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मलकपुर मिल ने चुकाया पूरा बकाया: 2024-25 का एक-एक रुपया किसानों तक पहुंचा, वर्षों का इंतज़ार खत्म

कर्ज, चिंता और इंतज़ार के बाद प्रशासन ने दिलाई बड़ी राहत—अब न बकाया, न असमंजस

अब इंतजार खत्म, किसानों के हक के 470 करोड़ का मलकपुर मिल प्रबंधन ने किया पूरा भुगतान

कृषक कल्याण संकल्प: बागपत में गन्ना भुगतान बना सुशासन की मिसाल, किसानों का बढ़ा भरोसा

बागपत, 31 जनवरी 2026। जनपद के गन्ना किसानों के लिए आज का दिन राहत, संतोष और विश्वास का प्रतीक बन गया। मलकपुर चीनी मिल ने वर्ष 2024-25 पेराई सत्र का समस्त लंबित गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया। विकास भवन में आयोजित किसान दिवस के अवसर पर किसानों की उपस्थिति में मलकपुर मिल प्रबंधन द्वारा शेष समुचित भुगतान का चेक जिलाधिकारी अस्मिता लाल को सौंपा गया। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि बीते सत्र का एक-एक रुपया अब किसानों तक पहुंच चुका है।

वर्षों से गन्ना भुगतान को लेकर बनी अनिश्चितता और तनाव का अध्याय आज समाप्त हो गया है। मलकपुर चीनी मिल पर किसानों का कुल 470 करोड़ रुपये से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया चल रहा था। मलकपुर चीनी मिल से जनपद बागपत के लगभग 39 हजार गन्ना किसान प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका इस मिल की सुचारु कार्यप्रणाली और समय पर भुगतान से सीधे प्रभावित होती है। किसानों की सुविधा के लिए मिल द्वारा क्षेत्र में 70 गन्ना क्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और तौल पर्ची तथा भुगतान की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहे।

भुगतान में देरी के चलते किसान आर्थिक दबाव में थे। खाद-बीज, सिंचाई, मजदूरी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों के बीच भुगतान न मिलना किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुका था। यही वह स्थिति थी, जब जिला प्रशासन ने इसे केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि किसान सम्मान और अधिकार से जुड़ा विषय मानते हुए हस्तक्षेप किया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने शुरू से ही स्पष्ट रुख अपनाया कि किसानों के हक से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने गन्ना भुगतान को प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित करते हुए चीनी मिल प्रबंधन की जवाबदेही तय की। शासन द्वारा जारी टैगिंग नीति के तहत चीनी, शीरा, बगास और प्रेसमड जैसे उप-उत्पादों को सीधे गन्ना भुगतान से जोड़ा गया और निर्देश दिए गए कि इनकी बिक्री से प्राप्त राशि का न्यूनतम 85 प्रतिशत हिस्सा किसानों को भुगतान में ही उपयोग होगा। वहीं मलकपुर मिल प्रबंधन ने समय समय पर किश्तों में भुगतान कर किसानों को नियमित राहत दी।

इस संकल्प को साकार करने के लिए जिला गन्ना अधिकारी के माध्यम से मिल के स्टॉक, बिक्री और बैंक लेन-देन की नियमित समीक्षा की गई। साप्ताहिक रिपोर्ट तलब की गईं और स्पष्ट संदेश दिया गया कि भुगतान में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। इस सख्ती का असर भी दिखा और मिल प्रबन्धन द्वारा किए गए नियमित भुगतानों से किसानों को राहत तो मिली, लेकिन प्रशासन ने तब भी संतोष नहीं किया। स्पष्ट कहा गया कि जब तक पूरा भुगतान नहीं होगा, निगरानी जारी रहेगी।

शुक्रवार को किसान दिवस के अवसर पर आखिरकार वह क्षण आया, जब शेष बकाया का भी भुगतान कर दिया गया। मलकपुर चीनी मिल प्रबंधन ने विकास भवन में जिलाधिकारी अस्मिता लाल को शेष समुचित भुगतान का चेक सौंपा। कार्यक्रम किसानों की मौजूदगी में हुआ, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बनी।

भुगतान पूरा होने की सूचना मिलते ही किसानों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ नजर आया। कई किसानों ने कहा कि लंबे समय से वे कर्ज और अनिश्चितता के बीच जी रहे थे। अब बकाया समाप्त होने से वे आने वाले सत्र की तैयारी, खेतों में निवेश और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर निश्चिंत महसूस कर रहे हैं। किसानों ने जिला प्रशासन, विशेषकर जिलाधिकारी अस्मिता लाल का आभार जताया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि गन्ना किसान हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनका भुगतान समय पर हो—यह प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसे हर हाल में निभाया जाएगा। मलकपुर चीनी मिल प्रबंधन ने भी इस अवसर पर भविष्य के लिए नया संकल्प दोहराया। मिल प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि आगे किसी भी सत्र में गन्ना भुगतान में देरी नहीं होने दी जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025-26 पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अगैती प्रजाति का मूल्य ₹400 और सामान्य प्रजाति का ₹390 प्रति क्विंटल तय किया गया है। इससे किसानों को आर्थिक संबल मिला है। राज्य सरकार की यह नीति और जिला प्रशासन की सख्ती—दोनों ने मिलकर किसानों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है।

मलकपुर मिल द्वारा समस्त बकाया भुगतान होना सुशासन की मिसाल है जो दर्शाता है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, निगरानी सतत हो और इच्छाशक्ति स्पष्ट हो, तो किसानों को उनका हक दिलाया जा सकता है। बागपत का यह उदाहरण आने वाले समय में अन्य जिलों और चीनी मिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

अब जबकि 2024-25 सत्र का पूरा भुगतान हो चुका है, किसान नए उत्साह और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। समय पर भुगतान से खेती में निवेश बढ़ेगा, उत्पादन सुधरेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सूचना विभाग बागपत

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