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इस कुकर्मी सरकार ने धर्म के नाम पर सत्ता बचाने के लिए ना केवल हिन्दू-मुस्लिम बल्की जात पात मे विभाजित कर एपस्टीन जैसे राक्षस पापी,कमसिन बच्चियों के सौदागर शोषण के बाद मार कर खाने और दुनियाभर के विश्वप्रसिद्ध नेता अभिनेताओं को परोसने वाले महा पापी दलाल का एजेंट बन कर इंसानियत को तार_तार नही किया।

आश्चर्य है दुनियाभर मे Epstein files मे जिन लोगो के नाम आए है उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे है इस्तीफे हो रहे है।

लेकिन हमारे देश मे दलाल मीडिया कुत्ते की तरहा Epstein के भारतीय दलालो के समर्थन मे कुतर्क कर रहा है।

अती किसी की बात भी बुरी होती है मुस्लिम को टाइट करते करते हिन्दूओं का कच्छा तक तार तार कर दिया।

मंदिरो पर बुलडोजर चल रहा है शिवलिंग (विग्रह) को तोड़कर गन्दगी के ढेरो पर फैका दिया गया।

शंकराचार्य पर लाठीचार्ज किया गया ब्राह्मण बटुको को चोटी से पकड कर खींच कर पीटा गया।

ये काम कोई चंडाल गिरे हुए चरित्र का नीच ही करा सकता है।

इस नीच लुटेरी चंदा चोर,वोट चोर दलाल सरकार का देश को बर्बाद करने के लिए सब कुछ गुप्त प्रायोजित कार्यक्रम चल रहा था।

नोट बंदी,डिजिटल इंडिया,GST जैसा भारी टैक्स कोविड फैलाकर जनता को मारना,पुलवामा से लेकर पहलगाम नरसंहार ट्रम्प का ओपरेशन सिंदूर वार रुकवाना सबकुछ प्रायोजित था।

मोदी नामक सरकार को Epstein के इशारे पर ट्रम्प की चला रहा है।

क्या बैंको LIC,Tax के जमा लाखो करोड रुपए अडानी अंबानी मोदी अमित शाह ने नही लूटे और नितिन गड़करी के बेटो ने एथनॉल बेच कर जनता की जेब नही काटी।

ये कहां थे कहां आ गए हम

दलालो ने देश की मिली जुली भाई चारे की सामुहिक गंगा जामुनी संस्कृति डूबो दिया डूब मरो दलालो।

राकेश भारद्वाज
सदस्य AICC,2017

@RahulGandhi
@khrega

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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