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बागपत 12 सितंबर 2025 —जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशों के क्रम में आज कलेक्‍ट्रेट परिसर में फैमिली आई0डी0 बनाने हेतु एक दिवसीय कैम्‍प का आयोजन किया गया। कैम्‍प का शुभारम्‍भ श्री मनीष कुमार यादव, प्रभारी अधिकारी कलेक्‍ट्रेट-प्रथम द्वारा किया गया, जिसमें मौके पर श्री नन्‍दकिशोर, ई-डिस्ट्रिक्‍ट मैनेजर, कलेक्‍ट्रेट बागपत एवं अन्‍य कर्मचारीगण उपस्थित रहें। उक्‍त कैम्‍प में लगभग 30 कर्मचारियों का फैमिली आईडी बनवाने हेतु आवेदन किया गया तथा लगभग 06 कर्मचारियों द्वारा पूर्व से बनी अपनी फैमिली आई0डी0 में संशोधन कराया गया है।
श्री नन्‍दकिशोर, ई-डिस्ट्रिक्‍ट मैनेजर, कलेक्‍ट्रेट बागपत द्वारा बताया गया कि अब दिनांक 15 एवं 16.09.2025 विकास भवन में भी फैमिली आई०डी० बनाये जाने हेतु स्‍थानीय जनसेवा केन्‍द्र के माध्‍यम से दो दिवसीय कैम्‍प का आयोजन किया जायेगा, जिसमें विकास भवन के कर्मचारियों के अतिरिक्‍त आम जनमानस का भी फैमिली आई0डी0 बनवाने हेतु आवेदन किया जा सकेगा।

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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