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अंकों से आगे की पढ़ाई: कहानी, कला और संवाद से आत्मविश्वास पा रहे बच्चे

अच्छी पहल: डीएम की सोच से सरकारी स्कूल में आया बदलाव, पढ़ाई बनी अनुभव का हिस्सा

बागपत, 18 मार्च 2026। बड़ौत स्थित रविदास वैदिक पाठशाला में इन दिनों एक नई शिक्षा क्रांति आगे बढ़ी है जो सीखने पढ़ने के नए तरीकों से बच्चों को आत्मविश्वासी एवं पढ़ाई में बेहतर बना रही है।। कक्षा में बैठा वह बच्चा, जो कुछ समय पहले तक सिर झुकाकर चुप रहता था, अब पूरी कक्षा के सामने खड़ा होकर कहानी सुना रहा है। उसके शब्द भले धीरे-धीरे निकलते हों, लेकिन आत्मविश्वास साफ झलकता है। साथी छात्र ताली बजाते हैं और शिक्षक मुस्कुराते हैं। यह बदलाव “शिक्षा सेतु” पहल का असर है, जिसने सरकारी स्कूल में पढ़ाई के तरीके को नई दिशा दी है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल की पहल पर ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के सहयोग से शुरू किया गया “शिक्षा सेतु” कार्यक्रम बच्चों की पढ़ाई को रटने से निकालकर समझने, संवाद और अनुभव से जोड़ने का प्रयास है। इस पहल के तहत कक्षाओं में पढ़ाई को ऐक्टिविटी आधारित बनाया गया है, जिसमें कहानी, कला, चर्चा और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

स्कूलों के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया था कि बच्चों में जिज्ञासा और क्षमता तो है, लेकिन पारंपरिक पढ़ाई का तरीका उनके आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को सीमित कर रहा है। बच्चे पाठ याद कर लेते थे, लेकिन समझ नहीं पाते थे और अपनी बात रखने में हिचकते थे। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए “शिक्षा सेतु” की शुरुआत की गई।

इस पहल के लागू होने के बाद कक्षाओं का माहौल पूरी तरह बदल गया है। अब पढ़ाई केवल शिक्षक तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे भी सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। अंग्रेजी भाषा को कहानियों के माध्यम से सिखाया जा रहा है, जिससे बच्चे भाषा को समझते हैं और उसे अपने शब्दों में व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही गणित को भी रोजमर्रा के उदाहरणों से जोड़कर पढ़ाया जा रहा है, जिससे विषय को समझना आसान हो गया है।

कक्षा में कला और गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। बच्चे चित्र बनाते हैं, समूह में कार्य करते हैं और अपनी सोच व्यक्त करते हैं। इससे उनकी रचनात्मकता के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले जो बच्चे बोलने में झिझकते थे, अब वे सक्रिय रूप से भाग लेते नजर आ रहे हैं। इस पहल के तहत बच्चों को संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा जा रहा है। उन्हें पर्यावरण संरक्षण, पशुओं के प्रति दया और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों के बारे में जागरूक किया जा रहा है, जिससे शिक्षा केवल अकादमिक न रहकर व्यवहारिक और मूल्य आधारित बन रही है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्वयं स्कूलों में जाकर बच्चों से संवाद किया और उन्हें प्रोत्साहित किया। उनके नेतृत्व में इस पहल को एक मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसमें बच्चों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के फैकल्टी और छात्र स्वयंसेवकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। वे बच्चों के साथ बैठकर उन्हें पढ़ाते हैं, संवाद करते हैं और उन्हें प्रेरित करते हैं। इससे ग्रामीण और आधुनिक शिक्षा के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित हुआ है।

शिक्षकों के अनुसार, इस पहल के बाद बच्चों के व्यवहार में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिला है। वे अब अधिक सक्रिय हैं, सवाल पूछते हैं और पढ़ाई में रुचि दिखाते हैं। कक्षा का वातावरण पहले की तुलना में अधिक जीवंत और सकारात्मक हो गया है। इस पहल का असर अब घरों तक भी पहुंचने लगा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे घर आकर स्कूल में सीखी गई बातें साझा करते हैं और पढ़ाई के प्रति उत्साह दिखाते हैं। “शिक्षा सेतु” पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कौशल आधारित, रचनात्मक और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देती है। जल्द ही अन्य विद्यालयों में भी इस मॉडल को लागू किया जाएगा।

सूचना विभाग, बागपत

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