कश्यप निषाद मांझी समाज के गौरव परम श्रद्धेय द माउंटेन मैन दशरथ मांझी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलिदशरथ मांझी जी सा ज़िद्दी कठोर और संघर्षशील आदमी की धरती पर आज तक पैदा नहीं उसने अपने 22 साल की कठोर मेहनत के दम पर एक एक पत्थर को छैनी से तोड़कर गांव वालों के लिए रास्ता बनाएं था ज्ञात हो कि दशरथ मांझी जी की पत्नी बहुत बीमार हो गईतीज आस पास कोई अस्पताल नहीं था तथा अस्पताल में ले जाने के लिए बहुत दूर से होकर जाना पड़ता था दशरथ मांझी जब अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने लगे तो क रास्ते में ही मौत हो गई इससे उन्हें बहुत दुख हुआ तब उन्होंने प्रण लिया कि आगे भविष्य में कोई भी आदमी दूर अस्पताल पहुंचने के कारण नहीं मरेगा तब उन्होंने अपने 22 साल की कठोर मेहनत से गांव वालों के लिए पत्थर का सीना चीरकर रास्ता बनाया था आज दशरथ मांझी जी पूरे देश में पर्वत पुरुष यानी माउंटेन मैन के नाम से जाने जाते हैं ऐसी दिवंगत आत्मा के चरणो में कोटि-कोटि नमन 🙏💐🌹💫

subhashchand4

Bysubhashchand4

Aug 17, 2025
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कश्यप निषाद मांझी समाज के गौरव परम श्रद्धेय द माउंटेन मैन दशरथ मांझी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन विनम्र श्रद्धांजलि
दशरथ मांझी जी सा ज़िद्दी कठोर और संघर्षशील आदमी की धरती पर आज तक पैदा नहीं उसने अपने 22 साल की कठोर मेहनत के दम पर एक एक पत्थर को छैनी से तोड़कर गांव वालों के लिए रास्ता बनाएं था ज्ञात हो कि दशरथ मांझी जी की पत्नी बहुत बीमार हो गईतीज आस पास कोई अस्पताल नहीं था तथा अस्पताल में ले जाने के लिए बहुत दूर से होकर जाना पड़ता था दशरथ मांझी जब अपनी पत्नी को अस्पताल ले जाने लगे तो क रास्ते में ही मौत हो गई इससे उन्हें बहुत दुख हुआ तब उन्होंने प्रण लिया कि आगे भविष्य में कोई भी आदमी दूर अस्पताल पहुंचने के कारण नहीं मरेगा तब उन्होंने अपने 22 साल की कठोर मेहनत से गांव वालों के लिए पत्थर का सीना चीरकर रास्ता बनाया था आज दशरथ मांझी जी पूरे देश में पर्वत पुरुष यानी माउंटेन मैन के नाम से जाने जाते हैं ऐसी दिवंगत आत्मा के चरणो में कोटि-कोटि नमन 🙏💐🌹💫

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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