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कई बार तो लगता है देश को आजाद करने के लिए राजगुरु सुखदेव भगत सिंह और न जाने कितने देश भक्तों ने हंसते-हंसते देश के लिए देश को आजाद करने के लिए फांसी के तख्ते पर झूल गए या अन्य प्रकार से शहीद हो गए

और पीछे छोड़ के चालक स्वार्थी मतलबी मौका परस्त लोगों को, कुछ लोग तो देश में 95 साल से देश की सत्ता पर कब्जा जमाई रखने का सपना सजाए हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे जो आज देश देश के लोगों को कुछ भी नहीं समझते मेरे अपने विचार है किसी और के नहीं देश के लोगों का हक अधिकार छीना बस इनकी फितरत में कूट-कूट कर भरा है बात तो बहुत सारी है लेकिन क्या लिखें चुप रहना ही आज के दौर में ज्यादा से ही है सोचा था कांग्रेस ने देश में कुछ नहीं किया किसी और को मौका देना चाहिए क्या पता था वह उनके भी परदादा निकलेंगे
अपना कर्तव्य हर कोई भूल गया देश के चारों स्तंभ हो या हो देश की सरकार सभी अपना कर्तव्य भूल गए चाहे दर से चाहे लालच से या अन्य किसी और प्रकार से सभी अपना कर्तव्य भूल गए
जय हिंद

निवेदक
सुभाष चंद कश्यप 9837749557 23 नवंबर 2025

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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