उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अंकित बालियान की दोना फैक्ट्री है। अंकित बालियान ने अपनी इस फैक्ट्री में बीते दो वर्षों 13 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा हुआ था। अंकित बालियान इन मजदूरों को बुरी तरह टॉर्चर करता था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन मजदूरों को आज़ाद कराया है। जानकारी के मुताबिक़ अंकित ने फैक्ट्री में पिटबुल डॉग खुले छोड़े हुए थे। पिटबुल्स के डर से कोई भी मजदूर बंधन से निकलने की हिम्मत नही कर पाता था। अंकित ने मजदूरों पर कैसा-कैसा जुल्म किया है, इसकी गवाही मजदूरों के शरीर पर पड़े चोट के निशान दे रहे हैं। किसी के शरीर पर बेतहाशा चोटों के निशान थे तो किसी को पीट-पीटकर हाथ-पांव सुजा दिये गये थे।

subhashchand4

Bysubhashchand4

Jun 25, 2026
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अंकित बालियान इन मजदूरों को काम के बाद लॉकअप में बंद रखता था। 24 घंटे में एक बार खाना देता था, खाने में चोकर की रोटी, नमक और हरी मिर्च दी जाती थी। यानी जिस रोटी को कुत्ते भी ना खाते हों वो चोकर की रोटी इन मजदूरों को दी जाती थी। ये सभी मजदूर यूपी के अलग-अलग इलाकों से थे, इनको 12 हजार रूपये वेतन का लालच देकर लाया गया था। तस्वीर में मुजफ्फरनगर के SSP संजय वर्मा के हाथ में जो हथियार हैं, जिसमें डंडा, हंटर, और कील जड़ित डंडा है उसी से इन मजदूरों को टार्चर किया जाता था। जब पुलिस ने अंकित बालियान की फैक्ट्री से इन मजदूरों को आजाद कराया तो उन मजदूरों की हालत जानवरों से भी बदतर पाई गई। पुलिस ने पाया कि अंकित बालियान ने थर्ड डिग्री से टार्चर करके तीन मजदूरों को मार डाला, पुलिस ने मारे गये एक मजदूर की शनाख्त कर ली है।

मजदूरों को आज़ाद कराने वाली मुजफ्फरनगर पुलिस का यह कार्य सराहनीय है। अब सवाल यह है कि यह फैक्ट्री सलामत रहेगी? या इस पर बुलडोज़र चलेगा? क्या इस पर बुलडोजर नहीं चलना चाहिए? भारतीय कानून के अनुसार बँधुआ मज़दूरी गंभीर अपराध है, तब अंकित बालियान की इस फैक्ट्री को ज़मीन पर ही क्यों खड़ा रहने दिया जाए? इससे मलबे के ढेर में तब्दील कब किया जाएगा? साथ ही अंकित बालियान ने इन मजदूरों की मेहनत से जो पैसा कमाया है, वो पैसा उससे लेकर इन मजदूरों में वितरित किया जाए। क्योंकि उस पैसे के असल हकदार यही मजदूर हैं।

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