बागपत 09 जून 2026 — भारत सरकार के “विकास भी, विरासत भी” के 12 वर्ष अभियान के अंतर्गत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आज अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर बागपत जनपद के विश्वप्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल सिनौली पर आधारित एक विशेष वीडियो जारी किया। यह वीडियो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन सभ्यतागत उपलब्धियों तथा पिछले वर्षों में विरासत संरक्षण के क्षेत्र में हुए प्रयासों को रेखांकित करता है।
सिनौली से वर्ष 2018 में प्राप्त लगभग 4,000 वर्ष पुराने ताम्र अलंकृत रथ, शस्त्र, ढाल, हेलमेट तथा अन्य पुरावशेषों ने न केवल भारतीय इतिहास और पुरातत्व के अध्ययन को नई दिशा दी, बल्कि विश्वभर के इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पुरातत्वविदों का ध्यान भी आकर्षित किया। इस खोज को हाल के दशकों की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक उपलब्धियों में गिना जाता है।
बागपत की धरती से प्राप्त यह अद्वितीय विरासत इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सभ्यता हजारों वर्ष पूर्व भी तकनीकी दक्षता, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक संगठन के उच्च स्तर पर विकसित थी। सिनौली की खोज ने भारत की प्राचीन विरासत को वैश्विक विमर्श के केंद्र में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पिछले 12 वर्षों में भारत सरकार ने विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार को विशेष प्राथमिकता दी है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, राम मंदिर, विभिन्न विरासत स्थलों के संरक्षण कार्यों तथा संग्रहालयों के विकास के साथ-साथ पुरातात्विक अनुसंधान को भी नई गति प्रदान की गई है। इसी क्रम में सिनौली जैसी ऐतिहासिक खोजों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा जारी यह विशेष वीडियो भी भारत की उस गौरवशाली सभ्यतागत यात्रा का प्रतीक है जिसमें विकास और विरासत दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। बागपत के नागरिकों के लिए यह विशेष गर्व का विषय है कि उनके जनपद की ऐतिहासिक धरोहर आज राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनकर पूरे देश और विश्व के समक्ष भारत की प्राचीन महानता का परिचय दे रही है।
सिनौली आज केवल बागपत की पहचान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति, ऐतिहासिक निरंतरता और वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है।
सूचना विभाग बागपत
