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लखनऊ ::- राजधानी लखनऊ में बुधवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने अकेले यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का बिगुल फूंक दिया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि यूपी में जैसे-जैसे चुनाव पास आएंगे, जो लोग हमारे खिलाफ हैं, वे हमें सत्ता से दूर रखने की और भी कोशिश करेंगे। हमारे खिलाफ साजिश करेंगे। सिर्फ यूपी में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सभी ‘अंबेडकरवादियों’ को बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर का आत्म-सम्मान पाने के आंदोलन को मजबूत करने के लिए काम करते रहना चाहिए।
ब्राह्मण समाज को पूरी तरह से साथ लाने की कोशिश, 2007 की दिलाई याद
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भाजपा सरकार की नीतियों से कुछ लोगों को छोड़कर, जिनके स्वार्थ की पूर्ति की जा रही है, अन्य समाज के सभी वर्ग के लोग बेहद निराश और त्रस्त हैं। लेकिन, उनमें से ब्राह्मण समाज अपनी उपेक्षा, असुरक्षा व अपमान के खिलाफ काफी मुखर है। जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। बसपा ने हमेशा ब्राह्मण समाज को पूरा सम्मान और न्याय दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह ब्राह्मण समाज मुखर है, उससे भाजपा काफी असजह व चिंतित है। इसके इतर बसपा ने उच्च समाज में खासकर ब्राह्मण समाज को बसपा ने जो पार्टी से लेकर सरकार में पद व आदर दिया वह किसी अन्य पार्टी या सरकार ने कभी नहीं दिया।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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