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श्रीमती मीनाक्षी सागर द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका को स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी बताकर जुर्माना के साथ खारिज

-श्रीमती मीनाक्षी सागर को जिला विधि सेवा प्राधिकरण, संभल में 1000 रुपये का जुर्माना अदा करना होगा

-याचिकाकर्ता को एक वास्तविक वादी के रूप में बेहतर विवरण के साथ एक नई रिट याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी।

चंदौसी (संभल) 10.2.26
माननीय उच्च न्यायालय, प्रयागराज/इलाहाबाद में एस. एम. कॉलेज, चंदौसी, जनपद-संभल में कार्यरत संविदा पर शिक्षिका के रूप में कार्यरत एवं कांग्रेस नेत्री श्रीमती मीनाक्षी सागर द्वारा दायर की गई याचिका संख्या- रिट ए, 1852/2026 को जुर्माना के साथ निरस्त किया है। माननीय उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए निर्णय में उल्लेखित किया गया है कि वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता ने 25.01.2026 को शपथ पत्र दिया है, जबकि विवादित आदेश बाद में यानी 27.01.2026 को पारित किया गया था, जो स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी है।

इस स्तर पर, याचिकाकर्ता के विद्वान वकील श्री ऋतुवेंद्र सिंह ने निवेदन किया है कि इस रिट याचिका को वापस लेकर खारिज कर दिया जाए और याचिकाकर्ता को बेहतर विवरण के साथ एक नई रिट याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी जाए।

उपरोक्त निवेदनों के मद्देनजर, इस रिट याचिका को वापस लेकर खारिज किया जाता है और याचिकाकर्ता को जिला विधि सेवा प्राधिकरण, संभल में 1000 रुपये का जुर्माना अदा करना होगा। और याचिकाकर्ता को एक वास्तविक वादी के रूप में बेहतर विवरण के साथ एक नई रिट याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी जाती है।

श्रीमती मीनाक्षी सागर द्वारा इस याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य; गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद; प्राधिकृत नियंत्रक एसएम कॉलेज, चंदौसी/जिलाधिकारी, जनपद-संभल एवं एस. एम. कॉलेज, चंदौसी के आयोग चयनित प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. दानवीर सिंह यादव को पार्टी बनाया था।

माननीय उच्च न्यायालय, प्रयागराज/इलाहाबाद में प्रोफेसर दानवीर सिंह यादव की ओर से विद्वान विधि व्यवसायी एडवोकेट गिरीश कुमार यादव तथा विश्वविद्यालय की ओर से प्रशांत एडवोकेट प्रशांत माथुर द्वारा पैरवी की गई। श्रीमती मीनाक्षी सागर की ओर से एडवोकेट नारायण दत्त शुक्ला एवं एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा पर भी की गई थी।

Court Order screen shot as appended below:-

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