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दोस्तो / साथियों,

मैं आप सभी से एक सवाल पूछना चाहता हूँ। उम्मीद है कि हर सदस्य बिना किसी संकोच के अपने विचार और तर्क अवश्य साझा करेगा।

हमने 20 फ़रवरी 2023 से मार्च 2024 तक OROP, ECHS और पूर्व सैनिकों की अन्य समस्याओं को लेकर जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया। बीच में आंदोलन दो हिस्सों में बँट गया, लेकिन आंदोलन चलता रहा। हमें 24 घंटे की भी अनुमति नहीं मिली हर रोज़ अनुमति लेनी पड़ती थी हमारे आंदोलन में कोई प्रतिष्ठित , सामाजिक लोग महत्वपूर्ण संगठन नही आए, और व्यापक स्तर पर समर्थन नहीं मिला।

वर्तमान में CJP (कोकरेच जनता पार्टी) का आंदोलन चल रहा है, जिसे स्थायी Permanentअनुमति प्राप्त है*। देश के विभिन्न हिस्सों से सामाजिक संगठन, कलाकार, गायक और अन्य लोग खुलकर उनके समर्थन में पहुँच रहे हैं।

मेरा प्रश्न यह है कि ऐसा अंतर क्यों है?
हमारे आंदोलन को वैसा सामाजिक समर्थन क्यों नहीं मिला? क्या कारण रहे कि समाज, विभिन्न संगठन और प्रभावशाली लोग हमारे साथ उस स्तर पर नहीं जुड़े?

क्या देश और समाज को पूर्व सैनिकों की आवश्यकता केवल सीमाओं पर बलिदान देने और अपने प्राण न्योछावर करने तक ही सीमित है, या फिर हमारे अधिकारों और सम्मान की लड़ाई में भी समाज को हमारे साथ खड़ा होना चाहिए?

मैं चाहता हूँ कि हर सदस्य इस विषय पर अपने विचार, अनुभव और तर्क अवश्य रखे। कृपया इस प्रश्न को गंभीरता से लें और ईमानदारी से अपनी बात रखें। केवल पढ़कर आगे न बढ़ें।

धन्यवाद।

सुरेन्द्र पहलवान
संस्थापक
राष्ट्रीय पूर्व सैनिक संगठन

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