रमाला ::- रमाला स्थित कासिमपुर खेडी गांव के जंगल में मंगलवार को गाजर की फसल पर कीटनाशक का छिड़काव कर रहे किसान सचिन (42) की हालत बिगड़ गई। परिवार वालों ने बराल के निजी अस्पताल में उपचार कराया, जहां से चिकित्सकों ने मेरठ रेफर कर दिया। मेरठ के निजी अस्पताल में बुधवार दोपहर उपचार के दौरान किसान सचिन की मौत हो गई। कासिमपुर खेड़ी गांव निवासी धर्मपाल ने बताया कि उनके बेटे सचिन ने अपने खेत में गाजर, चुकंदर समेत अन्य सब्जियां उगा रखी हैं। मंगलवार को सचिन गाजर की फसल में मशीन से कीटनाशक स्प्रे कर रहा था, तभी उसकी हालत बिगड़ी और वह उल्टियां करते हुए बेहोश होकर खेत में ही गिर गया। आसपास खेत में काम कर रहे किसानों ने घर आकर सचिन की हालत बिगड़ने के बारे में बताया। खेत पर पहुंचे परिवार वाले सचिन को उठाकर बराल के निजी अस्पताल में ले गए। जहां चिकित्सकों ने उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने पर मेरठ रेफर कर दिया। इसके बाद से मेरठ के निजी अस्पताल में सचिन का उपचार चल रहा था, जहां बुधवार दोपहर सचिन की मौत हो गई। सचिन के परिवार में पत्नी शालू, दो बेटियां और एक बेटा है। जांच अधिकारी बच्चू सिंह का कहना है कि कीटनाशक का छिड़काव करते समय हालत बिगड़ने पर मौत हुई है।
बागपत :: खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने से किसान हालत बिगड़ी, अस्पताल में मौत, बिलखती रह गई पत्नी व तीन बच्चे
Bysubhashchand4
Feb 19, 2026Related Post
जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation
Aug 31, 2026
subhashchand4