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श्रद्धालुओं की सुविधा में बड़ा नवाचार, क्यूआर कोड एप से जुड़ा पूरा मेला क्षेत्र और कांवड़ रूट

भक्ति भी, प्रकृति भी: जीरो वेस्ट मॉडल के साथ इतिहास रचने चला पुरा महादेव महाशिवरात्रि मेला

हर-हर महादेव के जयघोष संग शुरू हुआ फाल्गुनी महाशिवरात्रि मेला, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

भक्ति भी, प्रकृति भी: जीरो वेस्ट मॉडल के साथ नई पहचान गढ़ रहा पुरा महादेव मेला

आस्था, स्वच्छता और तकनीक का संगम बना पुरा महादेव मेला, प्रदेश के लिए मॉडल

बागपत, 14 फरवरी 2026 — फाल्गुन मास की पावन महाशिवरात्रि के अवसर पर जनपद बागपत के ऐतिहासिक श्री परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर पर लगने वाला प्रसिद्ध और आस्था का विराट संगम मेला आज भव्य और दिव्य स्वरूप के साथ प्रारंभ हो गया। मेले के पहले ही दिन तड़के सुबह से हजारों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। मंदिर परिसर से लेकर कांवड़ मार्ग तक हर ओर आस्था की अलौकिक छटा दिखाई दी। श्रद्धालु भगवान शिव के दरबार में पहुंचे और पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित और भव्य बनाने की जो परंपरा स्थापित हुई है, उसका जीवंत उदाहरण इस वर्ष पुरा महादेव मेला बनकर सामने आया है। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं—आस्था का सम्मान, स्वच्छता का संकल्प, सुरक्षा की गारंटी और तकनीक का उपयोग—को पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर उतारा है। यही कारण है कि यह ऐतिहासिक मेला इस बार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुशासन, डिजिटल नवाचार और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक मॉडल बन गया है।

पुरा महादेव मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्ता सदियों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आज मेले के पहले दिन मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आस्था को और भी सशक्त रूप से प्रमाणित किया।

इस वर्ष पुरा महादेव मेला एक और विशेष कारण से ऐतिहासिक बन गया है। इस ऐतिहासिक धाम के इतिहास में पहली बार इस मेले को “जीरो वेस्ट महोत्सव” के रूप में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वच्छ उत्तर प्रदेश और पर्यावरण संरक्षण की नीति को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन ने इस मेले को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और दुकानदारों तथा श्रद्धालुओं को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह पहल दर्शाती है कि आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

वहीं मेला क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए व्यापक और सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की गई है। पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जहां सफाईकर्मियों और अधिकारियों की टीमें चौबीसों घंटे तैनात हैं। विभिन्न स्थानों पर रंग-कोडित डस्टबिन लगाए गए हैं, जिनमें गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग संग्रहित किया जा रहा है। सफाईकर्मी नियमित रूप से कचरा एकत्र कर उसे निर्धारित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं, जहां वैज्ञानिक पद्धति से उसके निस्तारण की योजना है।

जीरो वेस्ट महोत्सव की सबसे प्रेरणादायक पहल यह है कि मेले से निकलने वाले कचरे को बेकार नहीं जाने दिया जा रहा, बल्कि उसे उपयोगी संसाधनों में परिवर्तित किया जा रहा है। मंदिर में चढ़ाई जाने वाली फूल-मालाओं और पूजन सामग्री से जैविक खाद और अगरबत्ती तैयार की जाएगी। वहीं सूखे कचरे को रिसाइक्लिंग यूनिट तक भेजकर उससे विभिन्न उपयोगी वस्तुएं बनाई जाएंगी। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि समाज को “वेस्ट टू वेल्थ” का महत्वपूर्ण संदेश भी दे रही है।

जीरो वेस्ट महोत्सव की अवधारणा को साकार करते हुए आज एक नई पहल करते हुए भगवान शिव के जलाभिषेक में अर्पित होने वाला पवित्र जल भी व्यर्थ नहीं जाने दिया जा रहा है। शिवलिंग पर अर्पित इस पावन जल को विशेष व्यवस्था के तहत संरक्षित कर उसे पशु-पक्षियों, असहाय कुत्तों और उन गौशालाओं तक पहुंचाया जा रहा है, जहां ऐसे गोवंश हैं जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव कदम है, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना को भी सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है, जिसमें प्रकृति और प्राणी मात्र की सेवा को ही सच्ची ईश्वर भक्ति माना गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल उत्तर प्रदेश के विजन को साकार करते हुए इस बार पुरा महादेव मेले में तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया गया है। सूचना विभाग द्वारा क्यूआर कोड आधारित कांवड़ यात्रा एप विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन पर मेला क्षेत्र की सभी सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस एप के माध्यम से श्रद्धालु मेडिकल सहायता, पेयजल केंद्र, पार्किंग, शौचालय और कंट्रोल रूम की जानकारी आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। यह पहल प्रशासन की संवेदनशीलता और आधुनिक सोच का परिचायक है।

मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सजग है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की नीति के अनुरूप मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना करने का अवसर मिल रहा है।

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष मेडिकल कैंप स्थापित किए गए हैं। यहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ चौबीसों घंटे तैनात हैं, जो जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा पेयजल के लिए पानी के टैंकर, मोबाइल टॉयलेट और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मेला क्षेत्र और कांवड़ मार्ग पर व्यापक प्रकाश व्यवस्था की गई है। प्रत्येक प्रमुख स्थान पर लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे रात्रि के समय भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष पार्किंग स्थल बनाए गए हैं और ट्रैफिक पुलिस लगातार निगरानी कर रही है।

जिलाधिकारी अस्मिता लाल स्वयं मेले की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह मेला जनपद की आस्था और प्रतिष्ठा का प्रतीक है और इसे सफल बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को नई पहचान मिली है। काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या धाम और मथुरा की तरह अब पुरा महादेव मेला भी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल होता जा रहा है। यह मेला न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रदेश के विकास, सुशासन और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक बन गया है।

पुरा महादेव मेला इस बार आस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और तकनीक का अद्भुत संगम बनकर उभरा है। जीरो वेस्ट महोत्सव के रूप में आयोजित यह मेला पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। यह आयोजन दर्शाता है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनभागीदारी और सकारात्मक सोच एक साथ मिलती है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ प्रारंभ हुआ यह ऐतिहासिक मेला अब तीन दिनों तक आस्था, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता रहेगा। यह मेला न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच, उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बन गया है।

पुरा महादेव की पावन भूमि पर उमड़ी आस्था की यह अलौकिक धारा यह संदेश दे रही है कि उत्तर प्रदेश आज आस्था, विकास और सुशासन के नए युग की ओर अग्रसर है—जहां परंपरा का सम्मान भी है और आधुनिकता का समावेश भी।

इस अवसर पर अपर जिला अधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय, शिवनारायण ,अपर पुलिस अधीक्षक प्रवीण चौहान, मेला मजिस्ट्रेट / एसडीएम बागपत अमरचंद वर्मा, एसडीएम बड़ौत भावना सिंह, डिप्टी कलेक्टर मनीष यादव एवं ज्योति शर्मा, तहसीलदार बागपत अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार बड़ौत श्वेताभ सिंह ,अधिशासी अधिकारी बागपत केके भड़ाना, बड़ौत ईओ मनोज रस्तोगी, ईओ वीरज त्रिपाठी, परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर मुख्य पुजारी पंडित जय भगवान शर्मा, सहित संबंधित विभागों के अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

सूचना विभाग बागपत

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