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मुरादाबाद ::- मूंढापांडे थानाक्षेत्र में रहने वाली महिला का उसके बहनोई ने बाथरूम में मोबाइल लगाकर अश्लील वीडियो बना लिया। इस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के समय महिला का पति दुबई था। उसने दुबई से लौटने के बाद आरोपी पर केस दर्ज कराया है। मूंढापांडे के गांव निवासी पीड़ित महिला के पति ने दर्ज कराए केस में बताया कि वह आठ माह पहले दुबई काम करने गया था। घर में उसकी पत्नी और अन्य परिजन रहते हैं। उसकी मौजूदगी में उसका बहनोई उसके घर आता-जाता था। आरोपी बहनोई रामपुर जिले के टांडा थाना क्षेत्र के गांव में रहता है। आरोप है कि उसने एक दिन बाथरूम में मोबाइल लगा दिया। उसकी पत्नी नहाने गई तो उसका अश्लील वीडियो बना लिया। इस वीडियो के जरिए उसकी पत्नी को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। महिला ने उसकी बात मानने से इन्कार किया तो आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी। आठ माह तक आरोपी पीड़िता को ब्लैकमेल करता रहा। पति दुबई से आया तो पत्नी ने आपबीती सुनाई। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपी पर दुष्कर्म और आईटी एक्ट में केस दर्ज किया है।

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सिर्फ चुनाव नहीं हारा था, अहंकार भी पराजित हुआ था!जुलाई 2022 में संसद के गलियारों में एक स्वर बार-बार सुनाई दे रहा था— “जवाब दो सोनिया गांधी…” “सुनो सोनिया गांधी…” “माफ़ी मांगो सोनिया गांधी…”अधीर रंजन चौधरी के एक बयान को लेकर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से तीखे अंदाज़ में सवाल किए। राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों और व्यवहार की मर्यादा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।कहा जाता है कि उस घटना ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को भीतर तक प्रभावित किया। इसके बाद अमेठी में राजनीतिक संघर्ष केवल चुनावी मुकाबला नहीं रहा, बल्कि प्रतिष्ठा और सम्मान का प्रश्न भी बन गया।2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अमेठी से अपने समर्पित कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार की कमान प्रियंका गांधी ने संभाली और परिणाम सबके सामने था। स्मृति ईरानी को भारी अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा।राजनीति के जानकार इस परिणाम को केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि सत्ता और पद के अहंकार पर जनता के निर्णय के रूप में भी देखते हैं।सत्ता स्थायी नहीं होती। पद, प्रतिष्ठा और अधिकार समय के साथ आते-जाते रहते हैं। जो स्थायी रहता है, वह है व्यक्ति का व्यवहार, उसकी विनम्रता और लोगों के प्रति उसका सम्मान।यही कारण है कि इतिहास बार-बार हमें सिखाता है—”ये सत्ता का दबदबा, ये हुकूमत, ये दौलत का नशा, किरायेदार हैं सब, घर बदलते रहते हैं।”पद का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। आज जो शिखर पर है, कल उसे भी जनता के बीच खड़ा होना पड़ सकता है। इसलिए शब्दों में संयम, व्यवहार में विनम्रता और विरोधियों के प्रति भी सम्मान बनाए रखना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।

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