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बरनावा पहुंची हिंडन नदी शोध यात्रा, जिलाधिकारी ने नदियों को बचाने में जनभागीदारी का किया आह्वान

हिंडन किनारे नदी सभा का हुआ आयोजन, लोगों ने श्रमदान कर नदियों को बचाने का दोहराया संकल्प

बागपत दिनांक 17 मार्च 2026 — कभी जीवनदायिनी रही हिंडन नदी को बचाने की मुहिम अब गांव-गांव तक पहुंचती नजर आ रही है। इसी क्रम में मंगलवार को हिंडन नदी शोध यात्रा जनपद बागपत के महाभारतकालीन गांव बरनावा पहुंची, जहां नदी किनारे आयोजित नदी सभा और श्रमदान कार्यक्रम में जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने सहभागिता की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही, जिसने इस अभियान को जनआंदोलन का रूप दे दिया।

बरनावा में नदी किनारे सुबह से ही अलग दृश्य देखने को मिला। ग्रामीण, युवा और बच्चे हाथों में फावड़ा और झाड़ू लेकर सफाई में जुटे रहे। श्रमदान के दौरान लोगों ने स्वयं नदी किनारे कचरा हटाया और स्वच्छता का संदेश दिया। इस दौरान यह साफ दिखा कि अब लोग केवल समस्या सुनने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने के लिए आगे आ रहे हैं।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने नदी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नदी बचेगी तो ही हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवन का आधार हैं। यदि आज हम सब मिलकर प्रयास नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने स्तर पर छोटे-छोटे कदम उठाएं, जैसे नदी में कचरा न डालना, रासायनिक प्रदूषण को रोकना और नियमित सफाई अभियान चलाना।

नदी सभा में ग्रामीणों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके साथ ही लोगों को यह भी समझाया गया कि वे अपने घरों और खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट को सीधे नदी में जाने से रोकें और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाएं। पहले नदी का पानी इतना साफ होता था कि लोग सीधे पी लेते थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।

दरअसल, हिंडन नदी पिछले कई वर्षों से प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और प्लास्टिक कचरे के कारण नदी का जल कई स्थानों पर उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। इसका असर सीधे तौर पर नदी किनारे बसे गांवों के जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में यह शोध यात्रा लोगों को समस्या से जोड़ने और समाधान की दिशा में प्रेरित करने का काम कर रही है।

भारतीय नदी परिषद द्वारा निकाली जा रही यह शोध यात्रा सहारनपुर के शिवालिक क्षेत्र से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और गाजियाबाद होते हुए गौतमबुद्धनगर तक पहुंचेगी। करीब 355 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान नदी के विभिन्न हिस्सों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच की जा रही है, ताकि प्रदूषण के स्तर का सही आकलन किया जा सके। इस आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपने की योजना है, जिससे ठोस नीति निर्माण में मदद मिल सके।

खास बात यह है कि यह यात्रा केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सीधे जोड़कर व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास भी कर रही है। श्रमदान, पौधारोपण और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से लोगों को यह बताया जा रहा है कि नदी को बचाने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की भी उतनी ही जिम्मेदारी है। इस अभियान में हिंडन नदी के साथ उसकी सहायक नदियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जब तक पूरी नदी प्रणाली को एक साथ नहीं सुधारा जाएगा, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है। यही कारण है कि इस यात्रा में समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है।

इस दौरान परियोजना निदेशक राहुल वर्मा सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

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