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तंवर स्वच्छ पर्यावरण संस्था में जब नए साथी जुड़ते हैं, तो सिर्फ सदस्य संख्या नहीं बढ़ती, बल्कि धरती माँ की सेवा का संकल्प भी मजबूत होता है। मेरे द्वारा प्रेषित स्वागत संदेश में एक विश्वास झलकता है जो हर आंदोलन को सफल बनाता है – “नियम से कार्य और निस्वार्थ सेवा”।

1. स्वागत का अर्थ सिर्फ शब्द नहीं, जिम्मेदारी है
“तहेदिल से हार्दिक स्वागत अभिनंदन” – ये शब्द नए साथियों को बताते हैं कि आप अकेले नहीं हैं। आप एक परिवार का हिस्सा बने हैं। यहाँ हर पौधा लगाना, हर गली साफ करना, हर बच्चे को पेड़ का महत्व समझाना – सब एक मिशन का हिस्सा है।

2. पर्यावरण संरक्षक बनने का मतलब
संस्था के नियमानुसार कार्य करना मतलब अनुशासन। और अनुशासन से ही बड़े बदलाव आते हैं। पर्यावरण संरक्षक वो नहीं जो भाषण दे, वो है जो प्लास्टिक की थैली की जगह कपड़े का झोला उठाए, जो एक गिलास पानी बचाए, जो अपने क्षेत्र में 10 लोगों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करे।

3. अपने क्षेत्र को नई ऊँचाई देना
हर साथी का अपना क्षेत्र है – कोई स्कूल, कोई कॉलोनी, कोई गाँव। इसलिए मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप अपने-अपने क्षेत्र में संस्था का नाम रोशन करेंगे। एक साथी अगर 100 पेड़ लगवाता है, दूसरा अगर कचरा मुक्त अभियान चलाता है, तीसरा अगर जल संरक्षण पर काम करता है – तो मिलकर हमारा लक्ष्य पूरा होगा: स्वच्छ, हरित, स्वस्थ भारत।

निष्कर्ष
तंवर स्वच्छ पर्यावरण संस्था कोई NGO मात्र नहीं, ये एक सोच है। और सोच तब आंदोलन बनती है जब उससे जुड़ने वाले लोग “आशा” से आगे बढ़कर “विश्वास” के साथ काम करें।

नवनियुक्त सभी सम्मानित साथियों को फिर से बधाई। आपका एक कदम, धरती के लिए हजारों साँसें बचा सकता है।

आइए, हम सब मिलकर ये साबित करें – “पर्यावरण बचेगा, तभी जीवन बचेगा”।

जय हिंद, 🌳जय पर्यावरण 🌳

चौधरी विनोद तंवर
अध्यक्ष -तंवर स्वच्छ पर्यावरण संस्था.

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