Spread the love

543 सांसद कम पड़ रहे है देश की जनता के टैक्स का पैसा लूटने में , जो अब इनकी संख्या 850 की जा रही है मै महिलाओं के 33% आरक्षण के समर्थन में हूँ , लेकिन उनको ये 33% , 543 सीटो में से दे दीजिए

850 लोकसभा सीट करके कौन देश की आर्थिक स्थिति पर बोझ डाला जा रहा है सारी सैलरी भत्ते फंड यात्राएं , दैनिक भत्ते , फोन , मेडिकल सुविधा मिलाकर 5 लाख रुपया हर सांसद प्रति महीने देश के खजाने से लूट रहा है

काम जीरो , रिस्पॉनबल्टी जीरो , ऊपर से इनको Y+ सिक्योरिटी और विकास कार्यों में से कमीशन भी मिलता है चारों और से देश को लुटा जा रहा है ।

एक सांसद का नाम बताओ जिसने पिछले 5 सालों में
लोकसभा में खड़ा होकर कोई स्कूल कॉलेज
यूनिवर्सिटी ,स्टेडियम, हॉस्पिटल ,पी.जी.आई. ,एम्स की बात की हो तो

अब सांसद 543 से 850 होंगे , उसके बाद
विधायकों की संख्या तो सीधे सीधे 2 से 3 हजार बढ़ेगी , कितना ज्यादा रुपया इनकी सैलरी और सिक्योरिटी में जाएगा देश का विचार कीजिए

और इस 33% में कोई भी गरीब मजदूर किसान या मध्यम वर्ग की महिलाएं सांसद नहीं चुनी जाएगी ,
चुनी जाएगी कंगना जैसी , जया बच्चन , स्मृति ईरानी , हेमा मालिनी जैसी

आपको महिलाओं की इतनी चिंता है तो कृपा करके यूपीएससी की सीट
CGL की सीट
CHCL की सीट
MTS की सीट
CPO की सीट
MBBS की सीट
IIT की सीट
IIM की सीट में भी महिलाओं को 33 नहीं सीधे 50% दे दीजिए लेकिन नहीं कर पाओगे आप लोग ये

20 राज्यों में कमोबेश भाजपा की सरकार है और महिला मुख्यमंत्री मात्र 1 है कौन-से मान सम्मान की बात की जा रही है समझ में नहीं आ रहा है

ये सीटे बढ़ाकर तो आप अपना राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हो और देश की जनता पर बोझ डाल रहे हो

महिलाओं का 33% आरक्षण इन 543 सीटों में भी दिया जा सकता है !

लेकिन नहीं हमें तो अनंतकाल तक स त्ता हथियाना है 🥴🧘

देश का सबसे घिनौना चेहरा 👇

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

sbobet88

×