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  • पीएम–सीएम के फोटो भी छिपे, नागरिकों में रोष
    खेकड़ा।
    तहसील मुख्य द्वार पर लगी सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाली बड़ी होर्डिंग पर एक निजी क्लीनिक संचालक ने अपना प्रचार बैनर चस्पा कर दिया। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का विवरण ढक गया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चित्र भी छिप गए। घटना से क्षेत्र के जागरूक नागरिकों में नाराजगी व्याप्त है।
    तहसील गेट पर लगा यह बोर्ड सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, ताकि आम जनता उन्हें आसानी से समझकर लाभ उठा सके। लेकिन शुक्रवार को बागपत के एक क्लीनिक संचालक ने इस पर अपना विज्ञापन बैनर चस्पा कर पूरा बोर्ड ढक दिया। क्लीनिक के बैनर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के साथ उक्त चिकित्सक का फोटो भी लगाया गया है, जिसे लेकर लोगों में और अधिक नाराजगी देखी गई। घटना की जानकारी जैसे ही नागरिकों को हुई, उन्होंने तत्काल एसडीएम निकेत वर्मा को इसकी शिकायत कर दी। हालांकि शिकायत के कई घंटे बाद भी तहसील प्रशासन द्वारा बैनर हटाया नहीं गया था। इसी वजह से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर निजी प्रचार करना नियमों का खुला उल्लंघन है और प्रशासन को इसकी तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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