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(मोतियाबिन्द की जाँच व आपरेशन फ्री)

दिनांक 10 फरवरी २०१८: दिन:- मंगलवार

समयः – सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक

मोतियाबिन्द ऑपरेशन कैम्पः- यह कैम्प आपके मोतियाबिन्द के उपचार के लिए निःशुल्क लगाया जा रहा है, जिसमें ए.डी.के. जैन मैमोरियल ट्रस्ट दिल्ली के अनुभवी नेत्र चिकित्सकों द्वारा आपके आँखों की जाँच कर मोतियाबिन्द के ऑपरेशन किए जायेंगे। ऑपरेशन के लिए अस्पताल की गाड़ी आपको अस्पताल ले जाएगी, जहाँ आपको ऑपरेशन के बाद 1 दिन रहना होगा। उसके बाद गाड़ी आपको कैम्प के स्थान पर वापिस छोड़ जाएगी। आप सभी रोगियों की मुफ्त चिकित्सा के साथ-साथ रहना भोजन, दवाईयाँ, लेंस आदि की सभी सुविधायें मुफ्त होंगी, रोगी का कोई पैसा खर्च नहीं होगा।

कैम्प का स्थान

स्थान – नरेश वर्मा जी (निवर्तमान मंडल अध्यक्ष, खेकड़ा देहात) का आवास, गढ़ी कलंजरी, तहसील खेकड़ा जिला बागपत (उत्तर प्रदेश)

सौजन्य सेः- ए डी के जैन आई हॉस्पिटल

पाठशाला रोड़, जैन एकादमी के बराबर में बर्फ फेक्ट्री के सामने, खेकड़ा, जिला-बागपत यू.पी.

सम्पर्क सूत्रः 7300675984, 0121-22011008, 9027069855 नोटः कृप्या सफेद मोतिया वाले मरीज अपना आधार कार्ड व एक फोटो साथ लायें।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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