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बागपत ::- खट्टा प्रहलादपुर गांव के जंगल में निर्माणाधीन देवता स्थल की छत के लिंटर के सरिये में हाईटेंशन लाइन का तार टकरा गया, इससे सरिये में करंट उतर गया। करंट लगने से 12वीं के कक्षा छात्र रितिक (17) नीचे गिर गए और उनकी मौत हो गई। वहां आए पुलिसकर्मियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। खट्टा प्रहलादपुर गांव निवासी प्रमोद का बेटा रितिक बृहस्पतिवार शाम गांव के ही परिचित मिस्त्री धर्मपाल के साथ जंगल में निर्माणाधीन देवता स्थल चला गया था। वहां पर रितिक भी मिस्त्री के साथ लिंटर निर्माण के लिए सरिये बांधने लगा। तभी एक सरिया थोड़ा ऊपर उठाते ही ऊपर से गुजर रही बिजली की हाईटेंशन लाइन से से छू गया जिससे सरिए में करंट उतर गया। वहां झटका लगते ही रीतिक नीचे जमीन पर गिर गया। मिस्त्री धर्मपाल और अन्य युवकोंं ने उसके परिवार वालों को घटना के बारे में बताया। परिवार वाले रितिक को लेकर बालैनी के निजी अस्पताल में जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही रितिक की मौत हो गई। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी और पोस्टमार्टम में बिसरा सुरक्षित रख लिया गया। इसमें जांच अधिकारी अतर सिंह का कहना है कि अभी तहरीर नहीं मिली। तहरीर मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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