देवांक तोमर बने सेनामें लेफ्टिनेंट7 मार्च 2026 चेन्नई में ऑफिसर्स प्रशिक्षण अकादमी ओ टी ए में आयोजित ऑफिसर पासिंग आउट परेड में मेलफोर्ड सिटी रोहटा रोड मेरठ निवासी देवांक तोमर पुत्र श्री देवेंद्र सिंह ने सेना में लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन प्राप्त किया और देश की सेवा करने का संकल्प लिया। देवाक ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एमएससी भौतिकी से पोस्ट ग्रेजुएट किया है। परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह तीसरी पीढ़ी है जो देश की सेवा कर रही है देवांक के दादाजी श्री किरण पाल सिंह सेना से सूबेदार मेजर के पद से रिटायर्ड है तथा पिताश्री देवेंद्र सिंह वायु सेना से रिटायर्ड है। देवांक की माताजी ने कहा अनुशासित परिवार के लिए यह बहुत ही सम्मान और गौरव का विषय है। मुझे खुशी है की एक बेटा देश की सेवा कर रहा है।

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Mar 9, 2026
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देवांक तोमर बने सेना
में लेफ्टिनेंट
7 मार्च 2026 चेन्नई में ऑफिसर्स प्रशिक्षण अकादमी ओ टी ए में आयोजित ऑफिसर पासिंग आउट परेड में मेलफोर्ड सिटी रोहटा रोड मेरठ निवासी देवांक तोमर पुत्र श्री देवेंद्र सिंह ने सेना में लेफ्टिनेंट पद पर कमीशन प्राप्त किया और देश की सेवा करने का संकल्प लिया। देवाक ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एमएससी भौतिकी से पोस्ट ग्रेजुएट किया है। परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह तीसरी पीढ़ी है जो देश की सेवा कर रही है देवांक के दादाजी श्री किरण पाल सिंह सेना से सूबेदार मेजर के पद से रिटायर्ड है तथा पिताश्री देवेंद्र सिंह वायु सेना से रिटायर्ड है। देवांक की माताजी ने कहा अनुशासित परिवार के लिए यह बहुत ही सम्मान और गौरव का विषय है। मुझे खुशी है की एक बेटा देश की सेवा कर रहा है।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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