Spread the love

सर्व खाप सम्मान समारोह में गूंजा बेटी बचाओ–बेटी बढ़ाओ का संदेश, सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान

महिला हितैषी बनने की ओर अग्रसर बागपत, बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट हो रहे हितधारक

खेकड़ा में खाप चौधरियों, पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने ली लैंगिक भेदभाव खत्म करने की शपथ

बागपत प्रशासन की खाप पंचायतों से संवाद की पहल से बेटियों को लेकर बदल रही पारंपरिक सोच

बागपत, 01 फरवरी 2026। जनपद बागपत में सामाजिक सोच को नई दिशा देने की पहल उस समय सामने आई, जब जिलाधिकारी अस्मिता लाल बेटियों के अधिकारों की बात लेकर खाप पंचायतों के बीच पहुँचीं। खेकड़ा में आयोजित सर्व खाप सम्मान समारोह में उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ अभियान को केंद्र में रखते हुए समाज से सीधा संवाद किया और खाप पंचायतों से बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने की अपील की।

कार्यक्रम में सर्वसमाज के खाप चौधरी, थांबेदार, मुखिया, लंबरदार, ब्लॉक अध्यक्ष, ग्राम प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में यही संदेश प्रमुख रहा कि सामाजिक परंपराओं के साथ अब समय के अनुरूप सोच में बदलाव जरूरी है। जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण समाज में खाप पंचायतों की भूमिका प्रभावशाली रही है और यदि सभी खाप बेटियों के पक्ष में एकजुट होकर खड़ी हों, तो सकारात्मक बदलाव तेजी से जमीन पर उतरेगा।

जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में लिंगानुपात, बालिका शिक्षा और सामाजिक मानसिकता जैसे संवेदनशील विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण-हत्या और लैंगिक भेदभाव जैसी कुरीतियों पर रोक में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ को उन्होंने सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बताते हुए कहा कि हर पंचायत, हर परिवार और हर नागरिक को इसकी जिम्मेदारी निभानी होगी।

उन्होंने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला होती है। जब बेटियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णयों में बराबरी का अधिकार मिलेगा, तभी समाज संतुलित और मजबूत बनेगा। जिलाधिकारी ने खाप प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि पंचायत स्तर पर बेटियों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए, स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाए और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए।

बेटियों के अधिकारों को लेकर जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में बागपत प्रशासन ने पहली बार खाप पंचायतों के बीच सीधा संवाद करने की पहल की है जिसके तहत जगह जगह खाप पंचायतों का सहयोग मिल रहा है और बागपत में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए सभी हितधारक लोग एकजुट हो रहे है और बागपत महिला हितैषी बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।

समारोह के दौरान सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों पर भी जोर दिया गया। बेटियों को समान अधिकार देना भारतीय संविधान की भावना है और यही सभ्य समाज की पहचान है। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ मिलकर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने और सोच में बदलाव लाने के प्रयास तेज करने का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब जिलाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह को बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ की सामूहिक शपथ दिलाई। शपथ के दौरान कन्या भ्रूण-हत्या के विरोध, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करने, विवाह और पारिवारिक निर्णयों में समानता रखने तथा किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लिया गया। खाप चौधरियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मंच से आश्वासन दिया कि वे इस संकल्प को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यवहार में उतारेंगे।

कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन समाज के साथ मिलकर बेटियों के अधिकारों की रक्षा और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून अपना काम कर रहा है लेकिन स्थायी बदलाव के लिए जरूरी है कि समाज स्वयं आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाए और उदाहरण प्रस्तुत करे।

इस दौरान एसडीएम खेकड़ा निकेत वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।

सूचना विभाग बागपत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

sbobet

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

situs judi bola

×