!!मनुवाद और अंबेडकर वाद!!
जहाँ अंबेडकर वाद मानव मानव में बराबरी का पैरोकार है वहीं मनुवाद ब्राह्मण को सर्वश्रेष्ठ बाकी सबको नीच समझता है.
अंबेडकर वाद नर-नारी में कोई भेद नहीं करता नारी को स्वतंत्र और सशक्त बनाने का पैरोकार है मनुवाद नारी को शूद्र मानता है और नारी स्वतंत्रता एवं सशक्तिकरण का विरोधी है.
अंबेडकर वाद समतामूलक समाज की स्थापना पर जोर देता है.
मनुवाद ऊंच नीच पर आधारित विषमता वादी समाज व्यवस्था बनाए रखने पर जोर देता है.
अंबेडकर वाद तर्कशील, वैज्ञानिक दृष्टिकोण युक्त समाज बनाना चाहता है.
मनुवाद तर्कहीन अंधविश्वासी समाज बनाना चाहता है.
अंबेडकर वाद देश की सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक व्यवस्था में सभी वर्गों की संख्यानुपात भागीदारी प्रतिनिधित्व चाहता है.
मनुवाद देश की सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक व्यवस्था पर ब्राह्मणों का एकाधिकार चाहता है.
अंबेडकर वाद हर नागरिक की स्वतंत्रता का पक्षधर है.
मनुवाद शूद्रों एवं महिलाओं की स्वतंत्रता का विरोधी है.
अंबेडकर वाद ऐसा समाज बनाना चाहता है जिसमें हर नागरिक आपस में बराबरी एवं भाईचारा की भावना से ओतप्रोत हो.
मनुवाद क्रमिक ऊंच नीच पर आधारित जातिव्यवस्था जिसमें एक दूसरे को नीच अथवा ऊंच समझने की भावना हो और आपस में विद्वेष एवं शत्रुता का भाव हो ऐसे समाज का पक्षधर है.
अंबेडकर वाद हर नागरिक ही नहीं प्रत्येक प्राणी मात्र के लिए न्याय का पक्षधर है.
मनुवाद में शूद्रों एवं महिलाओं को न्याय के अधिकार से वंचित रखने की व्यवस्था है. मनुवाद में ब्राह्मणों की इच्छा ही न्याय है.
अंबेडकर वाद प्रत्येक नागरिक को नैतिकता वादी बनने का संदेश देता है.
मनुवाद में नैतिकता की कोई गुंजाइश ही नहीं है.
अंबेडकर वाद सशक्त, समृद्ध एवं प्रबुद्ध भारत निर्माण की अवधारणा है.
मनुवाद निर्बल, अशक्त, अंधविश्वासी, अवैज्ञानिक ब्राह्मण शासित भारत की अवधारणा है.
जिसे वे आजादी के पहले से ही मूर्त रूप देने के लिए प्रयास रत हैं.
*अंबेडकर वाद जनता द्वारा जनता के लिए जनता का *’लोकतंत्र,स्थापित करना चाहता है.
*मनुवाद ब्राह्मणों द्वारा ब्राह्मणों के लिए ब्राह्मणों का *’धर्म तंत्र’स्थापित करना चाहता है.
अंबेडकर वाद का प्रतीक हमारा संविधान है. जिसमें आवश्यकतानुसार बदलाव की गुंजाइश है.
मनुवाद के प्रतीक मनुस्मृति, वेद, पुराण, महाभारत, रामचरितमानस आदि ब्राह्मणी ग्रंथ हैं जिसमें आवश्यकतानुसार बदलाव की गुंजाइश शून्य है.
अंबेडकर वाद समतावादी महापुरुषों गौतम बुद्ध, संत कबीर,नारायणा गुरु,महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले, रामास्वामी पेरियार व अन्य महापुरुषों एवं मातृशक्तियों के मानवता वादी विचारों का प्रतिनिधित्व करता है.
मनुवाद ब्राह्मणों के काल्पनिक ग्रंथों के काल्पनिक पात्रों, उनकी गप्प कथाओं, अवैज्ञानिक सोच एवं अमानवीय विषमता वादी समाज व्यवस्था को स्थापित करने एवं बनाए रखने का हिमायती है.
2023 की शुरुआत में बिहार के शिक्षामंत्री चंद्रशेखर यादव की रामचरितमानस की चौपाइयों पर की गई टिप्पणी से शुरू हुई लड़ाई जिसे उप्र के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगे बढ़ाया.
जिससे मनुवाद के समर्थक बिलबिला उठे थे.
जिनमें अधिकतर ब्राह्मण और गिने चुने उनके मानसिक गुलाम शूद्र थे.
सदियों से चल रही इस लड़ाई को समझने की जरूरत है.
यह समतावाद और विषमता वाद के बीच की लड़ाई है.
यह वैज्ञानिकता और अवैज्ञानिकता के बीच की लड़ाई है.
यह नैतिकता, मानवीयता और अनैतिकता, अमानवीयता के बीच की लड़ाई है.
यह संविधान और मनुस्मृति, रामचरितमानस के बीच की लड़ाई है.
यह लोकतंत्र और धर्म तंत्र के बीच की लड़ाई है.
यह सबको समान अधिकार और ब्राह्मण एकाधिकारवाद के बीच की लड़ाई है.
यह अंबेडकर वाद और मनुवाद के बीच की लड़ाई है.
प्रत्येक शूद्र यानी एससी एसटी ओबीसी, समस्त भारतीय महिलाओं एवं हर वर्ण के प्रगतिशील विचारों के लोग जो संविधान एवं लोकतंत्र को मजबूत करना चाहते हैं को पूरी ताकत से मनुवादी धर्म तंत्र से दो दो हाथ करते हुए सर्व हितकारी संविधान एवं लोकतंत्र को बचाना ही होगा.
समतावाद जिंदाबाद!
अंबेडकर वाद जिंदाबाद!
विषमता वाद, मनुवाद हो बर्बाद!
लोकतंत्र की जय!
धर्म तंत्र की क्षय!
धर्म में वर्ण वर्ण में जाति जाति में ऊंच नीच और ब्राह्मण के आगे सारे नीच तो गर्व से कैसे कहें हम हिन्दू हैं???
चन्द्र भान पाल (बी एस एस)
