेइज्जत किया गया, लेकिन पुलिस-प्रशासन डेढ़ महीने तक आंख मूंदे बैठा रहा। आरोपियों को बचाने में जुटा तंत्र न तो FIR दर्ज कर पाया, न ही पीड़ित को बहाल किया।
हालात तब बदले जब मोस्ट कल्याण संस्थान मैदान में उतरा। संगठन श्यामलाल निषाद गुरूजी और रिटायर्ड नेवी ऑफिसर राम उजागिर यादव के नेतृत्व में तिकोनिया पार्क में तीन दिन तक डटे सत्याग्रहियों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी। नारे गूंजे— “सम्मान नहीं तो आंदोलन” और “शिक्षक का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान”। लगातार जनदबाव, मीडिया की निगाह और मोस्ट के संघर्ष के आगे गुरुवार को प्रशासन ने घुटने टेक दिए। बीएसए का लिखित कथन सौंपा गया, जिसमें बहाली और आरोपियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। साथ ही पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर वायरल वीडियो से पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी। मोस्ट नेताओं ने चेताया “यह तो बस शुरुआत है। अगर वादे पूरे न हुए तो आंदोलन और भी उग्र होगा।” आज जनपद में चर्चा का विषय यही है मोस्ट का संघर्ष और श्यामलाल निषाद की रणनीति ने पुलिस को मजबूर कर दिया।
राजेश भीम (अम्बेकरवादी चिंतक)
मो.9648141548
AI के युग में खतरे में पड़े कौशल और भविष्य में कैसे बनाएं अपनी जगह
AI की वजह से कौन-कौन से कौशल खतरे में हैं और हमें क्या करना चाहिए?
हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी दुनिया में क्रांति ला दी है। AI तकनीक ने कई क्षेत्रों में तेजी से काम करने के तरीके बदल दिए हैं। लेकिन साथ ही इसके कारण कुछ पारंपरिक कौशलों को खतरा भी है।
कौन-कौन से कौशल खतरे में हैं?
AI के आगमन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कौशल वे हैं जो रूटीन, दोहराए जाने वाले और नियम आधारित कार्यों से जुड़े हैं। जैसे:
- डेटा एंट्री और मासूमनाल काम
- बुनियादी गणना और रिपोर्टिंग
- ग्राहक सेवा के सामान्य और दोहराए जाने वाले कार्य
- ट्रांसलेशन कार्य (जहां AI बेहतर भाषा अनुवाद कर सकता है)
- फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग के कुछ मैनुअल काम
इसके अलावा, कुछ ऐसे कौशल जहाँ कम जोखिम है, वे हैं:
- रचनात्मक सोच और समस्या समाधान
- भावनात्मक बुद्धिमत्ता और मानव संपर्क
- रणनीतिक योजना और जटिल निर्णय लेना
AI के खतरों से निपटने के लिए क्या करना चाहिए?
- नए कौशल सीखें: AI के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तकनीकी, डिजिटल और विश्लेषणात्मक कौशल सीखना जरूरी है।
- निरंतर शिक्षा और ट्रेनिंग: जीवनभर सीखने के लिए तैयार रहें। समय के साथ अपने कौशल को अपडेट करें।
- क्रिएटिव और सॉफ्ट स्किल्स पर ध्यान दें: उन कौशलों को विकसित करें जो मशीनें आसानी से नकल नहीं कर सकतीं जैसे कि नेतृत्व, सहानुभूति, और नवाचार।
- AI को अपनाएं: इसे अपने काम का हिस्सा बनाएं और उससे सहयोग कर बेहतर परिणाम हासिल करें।
- व्यक्तिगत और प्रगतिशील सोच: उद्योग के बदलावों और तकनीक के विकास के साथ खुद को ढालना आवश्यक है।
निष्कर्ष:
AI तकनीक हमारे काम करने के तरीके बदल रही है। कुछ पारंपरिक कौशलों को खतरा है, लेकिन नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। बेहतर होगा कि हम AI के साथ तालमेल बैठाएं और खुद को लगातार विकसित करते रहें ताकि आने वाले भविष्य में मजबूत और सामना करने योग्य बन सकें।
