अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती के शुभ अवसर पर देश की जनता को ढेर सारी शुभकामनायेंदोस्तो परशुराम नें अत्याचारियों और व्यवचारियों का जिस प्रकार से नाश किया आज फिर समय आ गया है सत्ता में बैठे शासकों को राजधर्म समझाने कादोस्तो मोदीजी और उनके मंत्री महिलाओं के विधेयक को लेकर शोर मचा रहे हैं लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि 2023 में संसद में महिला आरक्षण बिधेयक पास हो चुका है इस विधेयक को लागू करो इसे लागू नहीं करेंगे और महिलाओं के नाम पर शोर मचा रहे हैं महिलाओं के प्रति मोदीजी कितना सम्मान रखते हैं 12 साल के शासन में देश और दुनिया नें देखा है मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त करके घुमाया गया लेकिन मोदीजी नें एक शव्द नहीं कहा व्रजभूषण सिंह के विरोध में तो देश की महिला खिलाडी जंतर मंतर पर धरने में बैठी लेकिन मोदीजी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा गुजरात में तो वालात्कारियों का माला पहिना कर स्वागत किया गया और अगर मोदी सरकार में कितने मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ बलात्कार के केस दर्ज है बिहार के मुख्यमंत्री पर तो रेप और हत्या तक के केस हैंदोस्तो ऐसी पार्टी विरोध कर रही है कांग्रेस कादोस्तो असल में खेल कुछ और था मोदीजी को परिसिमन विल पास कराना था मोदीजी सांसदों की संख्या 543 से बढ़ा कर 850 करने बाले थे मोदीजी को यह चिंता नहीं है इससे देश के खजाने पर कितना बोझ पड़ेगादोस्तो हम भारत सरकार के साथ देश के तमाम अर्थशास्त्रीयों से कहते हैं अभी जो सांसद बिधायक मंत्री प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री हैं उनको सरकारी खजाने से कितना धन दिया जाता है इनको कितनी पेंशन दी जाती है विस्तार से देश को बताएंदोस्तो आज के नेताओं को देश और देश की चिंता नहीं है इनको चिंता अपनी है अपने कारपोरेट मित्रों की हैदोस्तो मोदीजी परिसिमन करके सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने की चिंता है क्या मोदीजी को यह भी जानकारी है देश के सरकारी बिभागों में बही स्तिथि है जो आजादी के समय थी या कुछ बड़ा दी गई थी लेकिन आज की जनसंख्या के आधार पर सरकारी बिभागों में कितने कर्मचारी चाहिए इस जनसंख्या को संभालने के लिए कभी मोदीजी इस पर चर्चा करते हैंदोस्तो मोदीजी को केबल सत्ता की चिंता रहती है सत्ता में रहकर देश की सम्पत्तियों को किस प्रकार से अपने कारपोरेट मित्रों के हबाले किया जाएकिस प्रकार से धन एकत्र किया जायदेश की व्यवस्था को किस प्रकार से ठीक किया जायइसकी चिंता मोदीजी को नहीं हैदोस्तो देश की व्यवस्था को ठीक करना है तो मोदी सरकार BJP RSS को देश की राजनीती से बाहर करना होगाइसके लिए उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट से 17 अगस्त 26 को शुरू होगा कांग्रेस का आंदोलनधन्यवादआपका अपना विनोद साथीजिला उपाध्यक्षसंभल कांग्रेस उ.प्र.जिला संयोजकठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवारसंभल8791674785 9720026990 wजय हिन्द जय भारत जय कांग्रेस

subhashchand4

Bysubhashchand4

Apr 19, 2026
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अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती के शुभ अवसर पर देश की जनता को ढेर सारी शुभकामनायें
दोस्तो परशुराम नें अत्याचारियों और व्यवचारियों का जिस प्रकार से नाश किया आज फिर समय आ गया है सत्ता में बैठे शासकों को राजधर्म समझाने का
दोस्तो मोदीजी और उनके मंत्री महिलाओं के विधेयक को लेकर शोर मचा रहे हैं लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि 2023 में संसद में महिला आरक्षण बिधेयक पास हो चुका है इस विधेयक को लागू करो इसे लागू नहीं करेंगे और महिलाओं के नाम पर शोर मचा रहे हैं महिलाओं के प्रति मोदीजी कितना सम्मान रखते हैं 12 साल के शासन में देश और दुनिया नें देखा है मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त करके घुमाया गया लेकिन मोदीजी नें एक शव्द नहीं कहा व्रजभूषण सिंह के विरोध में तो देश की महिला खिलाडी जंतर मंतर पर धरने में बैठी लेकिन मोदीजी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा गुजरात में तो वालात्कारियों का माला पहिना कर स्वागत किया गया और अगर मोदी सरकार में कितने मंत्रियों और सांसदों के खिलाफ बलात्कार के केस दर्ज है बिहार के मुख्यमंत्री पर तो रेप और हत्या तक के केस हैं
दोस्तो ऐसी पार्टी विरोध कर रही है कांग्रेस का
दोस्तो असल में खेल कुछ और था मोदीजी को परिसिमन विल पास कराना था मोदीजी सांसदों की संख्या 543 से बढ़ा कर 850 करने बाले थे मोदीजी को यह चिंता नहीं है इससे देश के खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा
दोस्तो हम भारत सरकार के साथ देश के तमाम अर्थशास्त्रीयों से कहते हैं अभी जो सांसद बिधायक मंत्री प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री हैं उनको सरकारी खजाने से कितना धन दिया जाता है इनको कितनी पेंशन दी जाती है विस्तार से देश को बताएं
दोस्तो आज के नेताओं को देश और देश की चिंता नहीं है इनको चिंता अपनी है अपने कारपोरेट मित्रों की है
दोस्तो मोदीजी परिसिमन करके सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने की चिंता है क्या मोदीजी को यह भी जानकारी है देश के सरकारी बिभागों में बही स्तिथि है जो आजादी के समय थी या कुछ बड़ा दी गई थी लेकिन आज की जनसंख्या के आधार पर सरकारी बिभागों में कितने कर्मचारी चाहिए इस जनसंख्या को संभालने के लिए कभी मोदीजी इस पर चर्चा करते हैं
दोस्तो मोदीजी को केबल सत्ता की चिंता रहती है सत्ता में रहकर देश की सम्पत्तियों को किस प्रकार से अपने कारपोरेट मित्रों के हबाले किया जाए
किस प्रकार से धन एकत्र किया जाय
देश की व्यवस्था को किस प्रकार से ठीक किया जाय
इसकी चिंता मोदीजी को नहीं है
दोस्तो देश की व्यवस्था को ठीक करना है तो मोदी सरकार BJP RSS को देश की राजनीती से बाहर करना होगा
इसके लिए उ.प्र. के संभल कलेक्ट्रेट से 17 अगस्त 26 को शुरू होगा कांग्रेस का आंदोलन
धन्यवाद
आपका अपना विनोद साथी
जिला उपाध्यक्ष
संभल कांग्रेस उ.प्र.
जिला संयोजक
ठगी पीड़ित जमाकर्ता परिवार
संभल
8791674785 9720026990 w
जय हिन्द जय भारत जय कांग्रेस

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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