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महिला आरक्षण बिल की आड मे (महिलाओ का इस्तेमाल करने का एक और प्रयास)
परिसीमन क्यो ?
जबकी महिला आरक्षण और परिसीमन दोनो ही बहुत बहुत अलग विषय है।
महिला आरक्षण विधेयक मे संसोधन के लिए बुलाया गया विशेष सत्र बुलाना,
कुछ और नही बल्कि भारत की जनता को गुमराह करना व भारत की आम जनता का इन निम्न मुद्दो से ध्यान भटकाया है।
1) एप्स्टीन फाईल मे मोदी हरदीप पुरी अनिल अम्बानी आदि का नाम आना,
2) ईरान-इज़राइल-अमरीका युद्ध की मध्यस्थता मे विफलता,
3) मोदी की कूटनीती हर स्तर पर विफल,
4) पाच राज्यो मे चुनाव मे बेईमानी करने के लिए,

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घड़ियालों आँसू बहाने के बजाय भाजपा पहले अपने संगठन मे पचास प्रतिशत पद दे और चुनाव मे पचास प्रतिशत टिकट महिलाओं को दे ।पचास प्रतिशत महिला आबादी को तैतीस प्रतिशत आरक्षण का फ़ार्मूला पता नहीं कहाँ से आया वास्तव मे ये पचास प्रतिशत होना चाहिए ।।इसके लिए भाजपा को टींएमसी से सीख लेनी चाहिए ममता बनर्जी की पार्टी में लगभग चालीस प्रतिशत सांसद महिला है बिना किसी आरक्षण के ।इसे कहा जाता है सही और साफ नीयत ।महिलाओं की भागीदारी नीयत से बढ़ेगी आरक्षण लागू हो भी गया और नीयत साफ न हुई तो यह आरक्षण केवल झुनझुना रह जाएगा ठीक वैसे ही जैसे दलितों के लिए और पिछड़ों के लिए आरक्षण है लेकिन उनके लिए आरक्षित सीट कोई न कोई बहाना मिलाकर खाली रखा जाता है इसलिए नीयत ज़्यादा महत्वपूर्ण है ।

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