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वेस्ट प्लास्टिक की समस्या से जन्मी बागपत की देसी डॉल ‘नन्ही कली’ अब लाएगी बच्चों के चेहरों पर मुस्कान

प्रदेश में मिशन शक्ति के शुभारंभ के अवसर पर बागपत ने देश को दी देसी डॉल नन्ही कली की सौगात

हर बेटी है नन्ही कली जो विश्वास और अवसर से बनती है फूल और पूरी दुनिया में बिखेरती है खुशबू

कचरे से सृजन की मिसाल: प्लास्टिक बोतलों के रेशों से बनी गुड़िया, गांव की महिलाओं के हाथों से तैयार

खिलाड़ियों की धरा पर उतरे सितारे, विश्व चैंपियन बॉक्सर मैरी कॉम से प्रेरित हुई बागपत की युवा शक्ति एवं महिलाएं

देसी गुड़िया से देशभर में पहुंचेगी बागपत की कहानी, ज़ीरो वेस्ट के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा बागपत

बागपत, 19 मार्च 2026। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नवाचार से सामाजिक बदलाव की पहचान बन चुके बागपत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि सोच सकारात्मक हो, तो चुनौतियां ही अवसर बन जाती हैं। खिलाड़ियों की धरती, संघर्ष की मिट्टी और सपनों की उड़ान से पहचाने जाने वाले इस जनपद में आज खेल जगत के सितारों का आगमन हुआ। बागपत ने आज ‘नन्ही कली’ देसी गुड़िया के रूप में एक ऐसा नवाचार प्रस्तुत किया है जो न केवल बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देगा।

आज जब पूरे प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत हो रही थी, उसी समय बागपत प्रशासन ने इस अभियान को एक नई दिशा देते हुए ‘नन्ही कली’ देसी रैग डॉल को लॉन्च किया। इस अनूठी पहल की शुरुआत उस समय हुई जब महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित जीरो वेस्ट महोत्सव के बाद प्लास्टिक कचरे का बड़ा ढेर प्रशासन के सामने चुनौती बनकर खड़ा था। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में जीरो वेस्ट के संकल्प के साथ इस प्लास्टिक कचरे के बेहतर निस्तारण हेतु कार्य किया। विशेष तकनीक के माध्यम से प्लास्टिक बोतलों को बारीक रेशों में परिवर्तित किया गया, जो देखने में बिल्कुल कपास जैसे मुलायम थे। इसके साथ ही पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को भी प्रोसेस कर उपयोगी बनाया गया। इन्हीं दोनों तत्वों के संयोजन से जन्म हुआ ‘नन्ही कली’ देसी गुड़िया का जो कचरे से बनी है, लेकिन अपने भीतर एक नई सोच, नई दिशा और नई उम्मीद को संजोए हुए है।

‘नन्ही कली’ को बागपत के गांवों की महिलाओं ने अपने हाथों से तैयार किया है। सुई-धागे से सजी यह गुड़िया उनके हुनर, धैर्य और मेहनत की कहानी कहती है। यह पहल महिलाओं को केवल रोजगार नहीं दे रही, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान भी दे रही है। जो महिलाएं पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज वे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हुए अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं। ‘नन्ही कली’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिल रहा है। 500 से 1000 रुपये की कीमत वाली यह गुड़िया बाजार में न केवल एक उत्पाद के रूप में, बल्कि एक विचार के रूप में स्थापित हो रही है — ‘लोकल के लिए वोकल’ का सशक्त उदाहरण।

इस गुड़िया का नाम ‘नन्ही कली’ अपने आप में एक गहरा संदेश समेटे हुए है। यह नाम बेटियों की मासूमियत, उनकी क्षमता और उनके उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। यह पहल समाज में प्रचलित उन रूढ़िवादी सोच पर प्रहार करती है, जो बेटियों को सीमित दायरे में देखने की कोशिश करती हैं। ‘नन्ही कली’ यह संदेश देती है कि बेटियां केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संभावनाओं का अनंत स्रोत हैं। यदि उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और विश्वास मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।

एक समय था जब दादी-नानी अपने हाथों से कपड़े की गुड़िया बनाकर बच्चों को देती थीं। यह परंपरा धीरे-धीरे आधुनिक खिलौनों के कारण समाप्त होती जा रही थी। बागपत की यह पहल उस परंपरा को फिर से जीवित करने का प्रयास है। यह बच्चों को अपनी संस्कृति, अपनी जड़ों और अपनी पहचान से जोड़ने का कार्य करती है। यह पहल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और मिशन शक्ति अभियान के उद्देश्यों को भी मजबूती प्रदान करती है। यह समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर बेटी एक कली है, जिसे खिलने का अवसर मिलना चाहिए।

कार्यक्रम में विश्व चैंपियन बॉक्सर और ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। उनकी प्रेरणादायक बातें वहां मौजूद हर बच्चे, हर महिला और हर युवा के दिल को छू गईं। उन्होंने अपने संघर्षों की कहानी साझा करते हुए बताया कि सफलता किसी विशेष वर्ग की मोहताज नहीं होती। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों और दिव्यांग बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खुद को कभी कम मत समझो, हर व्यक्ति विशेष है। उनकी बातों ने कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं के भीतर एक नई ऊर्जा भर दी। बच्चों ने उनसे सवाल पूछे, अपने सपने साझा किए और उनके अनुभवों से सीख ली। यह संवाद युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का माध्यम बन गया। छात्राओं तनु (कक्षा 7) और साइमा (कक्षा 8) सहित कई बच्चों ने मैरी कॉम से खेल और पढ़ाई के संतुलन, बड़े सपनों को साकार करने और सफलता के मूलमंत्र जैसे प्रश्न पूछे, जिनके उत्तर में उन्होंने अनुशासन, निरंतर अभ्यास, फोकस और आत्मविश्वास पर जोर दिया।

वहीं जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बेटियों को भविष्य बताते हुए समाज से सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया और नन्ही कली को बेटियों की प्रगति का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में पूर्व क्रिकेटर हितेश चौधरी की उपस्थिति रही जिन्होंने बागपत प्रशासन के नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि अब जिले की पहचान बेटियां बन रही हैं। वहीं इस अवसर पर नन्ही कली पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन और डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राएं, मिशन शक्ति पुलिस टीम, एथलीट्स, बॉक्सिंग व तीरंदाजी खिलाड़ी, माय भारत स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

इस दौरान मैरी कॉम ने विशेष बॉक्सिंग ग्लव्ज पर हस्ताक्षर कर भेंट किए। वहीं प्रशासन की ओर से उन्हें महादेव मंदिर अंकित स्मृति चिन्ह, पारंपरिक परिधान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम की विशेष घड़ी तथा ‘नन्ही कली – मैरी कॉम एडिशन’ भेंट की गई। मैरी कॉम ने बागपत में अपने फाउंडेशन के माध्यम से बॉक्सिंग को बढ़ावा देने हेतु विशेष प्रयास करने की घोषणा भी की।

कार्यक्रम में साक्षी, दिव्या, मीनाक्षी, सूजी, एसडीएम अमरचंद वर्मा, डिप्टी कलेक्टर मनीष कुमार यादव, पूनम सहित अन्य लोगों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन का एक और महत्वपूर्ण पहलू रहा दिव्यांग बच्चों की भागीदारी। पहली बार प्रशासन के सहयोग से उन्हें इतना बड़ा मंच मिला, जहां उन्होंने योग और देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। दर्शकों और अतिथियों ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें असली हीरो बताया।

बागपत, जो पहले केवल खिलाड़ियों की धरती के रूप में जाना जाता था, अब नवाचार और नारी शक्ति के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। ‘नन्ही कली’ इस बदलाव की प्रतीक है। ‘नन्ही कली’ केवल एक खिलौना नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन है — पर्यावरण बचाने का, महिलाओं को सशक्त बनाने का, बेटियों को आगे बढ़ाने का और समाज को सकारात्मक दिशा देने का।

नन्ही कली’ एक ऐसी कहानी है जो कचरे से शुरू होकर उम्मीद पर खत्म होती है। यह कहानी है संघर्ष की, सृजन की, आत्मनिर्भरता की और सपनों की। बागपत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हर चुनौती एक नई शुरुआत बन सकती है — और हर ‘नन्ही कली’ एक दिन पूरे देश को महकाने की ताकत रखती है।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी विनीत उपाध्याय (वि/रा), एसडीएम बागपत अमरचंद वर्मा, एसडीएम खेकड़ा निकेत वर्मा, एसडीएम बड़ौत भावना सिंह, डिप्टी कलेक्टर मनीष यादव एवं ज्योति शर्मा, ईओ केके भड़ाना, जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

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