
अंकित बालियान इन मजदूरों को काम के बाद लॉकअप में बंद रखता था। 24 घंटे में एक बार खाना देता था, खाने में चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च दी जाती थी। यानी जिस रोटी को कुत्ते भी ना खाते हों वो चोकर की रोटी इन मजदूरों को दी जाती थी। ये सभी मजदूर यूपी के अलग-अलग इलाकों से थे, इनको 12 हजार रूपये वेतन का लालच देकर लाया गया था। तस्वीर में मुजफ्फरनगर के SSP संजय वर्मा के हाथ में जो हथियार हैं, जिसमें डंडा, हंटर, और कील जड़ित डंडा है उसी से इन मजदूरों को टार्चर किया जाता था। जब पुलिस ने अंकित बालियान की फैक्ट्री से इन मजदूरों को आजाद कराया तो उन मजदूरों की हालत जानवरों से भी बदतर पाई गई। पुलिस ने पाया कि अंकित बालियान ने थर्ड डिग्री से टार्चर करके तीन मजदूरों को मार डाला, पुलिस ने मारे गये एक मजदूर की शनाख्त कर ली है।
मजदूरों को आज़ाद कराने वाली मुजफ्फरनगर पुलिस का यह कार्य सराहनीय है। अब सवाल यह है कि यह फैक्ट्री सलामत रहेगी? या इस पर बुलडोज़र चलेगा? क्या इस पर बुलडोजर नहीं चलना चाहिए? भारतीय कानून के अनुसार बँधुआ मज़दूरी गंभीर अपराध है, तब अंकित बालियान की इस फैक्ट्री को ज़मीन पर ही क्यों खड़ा रहने दिया जाए? इससे मलबे के ढेर में तब्दील कब किया जाएगा? साथ ही अंकित बालियान ने इन मजदूरों की मेहनत से जो पैसा कमाया है, वो पैसा उससे लेकर इन मजदूरों में वितरित किया जाए। क्योंकि उस पैसे के असल हकदार यही मजदूर हैं।
