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यह जब बोलते हैं, सारी सत्ता इनपर टूट पड़ती है । यह इस आदमी का दमखम है । कभी किसी तस्वीर से तो कभी किसी किताब से तो कभी कोई बात से,पूरी सरकार इनपर टूट पड़ती है । स्पीकर अपनी लय खो बैठते हैं । सत्ता समर्थित सदस्यों की पूरी लॉबी टूट पड़ती है । सत्ता जनित एंकर्स इनपर फब्तियां कसते हैं मगर सबका केंद्र तो एक ही होता है, राहुल….

किसी को मालूम हो या न मालूम हो मगर सत्ता को अच्छे से पता है कि राहुल के बोलने के क्या मायने हैं । तभी इनके एक एक शब्द पर पूरी सत्ता लड़खड़ाकर निम्न भाषा पर उतर आती है । जो जितना गन्दा बोल सकता है, वह उतना गन्दा सम्बोधन इन्हें देता है मगर जगत प्रसिद्ध है, गाली उसी मुँह से निकलती है, जिसमें कुछ करने की ताक़त न हो ।।जो कसमसाकर रह जाए,वही निम्न भाषा बोलता है ।

इनमें से कोई भी राहुल से तर्कों पर,फैक्ट पर बात नही कर सकता । वह जानते हैं कि यह जी बोल रहे हैं, सही है । अब बताइये भरी संसद में वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने कहा की जो किताब कभी छपी ही नही,उसका ज़िक्र क्यों ।

अब किताब सामने है, यह बाजार में मौजूद थी,इस सत्ता को इतनी भी खबर नही है । इनकी कैबिनेट के ऐसे मंत्रियों को इस्तीफे दे देने चाहिए,जिन्हें यह तक नही पता कि किताब ऑनलाइन बिक रही है ।।आप सोचिये इन्हें इतनी बड़ी बात की ख़बर ही नही है । असल में सत्ता को सिर्फ हिन्दू मुसलमान करना आता है । इसमें यो यह शूरवीर हैं मगर जब बात कूटनीति,ज्ञान, राजनीति की आती है तो यह लोग शून्यवीर हो जाते हैं ।

फ़िलहाल, राहुल जो चाह रहे वही हो रहा है । नेता विपक्ष ने पूरी सत्ता का केंद्र अपनी तरफ कर रखा है । आप सत्ता के सदस्यों को देखिए,वह किस निम्न स्तर के भाषा बोल रहे हैं, हालांकि यह उनकी परम्परागत भाषा ही है मगर आप बेचैनी देखिए । सब हलकान हैं कि क्या करें,कैसे इसे चुप कराएं, कैसे डराएं ।

राहुल की चुनौती झेलने में सत्ता बुरी तरह फेल हुई है । इतनी बड़ी सदस्य संख्या और सत्ता लेने के बावजूद,वह एक लीडर के सामने टिक नही पाती, लड़खड़ा जाती है । सबकी सुर,लय, ताल बिगड़ जाती है । यह राहुल की हिम्मत, समझ,साफगोई और बेहतरीन कूटनीति है ।

धीरे धीरे सब समझेंगे,राहुल ने उस गुब्बारे की हवा तो निकालना शुरू ही कर दिया है, जो हर समय फूला रहता था । बबल से डरा नही जाता,खेला जाता है, यह राहुल ने साबित करदिया ।

दो वाक्य,एक किताब का ज़िक्र और पूरी सत्ता बेचैन….जिनको यह न पता हो कि उनके देश में क्या बिक रहा है । उन्हें सत्ता में रहना ही नही चाहिए । गम्भीर सवाल तो यह है कि जो किताब छापने की परमिशन नही मिली,वह बाज़ार में बिक कैसे रही थी । सत्ता को इसका जवाब ढूंढना चाहिए,राहुल से लड़कर ही सीखो मगर वह सीखो,जिससे देश का भला हो ।

यह किताब सामने लाकर राहुल ने सरहद के ही मुद्दे को नही उठाया है, बल्कि देश के भीतर का भी राज़ खोल दिया है । सरकार की नाक के नीचे किताब उपलब्ध थी और इन्हें खबर नही….

राहुल से सत्ता घबराने लगी है । राहुल जो चाह रहे,सत्ता वैसे कदम बढ़ा रही है । राहुल की पिच पर सत्ता लड़खड़ा रही है । देखते जाइये,उसने कहा था,जो चाहे,वह कहलवा लेंगे और कहलवा लिया….

Hafeez Kidwai

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