बागपत में नववर्ष की शुरुआत, बेटियों के स्वास्थ्य सुरक्षा के संकल्प के साथ
एचपीवी वैक्सीनेशन मॉडल लागू करने वाला प्रथम जिला बना बागपत, बेटियों के स्वास्थ्य एवं खुशहाली पर जोर
जिलाधिकारी ने खुद लगवाई वैक्सीन, लिटिल फीट फाउंडेशन के सहयोग से बेटियों को मिला जीवनरक्षक सुरक्षा कवच
बेटियों के स्वास्थ्य पर हुआ संवाद, विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य से जुड़ी शंकाओं को किया दूर
बागपत, 01 जनवरी 2026। देश में महिलाओं में होने वाले गंभीर कैंसरों में शामिल सर्वाइकल कैंसर आज भी महिलाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। परिवारों में अक्सर बेटियों के स्वास्थ्य को “बाद में देख लेंगे” वाली सोच से देखा जाता है। टीकाकरण, पोषण, जांच… इन सभी में लड़कियाँ पीछे रह जाती हैं। खासकर किशोरावस्था की स्वास्थ्य जरूरतें अक्सर अनदेखी रह जाती हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए जनपद बागपत में नववर्ष के पहले दिन बालिका स्वास्थ्य को लेकर एक नई और दूरदर्शी पहल की शुरुआत की गई। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बड़ौत स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान का शुभारंभ करते हुए 50 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया। बागपत प्रदेश का पहला जिला है जिसने बालिका स्वास्थ्य से जुड़ी इस पहल को अपनाया है और सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध लड़ाई का बड़ा संदेश दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) नामक वायरस होता है। यह वायरस अधिकतर मामलों में किशोरावस्था या कम उम्र में शरीर में प्रवेश कर जाता है और वर्षों बाद गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर किशोरियों की उम्र में ही टीकाकरण को सबसे प्रभावी मानते हैं। इस वैक्सीन के जरिए शरीर में पहले से ही सुरक्षा तैयार हो जाती है, जिससे भविष्य में कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
इसके पूर्व जिलाधिकारी अस्मिता लाल के संज्ञान में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठकों में समीक्षा के दौरान अक्सर यह तथ्य सामने आया कि सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले तब सामने आते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। कई बार इलाज संभव नहीं रह जाता। यही वह सच्चाई है, जिसने जिला प्रशासन को सोचने पर मजबूर किया कि यदि इलाज देर से मिल रहा है, तो क्यों न बीमारी से पहले ही सुरक्षा दी जाए। इसी सोच ने बागपत में इस टीकाकरण पहल को जन्म दिया जहां इलाज नहीं बल्कि बचाव को प्राथमिकता दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत में जिलाधिकारी ने स्वयं टीकाकरण कराकर यह संदेश दिया कि यह वैक्सीन सुरक्षित है और इससे डरने की जरूरत नहीं है। इसके बाद विद्यालय की छात्राओं का टीकाकरण शुरू हुआ। प्रशासन का मानना है कि जब तक समाज में भरोसा नहीं बनेगा, तब तक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी मुहिम को सफलता नहीं मिल सकती। इसीलिए जिलाधिकारी ने स्वयं अपना टीकाकरण कराकर उदाहरण प्रस्तुत किया।
बागपत में शुरू की गई यह पहल महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी चुप्पी पर प्रहार है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, लेकिन जानकारी की कमी, सामाजिक झिझक और देर से पहचान के कारण यह अक्सर तब सामने आती है, जब इलाज कठिन हो जाता है। बागपत प्रशासन ने इस सच्चाई को समझते हुए बीमारी के बाद उपचार की बजाय बीमारी से पहले सुरक्षा का रास्ता चुना है।
निजी अस्पतालों में एचपीवी वैक्सीन महंगी होने के कारण अधिकांश परिवार इसे लगवा पाने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में विद्यालय स्तर पर लिटिल फीट फाउंडेशन के सहयोग से निःशुल्क टीकाकरण सुनिश्चित कर प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वास्थ्य का अधिकार आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
एचपीवी वैक्सीनेशन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का प्रभावी माध्यम है, जो भविष्य में लंबे और महंगे इलाज की आवश्यकता को कम कर सकता है। इस दृष्टि से यह पहल न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा है, बल्कि परिवारों को आर्थिक बोझ से बचाने का भी प्रयास है।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि अक्सर हम बीमार होने के बाद इलाज पर ध्यान देते हैं, जबकि असली समझदारी बीमारी को होने से पहले रोकना है। उन्होंने कहा कि यह टीकाकरण इलाज नहीं बल्कि सुरक्षा है। हम चाहते हैं कि बागपत की बेटियां स्वस्थ रहें, पढ़ें, आगे बढ़ें और बीमारी का डर उनके रास्ते में न आए।
परंपरागत रूप से बेटियों के स्वास्थ्य को परिवार और समाज में प्राथमिकता नहीं मिल पाती। किशोरावस्था से जुड़ी स्वास्थ्य आवश्यकताओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और लड़कियों को अपने शरीर से जुड़े सवाल पूछने का अवसर नहीं मिलता। इसके लिए आज कार्यक्रम में विशेष संवाद हुआ।
विद्यालय की छात्राओं ने टीकाकरण से पहले और बाद में कई सवाल पूछे—क्या वैक्सीन से कोई नुकसान होता है, क्या इससे बुखार आएगा, क्या यह जरूरी है? इन सभी सवालों का जवाब लिटिल फीट फाउंडेशन के संस्थापक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर ने सरल शब्दों में दिया और बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
यह पहल शिक्षा और स्वास्थ्य के संयुक्त मॉडल का भी उदाहरण है। विद्यालय, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम दर्शाता है कि जब विभिन्न तंत्र एक लक्ष्य के लिए साथ आते हैं, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक और स्थायी होता है। बालिकाओं के लिए विद्यालय जैसे सुरक्षित और परिचित वातावरण में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना इस अभियान की एक बड़ी विशेषता रही।
छात्राओं के सवालों के समाधान के बाद उनका डर कम हुआ और कई बालिकाओं ने कहा कि वे अब अपने परिवार और सहेलियों को भी इसके बारे में बताएंगी। यही जागरूकता इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है। वहीं नववर्ष के उपलक्ष्य में जिलाधिकारी ने छात्राओं के साथ केक काटकर उन्हें बधाई दी और उनके साथ भोजन भी किया। यह पल प्रशासन और छात्राओं के बीच भरोसे और आत्मीयता का प्रतीक बना।
नववर्ष के अवसर पर इसकी शुरुआत कर प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि बेटियों का स्वास्थ्य और सशक्तिकरण जिले की प्राथमिकता में शामिल है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे। कुल मिलाकर, यह अभियान उस सोच का परिणाम है जिसमें बीमारी से लड़ाई अस्पताल में नहीं, बल्कि समय रहते जागरूकता और रोकथाम के माध्यम से लड़ी जाती है।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी बड़ौत भावना सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ तीरथ लाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता चौधरी, फाउंडेशन से रजनी चौहान सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।
सूचना विभाग बागपत