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बागपत-- आज *चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय संस्थान बागपत में बड़ौत  मेडिसिटी हॉस्पिटल बड़ौत, जिला बागपत के  सौजन्य से एक कैंप का आयोजन* किया गया lइस कैंप का उद्देश्य एम्पलाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (ईएसआईसी) के अंतर्गत आने वाले सभी लाभार्थियों को इसकी सुविधा के बारे में जानकारी प्रदान करना रहा l ताकि समय-समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ आवश्यकता अनुसार लिया जा सकेl कार्यक्रम का *उद्घाटन चौधरी गजेंद्र सिंह कुंडू, (खाप चौधरी उo प्रo) व डॉक्टर आलोक सहायक आयुक्त  के द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर* किया गया l डॉ कपिल तोमर फिजिशियन, डॉ सुदेश कुमार व विक्रांत पवार पी आर ओ,  ईएसआईसी द्वारा मेडिसिटी हॉस्पिटल में उपलब्ध कराई जा रही सभी सुविधाओं के बारे में जानकारी दी l कार्यक्रम में उपस्थित सभी लाभार्थियों का ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा व शुगर आदि की जांच की गईl डॉक्टर कपिल तोमर द्वारा हृदय रोग के बारे में,  वायरल बुखार से बचने के सुझाव, नियमित व्यायाम, आहार के बारे में तथा दिनचर्या के बारे में लाभकारी जानकारी प्रदान कीl सिस्टर रिया तोमर, फरहीन अंसारी, परवीन खान व ज्योति द्वारा उपरोक्त कार्यक्रम में जांच आदि में भरपूर सहयोग कियाl इस अवसर पर निखिल धनखड़, राजा, सतपाल, मोहित चिकारा सहित लगभग 40 लाभार्थी उपस्थित रहे

चौधरी गजेंद्र सिंह कुंडू, खाप चौधरी,
कुंडू खाप (उत्तर प्रदेश)*

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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation

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