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बागपत ::- जिलेभर में बुधवार सुबह को मौसम ने अचानक करवट ली और यहां बूंदाबांदी शुरू हो गई। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और बूंदाबांदी दिनभर रुक-रुककर होती रही। इसके साथ ही ठंडी हवाएं चलीं। इससे मौसम में दोबारा से ठंडक हो गई। यहां बृहस्पतिवार को भी बारिश होने का अनुमान है। पिछले कई दिन से लगातार तापमान बढ़ रहा था और इससे दिन में मौसम गर्म होना शुरू हो गया था। मौसम गर्म होने के कारण लोगों ने सर्दी के कपड़े रख दिए थे। इससे फरवरी माह में मार्च जैसे मौसम का अहसास होने लगा था, मगर बुधवार सुबह को अचानक मौसम में बदलाव देखने को मिला। बुधवार सुबह हुई बूंदाबांदी ने मौसम को बदल दिया। उसके बाद दिनभर बादल छाए रहने के साथ ही हवा चलने से ठंडक हो गई। बूंदाबांदी के बाद अधिकतम तापमान 19 डिग्री व न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बृहस्पतिवार को भी बारिश होने का अनुमान है और बारिश से होने से तापमान में गिरावट आएगी। हालांकि जिस तरह से मौसम में अचानक बदलाव हुआ और बूंदाबांदी हो गई, यह गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है। अचानक गर्मी बढ़ गई थी, उससे गेहूं का दाना कम मोटा होता है और पैदावार पर असर पड़ता है। वहीं बारिश होती है तो उससे सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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