साफ-सफाई, जागरूकता और सामूहिक प्रयास—इन्हीं तीन मंत्रों से सफल होगा यह अभियान और सुरक्षित रहेगा हर परिवार।
सभी विभाग निभाएंगे जिम्मेदारी: हर मरीज की होगी पहचान, घर-घर दस्तक देगी टीम
मिशन मोड में संचारी रोगों से मुक्ति की ओर बढ़ेगा बागपत, जिलाधिकारी ने जारी किए निर्देश
बागपत 01 अप्रैल 2026 — प्रदेश में बढ़ते तापमान और मौसम परिवर्तन के बीच संक्रामक रोगों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर पहल करते हुए अप्रैल माह में ‘विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान और 10 अप्रैल से 30 अप्रैल तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी अस्मिता लाल द्वारा जारी विस्तृत निर्देशों में इसे प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है और सभी विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागपत से आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर तीरथ लाल द्वारा हरी झंड़ी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया गया।
इस व्यापक अभियान का उद्देश्य केवल बीमारियों का इलाज नहीं, बल्कि उनके स्रोत पर रोक लगाना, जन-जागरूकता बढ़ाना और समाज में व्यवहार परिवर्तन लाना है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी इसे बहु-विभागीय अभियान के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें स्वास्थ्य, नगर विकास, ग्राम्य विकास, शिक्षा, पशुपालन, बाल विकास, कृषि, सूचना और अन्य विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
आज से शुरू हुआ यह अभियान प्रदेश के हर गांव, हर शहर और हर घर तक पहुंचेगा। खास बात यह है कि इस बार अभियान को और अधिक तकनीकी और डिजिटल बनाया गया है। फ्रंटलाइन वर्कर्स जैसे आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर न केवल सर्वे करेंगी, बल्कि ई-कवच पोर्टल पर डिजिटल डेटा भी अपलोड करेंगी, जिससे रोगियों की पहचान और उपचार में तेजी लाई जा सके।
इस अभियान में विशेष रूप से मच्छरजनित रोगों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, दिमागी बुखार (AES/JE), जलजनित रोगों और गर्मी से संबंधित बीमारियों (हीट रिलेटेड इलनेस) पर फोकस किया गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों के अनुसार इस वर्ष गर्मी अधिक रहने की संभावना है, जिससे इन बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।
अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव और शहरी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। संक्रमित व्यक्तियों की पहचान, उनकी जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही वेक्टर सर्विलांस यानी मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर उन्हें नष्ट करने की कार्रवाई भी तेज की जाएगी। इसके लिए हाई रिस्क क्षेत्रों की सूची तैयार की जा रही है, जहां विशेष अभियान चलाया जाएगा।
दस्तक अभियान इस पूरे कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी। वे लोगों को बताएंगी कि बीमारियों से बचाव कैसे करें, कौन से लक्षण खतरनाक हैं और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। दस्तक का मतलब ही है ‘दरवाजा खटखटाना’, यानी हर घर तक स्वास्थ्य संदेश पहुंचाना।
इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर घर का भ्रमण कर बुखार के मरीजों, कुपोषित बच्चों, टीबी और अन्य रोगों के संदिग्ध मामलों की पहचान करें। साथ ही, वे यह भी सुनिश्चित करेंगी कि प्रत्येक परिवार तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही तरीके से पहुंचे।
शिक्षा विभाग भी इस अभियान में अहम भूमिका निभाएगा। स्कूलों में बच्चों और अभिभावकों को साफ-सफाई, स्वच्छ पानी, हाथ धोने की आदत और मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में पोस्टर प्रतियोगिता, वाद-विवाद, निबंध लेखन और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि बच्चे भी इस अभियान का हिस्सा बनें और अपने परिवार को जागरूक करें।
नगर विकास और ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी होगी कि वे साफ-सफाई, जल निकासी और कूड़ा प्रबंधन को बेहतर बनाएं। नालियों की नियमित सफाई, जलभराव रोकना, खुले में शौच से मुक्ति और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था जैसे कार्य प्राथमिकता पर किए जाएंगे। जहां-जहां मच्छरों के पनपने की संभावना होगी, वहां विशेष सफाई और फॉगिंग अभियान चलाया जाएगा।
कृषि और सिंचाई विभाग भी इस अभियान में योगदान देंगे। खेतों और जल स्रोतों में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे। वहीं पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं से फैलने वाली बीमारियों पर नियंत्रण के लिए जागरूकता और रोकथाम के उपाय अपनाए जाएंगे।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उचित पोषण उपलब्ध कराया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी।
इस अभियान की सफलता के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा होगी, जिसमें पिछले सप्ताह की प्रगति और आने वाले कार्यों की योजना बनाई जाएगी। इसके अलावा सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गतिविधियों की रिपोर्ट समय पर राज्य मुख्यालय को भेजें।
अभियान के लिए विस्तृत समय-सारणी भी तय की गई है, जिसमें प्रशिक्षण, बैठकें, जागरूकता कार्यक्रम और फील्ड गतिविधियों की तिथियां निर्धारित की गई हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह से ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई थीं, ताकि अप्रैल में अभियान पूरी तरह से प्रभावी ढंग से चलाया जा सके।
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इस अभियान के माध्यम से प्रदेश में संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जाए और लोगों को समय रहते जागरूक किया जाए। इसके लिए जनसहभागिता को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों और आसपास साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें और किसी भी प्रकार के बुखार या बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
सूचना विभाग बागपत