बागपत ::- दीपावली पर्व पर पटाखे छोड़ने को लेकर शहर के देवी चौक मोहल्ले में कुछ युवकों ने महिला मोनी के परिवार पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। मोनी ने पथराव करने का भी आरोप लगाया। वहां आए पुलिसकर्मियों ने किसी तरह मामला शांत कराकर दोनों पक्षों के पांच युवकों को गिरफ्तार कर शांतिभंग में कार्रवाई कर दी। झंकार गली निवासी मोनी ने बताया कि उसकी जेठानी देवी चौक मोहल्ले में रहती है। सोमवार देर रात दीपावली पर्व पर उसका बेटा और जेठानी के बेटे अपने घर के बाहर पटाखे छोड़ रहे थे। तभी आसपास के युवक वहां आकर तीनों के साथ गाली-गलौज करने लगे और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। परिवार के लोगों ने वहां जाकर बीच बचाव कराने का प्रयास किया तो हमलावरों के परिवार वालों ने भी लाठी-डंडों से हमला कर दिया और पथराव करते हुए जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। घायल किशोरों का सीएचसी में उपचार कराया गया। उधर, झगड़े की सूचना पर वहां आए पुलिसकर्मियों ने किसी तरह मामला शांत कराया और आपस में झगड़ा करने पर पांच युवकों को पकड़ लिया। जांच अधिकारी दीक्षित कुमार त्यागी ने बताया कि महताब, उसके भाई सोनू, भीम और उसके बेटे समेत पांच के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई।
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जिस नौकरी को पाने के लिए छात्र दिन रात मेहनत करते हैं मैडम ने हंसते हुए त्याग पत्र दे दिया। अंदर का पता नहीं लेकिन पाती को पढ़ना चाहिए। धन्य है वो परिवार जिसके साये में संस्कार मिले। पढ़िए ये त्यागपत्र…IAS दिव्या मित्तल मैडम ने x पर लिखा है कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है।साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है। #ias #divyamittal #Resignation
Aug 31, 2026
subhashchand4