Spread the love

क्षेत्र के खिलाड़ियों को कबड्डी के लिए मिली सिंथेटिक ट्रैक की सौगात

बागपत, 11 फरवरी 2026। 1857 की क्रांति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती को विद्रोह की मशाल देने वाले अमर बलिदानी बाबा शाहमल की 229वीं जयंती पर ग्राम बिजरौल स्थित शहीद स्मारक स्थल पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मंच से बाबा शाहमल के साहस और बलिदान को याद किया गया। इस दौरान विभिन्न खापों के चौधरियों ने दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, शिक्षा में पिछड़ापन और युवाओं में बढ़ती नशाखोरी जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन किया। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और नशामुक्त समाज का सामूहिक संकल्प लिया गया।

जिलाधिकारी की ओर से शहीद स्मारक परिसर स्थित बहुउद्देशीय हॉल में कबड्डी खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक मैट की व्यवस्था की गई है। अब उन्हें अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी और वे जिला, मंडल व राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए यह बड़ी सौगात मानी जा रही है। जिलाधिकारी ने युवाओं को संबोधित करते हुए शिक्षा, कौशल विकास और खेल को सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यदि युवा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें तो गांव और जनपद दोनों का भविष्य उज्ज्वल होगा। इस दौरान निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में ग्रामीणों की जांच की गई और परामर्श दिया गया।

कार्यक्रम में एसडीएम बड़ौत भावना सिंह, बाबा शाहमल के पैतृक परिवार से यशपाल चौधरी, विभिन्न ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने बाबा शाहमल के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अंकित बालियान की दोना फैक्ट्री है। अंकित बालियान ने अपनी इस फैक्ट्री में बीते दो वर्षों 13 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा हुआ था। अंकित बालियान इन मजदूरों को बुरी तरह टॉर्चर करता था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन मजदूरों को आज़ाद कराया है। जानकारी के मुताबिक़ अंकित ने फैक्ट्री में पिटबुल डॉग खुले छोड़े हुए थे। पिटबुल्स के डर से कोई भी मजदूर बंधन से निकलने की हिम्मत नही कर पाता था। अंकित ने मजदूरों पर कैसा-कैसा जुल्म किया है, इसकी गवाही मजदूरों के शरीर पर पड़े चोट के निशान दे रहे हैं। किसी के शरीर पर बेतहाशा चोटों के निशान थे तो किसी को पीट-पीटकर हाथ-पांव सुजा दिये गये थे।

sbobet88

×