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श्रम का सम्मान, देश का उत्थान

बंधुओ आज का विषय भीं बहुत गंभीर व जरुरी है दो मिनट निकालकर अवश्य पढ़े

मित्रो राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं बनता,वह चेतना से बनता है और जब तक यह चेतना प्रत्येक नागरिक के भीतर जागृत नहीं होती, तब तक कोई भी व्यवस्था स्थायी,सशक्त और कल्याणकारी नहीं बन सकती।आज आवश्यकता इस बात की नहीं है कि हम केवल राजनीति को बदलें,बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं को बदलें,अपने भीतर राष्ट्र को जगाएँ!
राष्ट्र जागरण का पहला चरण है,स्वयं का जागरण!
जब व्यक्ति अपने अस्तित्व को केवल मैं तक सीमित नहीं रखता,बल्कि हम तक विस्तारित करता है,तभी राष्ट्र की नींव मजबूत होती है! यह जागरण केवल नारों से नहीं आता,यह आता है संस्कारों से,परिवार से,कुटुंब की समरसता से इसलिए कुटुंब प्रबोधन इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आधार है जब परिवारों में राष्ट्रभाव,कर्तव्यबोध और संस्कृति के प्रति सम्मान जागृत होगा,तभी समाज में सशक्त और संतुलित व्यवस्था खड़ी होगी आज समाज अनेक समस्याओं से घिरा है,विभाजन,स्वार्थ,पर्यावरण संकट,और सांस्कृतिक विघटन इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों से नहीं होगा,बल्कि प्रेरित समाज से होगा हमें संघर्ष को विरोध नहीं,बल्कि निर्माण का माध्यम बनाना होगा ऐसा संघर्ष,जो तोड़ता नहीं,जोड़ता है,जो जलाता नहीं जगाता है!
इस संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन भी केवल एक सरकारी विषय नहीं,बल्कि प्रत्येक नागरिक का धर्म है जब व्यक्ति अपने आसपास के जल,जंगल,जमीन को अपना मानकर उनकी रक्षा करता है,तभी वह सच्चे अर्थों में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करता है!
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें अब राजनीति और राष्ट्रनीति के बीच का अंतर समझना होगा!
राजनीति अक्सर सिर्फ सत्ता प्राप्ति का माध्यम बन जाती है,जबकि
राष्ट्रनीति राष्ट्र के दीर्घकालिक हित,संस्कृति,संतुलन और समग्र विकास का मार्ग होती है आज आवश्यकता नेताओं की नहीं है,बल्कि नायक की है नेता चुनाव जीतता है,लेकिन नायक विश्वास जीतता है नेता व्यवस्था का उपयोग करता है,नायक व्यवस्था का निर्माण करता है!
इसलिए हमें ऐसा नेतृत्व विकसित करना होगा, जो पद के लिए नहीं,बल्कि उद्देश्य के लिए कार्य करे,जो भीड़ को नहीं,बल्कि चेतना को दिशा दे और यह नेतृत्व बाहर से नहीं आएगा,यह हममें से ही निकलेगा,जब हम स्वयं उदाहरण बनेंगे,अपने आचरण में ईमानदारी,अपने व्यवहार में संवेदनशीलता,अपने जीवन में अनुशासन और अपने विचारों में राष्ट्रभाव लाएँगे,तभी समाज प्रेरित होगा!
अतः,राष्ट्र निर्माण कोई एक दिन का कार्य नहीं,यह एक सतत साधना है और इस साधना का मूल मंत्र है…!

स्वयं जागो,समाज को जगाओ,और राष्ट्र को अपने आचरण से महान बनाओ!!
!!भारत माता की जय!!
🌹🌹🌹
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चौधरी विनोद तंवर

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